भास्कर अपडेट्स:IIT बॉम्बे सुसाइड केस में प्रोफेसर डुल्ला से 8 घंटे पूछताछ, बयान दर्ज; डायरेक्टर केदारे को भी बुला सकती है क्राइम ब्रांच
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IIT बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच ने प्रोफेसर सूर्यनारायण डुल्ला से करीब 8 घंटे पूछताछ की और उनका बयान दर्ज किया। साहिल के माता-पिता ने प्रोफेसर डुल्ला पर बेटे को परेशान करने का आरोप लगाया था। प्रोफेसर ने पूछताछ के दौरान इन आरोपों से इनकार किया।
मुंबई पुलिस के मुताबिक, क्राइम ब्रांच IIT बॉम्बे के डायरेक्टर शिरीष केदारे को भी पूछताछ के लिए बुला सकती है। क्राइम ब्रांच अब तक साहिल के माता-पिता और क्लासमेट समेत करीब 50 लोगों के बयान दर्ज कर चुकी है। जांच टीम परीक्षा हॉल की CCTV फुटेज भी खंगाल रही है, ताकि साहिल के साथ परीक्षा के दौरान और उसके बाद हुई घटनाओं की कड़ी जोड़ी जा सके।
इधर, मुंबई के आजाद मैदान में साहिल के माता-पिता पिछले 6 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। वे प्रोफेसर डुल्ला की गिरफ्तारी की मांग कर रहे है। 22 साल का साहिल IIT बॉम्बे के एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में बीटेड सेकेंड ईयर का छात्र था। 18 सितंबर की शाम वह हॉस्टल के कमरे में मृत मिला।
मौत से कुछ घंटे पहले वह मिड-सेमेस्टर एग्जाम में मोबाइल फोन से साथ पकड़ा गया था। आज की अन्य बड़ी खबरें… मुंबई में 7 बांग्लादेशी नागरिक हिरासत में, अवैध रूप से भारत में रहने का आरोप; एक पुरुष, 4 महिलाएं और 2 बच्चे शामिल मुंबई के नालासोपारा ईस्ट में पुलिस ने भारत में कथित तौर पर अवैध रूप से रह रहे 7 बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया है।
जूहू पुलिस स्टेशन की एंटी-टेररिज्म सेल ने सूचना मिलने के बाद जय जीवदानी चाल के एक कमरे में छापा मारा। यहां एक पुरुष, चार महिलाएं और दो बच्चे मिले। पूछताछ के दौरान सभी ने खुद को बांग्लादेश के नरैल जिले का रहने वाला बताया। पुलिस के मुताबिक, जांच में सामने आया कि वे बिना किसी आधिकारिक अनुमति के भारत में दाखिल हुए थे।
मामले में आगे की जांच की जा रही है।
📡 स्रोत: Dainik Bhaskar
💡 पृष्ठभूमि (Background)
IIT बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या के बाद, मुंबई क्राइम ब्रांच ने प्रोफेसर सूर्यनारायण डुल्ला से लगभग आठ घंटे पूछताछ की और उनका बयान दर्ज किया। यह विषय शिक्षा संस्थानों में छात्र-शिक्षक संबंध और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रकाश डालता है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उच्च शिक्षा के प्रतिष्ठित संस्थान में संभावित कदाचार और छात्र कल्याण के प्रति पुलिस की जाँच की गंभीरता दर्शाती है। आम जनता पर इसका असर मनोवैज्ञानिक समर्थन की आवश्यकता और शैक्षणिक संस्थानों में पारदर्शिता की मांग को बढ़ा सकता