भारत के विकास का अगला चरण गुणवत्ता आधारित होना आवश्यक: वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने कहा है कि भारत के विकास का अगला चरण गुणवत्ता पर आधारित होना चाहिए। नई दिल्ली में आज अखिल भारतीय प्रबंधन संघ के 53वें राष्ट्रीय प्रबंधन सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्रीमती सीतारामन ने कहा कि प्रत्येक कारखाने, बोर्डरूम, सेवा केंद्र और अनुसंधान तथा विकास दल को उच्च मानकों, कम दोषों और अधिक विश्वसनीयता के लिए प्रयासरत रहना चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि प्रबंधन पेशेवरों और बड़े उद्योगपतियों को गुणवत्ता के प्रति जागरूकता को एक साझा अनुशासन बनाना चाहिए। ये उत्पादों, प्रक्रियाओं, सेवाओं और संस्थानों में समाहित होने चाहिए।
श्रीमती सीतारामन ने इस बात का उल्लेख किया कि विश्व अर्थव्यवस्था एक अनिश्चित दौर से गुजर रही है। वैश्विक व्यापार और आपूर्ति श्रृंखलाओं की संरचना में भी समानांतर परिवर्तन हो रहा है। वित्त मंत्री ने कहा कि ऐसे वातावरण में लचीलेपन का अर्थ आर्थिक अलगाववाद में पीछे हटना नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि लचीलेपन का अर्थ भारत के लिए गहरी घरेलू क्षमता, राजकोषीय मजबूती और औद्योगिक पैमाना है ताकि राष्ट्रीय विकास को बाधित किए बिना वैश्विक झटकों को सहन किया जा सके।
उन्होंने कहा कि जहां वैश्विक आर्थिक विकास दर तीन प्रतिशत से नीचे धीमी हो रही है, वहीं भारतीय अर्थव्यवस्था लगभग 8 प्रतिशत की दर से विस्तार कर रही है। उन्होंने कहा कि पिछली तिमाही में अधिकांश पूर्वानुमानों की तुलना में अधिक मजबूत वृद्धि दर्ज की गई।
श्रीमती सीतारामन ने कहा कि यह व्यापक आर्थिक स्थिरता दुनिया को भारत का पुनर्मूल्यांकन करने के लिए प्रेरित कर रही है। उन्होंने बताया कि 2 सितंबर 2026 को जापान क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ने भारत की दीर्घकालिक विदेशी मुद्रा और स्थानीय मुद्रा जारीकर्ता रेटिंग को बीबीबी-प्लस से बढ़ाकर ए-माइनस कर दिया। इसमें स्थिर दृष्टिकोण शामिल है। इसने देश की रेटिंग सीमा को ए तक बढ़ा दिया।