भरतपुर के केवलादेव नेशनल पार्क पहुंचे 12 देशों के 18 प्रतिभागी
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भरतपुर के विश्व धरोहर केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान का 12 देशों के 18 प्रतिभागियों ने भ्रमण किया। प्रतिभागियों को उद्यान के इतिहास, विश्व धरोहर और रामसर स्थल के रूप में इसके महत्व की जानकारी दी गई।
भरतपुर, 20 अक्टूबर। विदेश मंत्रालय की पहल पर भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून की ओर से संचालित सर्टिफिकेट कोर्स इन नेचुरल हेरिटेज मैनेजमेंट के प्रतिभागियों ने भरतपुर स्थित विश्व धरोहर केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान का भ्रमण किया। इस दौरान एशिया और अफ्रीका के 12 देशों से आए 18 प्रतिभागी शामिल हुए। इनमें प्राकृतिक विश्व धरोहर स्थलों के प्रबंधक तथा पर्यावरण, वन और पर्यटन मंत्रालयों के अधिकारी भी शामिल रहे।
भ्रमण का उद्देश्य प्रतिभागियों को केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान के इतिहास, प्राकृतिक विरासत और संरक्षण के महत्व से परिचित कराना था। इस दौरान उद्यान की विशेषताओं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी पहचान के बारे में जानकारी दी गई।
विश्व धरोहर और रामसर स्थल के महत्व से कराया अवगत
केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान की सहायक वन संरक्षक सायली शिंदे ने बताया कि भ्रमण के दौरान प्रतिभागियों को उद्यान के इतिहास और विश्व धरोहर स्थल के रूप में इसके महत्व की जानकारी दी गई। साथ ही, रामसर स्थल के रूप में इसकी पहचान और प्राकृतिक विरासत के संरक्षण में इसकी भूमिका के बारे में भी बताया गया।
इस भ्रमण में भूटान, इथियोपिया, केन्या और जिम्बाब्वे सहित एशिया और अफ्रीका के 12 देशों के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इनमें प्राकृतिक विश्व धरोहर स्थलों के प्रबंधकों के साथ पर्यावरण, वन एवं पर्यटन मंत्रालयों के अधिकारी भी शामिल थे।
भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून के इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से प्रतिभागियों को प्राकृतिक विरासत के प्रबंधन और संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों का व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया जा रहा है। केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान का भ्रमण इसी पहल का हिस्सा रहा।
होल्ड बाइट
1- सायली शिंदे , सहायक वन संरक्षक केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान ।
2- डॉ. सुरेश कुमार - सदस्य - भारतीय वन्य जीव संस्थान देहरादून ।
3- विदेशी प्रतिभागी।