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भारत ने UN में वीटो पॉवर की प्रक्रिया पर उठाए सवाल, राजदूत हरीश ने सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए दिए सुझाव

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 27 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
भारत ने UN में वीटो पॉवर की प्रक्रिया पर उठाए सवाल, राजदूत हरीश ने सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए दिए सुझाव

Veto Power: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और वीटो के अधिकार को लेकर भारत ने एक बार फिर अपना रुख स्पष्ट किया है.

भारत ने कहा है कि दुनिया की सबसे बड़ी सुरक्षा संस्था की संरचना आज की वैश्विक परिस्थितियों के मुताबिक होनी चाहिए, न कि 80 साल पुराने समीकरणों के आधार पर.

भारत ने वीटो के इस्तेमाल पर संयम बरतने की जरूरत बताते हुए सवाल उठाया है कि जब कुछ देशों के पास फैसले रोकने की विशेष शक्ति है, तो सुरक्षा परिषद को अधिक लोकतांत्रिक और प्रभावी कैसे बनाया जा सकता है?

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पर्वतानेनी हरीश ने सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग दोहराई है. उन्होंने कहा कि सुधारों को लेकर स्पष्ट समय-सीमा और लक्ष्य तय किए जाने चाहिए.

इसके साथ ही लिखित प्रस्तावों के आधार पर बातचीत जल्द से जल्द शुरू होनी चाहिए. भारत इस प्रक्रिया में सभी देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार है.

वीटो के अधिकार पर चर्चा करना पर्याप्त नहीं- हरीश हरीश ने कहा कि सुरक्षा परिषद में केवल वीटो के अधिकार पर चर्चा करना पर्याप्त नहीं है.

परिषद के कामकाज में ऐसे कई तरीके हैं, जिनके जरिए कोई सदस्य किसी फैसले को रोक सकता है. इनमें राष्ट्रपति के बयान, प्रेस बयान और प्रतिबंध समितियों के फैसले भी शामिल हैं.

कई बार किसी एक सदस्य की असहमति के कारण फैसले नहीं हो पाते और इसकी वजह भी स्पष्ट नहीं की जाती.

उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद में सुधार का उद्देश्य केवल वीटो के इस्तेमाल पर रोक लगाना नहीं, बल्कि परिषद को मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप बनाना होना चाहिए.

इसकी संरचना में आज की दुनिया की वास्तविकताओं को जगह मिलनी चाहिए, न कि करीब 80 साल पहले हुए युद्ध के बाद बनी व्यवस्था को ही जारी रखा जाए. क्या है भारत का पक्ष?

भारत का मानना है कि जब तक वीटो का अधिकार बना रहता है, तब तक सुधारी गई सुरक्षा परिषद के सभी स्थायी सदस्यों को यह अधिकार मिलना चाहिए. हरीश ने कहा कि सभी स्थायी सदस्यों को समान अधिकार और जिम्मेदारियां मिलनी चाहिए.

स्थायी सदस्यों की अलग-अलग श्रेणियां बनाने से असमानता बढ़ेगी और सुधार की प्रक्रिया और जटिल हो जाएगी. उन्होंने यह भी कहा कि भारत का रुख अफ्रीकी देशों की साझा मांग के अनुरूप है.

भारत सुरक्षा परिषद को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण, निष्पक्ष और प्रभावी बनाने के लिए सुधार प्रक्रिया में योगदान देने को तैयार है.

📡 स्रोत: NewsData.io

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