भास्कर अपडेट्स:मद्रास हाईकोर्ट बोला- महिलाएं अब तेजी से करिअर पर फोकस कर रही, पति घर संभाले
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
मद्रास हाई कोर्ट ने कहा है कि महिलाएं अब तेजी से करिअर पर फोकस कर रही हैं। इसका असर उनकी शादीशुदा जिंदगी पर भी पड़ रहा है। कई महिलाएं करिअर में रुकावट के डर से शादी टाल देती हैं। इसी वजह से अविवाहित महिलाओं की संख्या बढ़ रही है। कोर्ट ने सुझाव दिया कि इसका एक उपाय यह हो सकता है कि पति ‘होममेकर’ की भूमिका अपनाएं।
कोर्ट ने कहा कि अगर पत्नी घर संभाल सकती है, तो पति भी घर संभाल सकता है। यह न्यू नॉर्मल (सामान्य बात) बननी चाहिए। जस्टिस जीआर स्वामीनाथन और जस्टिस एमडी सुमति की बेंच ने यह टिप्पणी एक वैवाहिक विवाद से जुड़े मामले में की। पत्नी ने परिवार संभालते हुए पति को करिअर में सपोर्ट किया, लेकिन बाद में विवाद बढ़ गया।
हाई कोर्ट ने शादी खत्म करते हुए पत्नी को 1.5 करोड़ और दो बच्चों को 50-50 लाख रुपए देने का आदेश दिया। आज की अन्य खबरें… राजस्थान हाईकोर्ट बोला- अनुकंपा नौकरी वाली बहू सास को दे 25% वेतन राजस्थान हाई कोर्ट ने पति की अनुकंपा नौकरी लेकर दूसरी शादी करने वाली बहू को 25% वेतन और टर्मिनल बेनेफिट्स की 50% राशि पहली सास को देने को कहा है।
जस्टिस आनंद शर्मा ने यह आदेश कमली देवी की याचिका पर दिया। उनकी बहू ने नौकरी मिलने के कुछ समय बाद दूसरी शादी कर ली थी और सास की आर्थिक मदद बंद कर दी थी। नाबालिगों से यौन अपराध पर डीसीपीसीआर सख्त, मांगी रिपोर्ट दिल्ली में नाबालिगों को निशाना बनाकर किए गए यौन अपराध के लगातार सामने आ रहे मामलों पर दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग (डीसीपीसीआर) ने सख्ती दिखाई है।
आयोग ने तीनों मामलों का संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार से की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने पुलिस को नोटिस का जवाब दो सप्ताह के भीतर देने के निर्देश दिए हैं। डीसीपीसीआर बच्चों से जुड़े अपराधों और उनके अधिकारों के संरक्षण से संबंधित मामलों की निगरानी करता है।
आयोग पॉक्सो एक्ट, किशोर न्याय कानून सहित बाल संरक्षण से जुड़े प्रावधानों के क्रियान्वयन पर भी नजर रखता है। आयोग की कार्रवाई के बाद अब पुलिस की जांच और आरोपियों के खिलाफ उठाए गए कदमों की रिपोर्ट आयोग के सामने रखनी होगी।
📡 स्रोत: Dainik Bhaskar
💡 पृष्ठभूमि (Background)
मद्रास हाई कोर्ट ने बताया कि आज के समय में महिलाएँ तेजी से करियर पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं, जिससे पारंपरिक शादी और पारिवारिक भूमिकाओं पर असर पड़ रहा है। यह विषय आधुनिक समाज में लिंग भूमिकाओं के पुनर्विचार के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह दर्शाता है कि कामकाजी महिलाओं की आकांक्षाएँ पारिवारिक संरचना को कैसे बदल रही हैं। इस बदलाव से अविवाहित महिलाओं की संख्या बढ़ रही है और पारिवारिक जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण हो रहा है। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि पारिवारिक निर्णय लेने में दोनों
🎙️ जनता का संदेश का मत
समय के बदलते स्वरूप में जब महिलाएँ करियर के प्रति समर्पित हो रही हैं, तो यह ज़रूरी है कि दोनों साथी अपने भूमिकाओं को समान रूप से निभाएँ। घरेलू जिम्मेदारियों को साझा करके, दम्पति न केवल संतुलन पाते हैं, बल्कि आपसी सम्मान और विश्वास भी बढ़ाते हैं। यदि संघर्ष उत्पन्न हो, तो संवाद और कानूनी सहायता से समाधान खोजें। इस परिवर्तन को स्वीकार कर, हम एक समावेशी समाज का निर्माण कर सकते हैं, जहाँ हर व्यक्ति को अपनी पहचान और योगदान का समान अधिकार मिले।