भटीगवां खुर्द की बेटियों ने बदली गांव की तस्वीर, कोई उड़ा रही ड्रोन तो कोई चला रही ई-रिक्शा
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
इसी दिशा में शहडोल जिले की मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ सीमा से लगे भटीगवां खुर्द पंचायत में बदलाव की एक प्रेरक तस्वीर सामने आ रही है। यहां की किसान दीदियों ने साबित कर दिया है कि अवसर, प्रशिक्षण और सहयोग मिले तो गांव की महिलाएं भी आसमान में ड्रोन उड़ा सकती हैं, सड़कों पर ई-रिक्शा चला सकती हैं और आधुनिक कृषि यंत्रों के माध्यम से अपनी तथा दूसरे किसानों की जिंदगी आसान बना सकती हैं।
प्रदेश सरकार की ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण की भावना को धरातल पर साकार करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा भी आजीविका की गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। कलेक्टर श्री पार्थ जायसवाल ने भटीगवां खुर्द पहुंचकर महिलाओं द्वारा संचालित विभिन्न गतिविधियों का अवलोकन किया और उनके हुनर, आत्मविश्वास एवं मेहनत की सराहना की। प्रशासन का प्रयास है कि ग्रामीण महिलाएं केवल योजनाओं की हितग्राही बनकर न रहें, बल्कि रोजगार के नए अवसरों से जुड़कर गांव की आर्थिक प्रगति में नेतृत्वकारी भूमिका निभाएं।
इस बदलाव को आगे बढ़ाने में प्रदान संस्था द्वारा आदित्य बिरला कैपिटल फाउंडेशन के वित्तीय सहयोग से भी विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इन प्रयासों के माध्यम से कृषि, ऊर्जा, शिक्षा, परिवहन, पशुपालन और डिजिटल सुविधाओं को गांव के परिवारों तक पहुंचाने का काम किया जा रहा है।
गांव की किसान दीदी शकुंतला इस बदलाव की सबसे प्रेरक तस्वीर हैं। उन्होंने इंदौर से ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण प्राप्त किया और अब ड्रोन के माध्यम से खेतों में खाद एवं कीटनाशक का छिड़काव कर रही हैं। जिस काम में पहले अधिक समय और मेहनत लगती थी, उसे अब कम समय में बड़े क्षेत्र में पूरा किया जा सकता है। इससे किसानों को सुविधा मिलने के साथ शकुंतला के लिए आय का नया साधन भी विकसित हुआ है।
जब कलेक्टर पार्थ जायसवाल गांव पहुंचे और शकुंतला को ड्रोन से खेतों में छिड़काव करते देखा, तो उन्होंने इस पहल की सराहना की। शकुंतला के लिए ड्रोन केवल एक मशीन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने और अपनी पहचान बनाने का माध्यम बन गया है।
गौरी सिंह ने ई-ऑटो रिक्शा की कमान अपने हाथों में लेकर रोजगार का नया रास्ता बनाया है। वे गांव के लोगों को बाजार और अन्य आवश्यक स्थानों तक पहुंचाने में मदद कर रही हैं। इस काम से उन्हें प्रतिदिन लगभग 500 रुपये तक की आमदनी हो रही है। उनके ई-रिक्शा से गांव के दूसरे लोगों को भी परिवहन की सुविधा मिल रही है।
इसी तरह चंद्रवती सिंह रीपर मशीन के माध्यम से धान और गेहूं की कटाई का कार्य कर रही हैं। पंचायत में उपलब्ध दो रीपर मशीनों से आसपास के गांवों के किसान परिवारों को भी लाभ मिल रहा है। कभी पारंपरिक कृषि कार्यों तक सीमित रहने वाली महिलाएं आज आधुनिक कृषि यंत्रों का संचालन कर रोजगार के नए अवसर पैदा कर रही हैं।
गांव में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए 200 परिवारों को सोलर लाइट उपलब्ध कराई गई है। इससे ग्रामीण परिवारों को सौर ऊर्जा आधारित प्रकाश की सुविधा मिल रही है। एक डिजिटल दीदी को कंप्यूटर सेटअप उपलब्ध कराया गया है, जिससे ग्रामीणों को ऑनलाइन आवेदन भरने जैसे कार्यों के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। दो प्रिंटर की व्यवस्था से फोटो कॉपी और प्रिंट की सुविधा भी गांव में ही उपलब्ध हो रही है।
बच्चों की शिक्षा और विद्यालयों की सुरक्षा को भी महत्व दिया गया है। भटीगवां कला माध्यमिक विद्यालय में चार सुरक्षा कैमरे लगाए गए हैं, वहीं भटीगवां खुर्द के प्राथमिक विद्यालय में बच्चों की पढ़ाई को अधिक रोचक और आधुनिक बनाने के लिए डिजिटल स्मार्ट बोर्ड उपलब्ध कराया गया है।
गांव के लगभग 70 प्रतिशत परिवार जैविक खेती से जुड़ चुके हैं। रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों पर निर्भरता कम कर कम लागत में बेहतर खेती करने की दिशा में परिवार आगे बढ़ रहे हैं। यह पहल मिट्टी की सेहत और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। फलदार पौधों के रोपण को आसान बनाने के लिए गड्ढा खोदने वाली मशीन और फसलों की कतार में बुवाई करने के लिए एक सीड ड्रिल मशीन उपलब्ध कराई गई है। इन कृषि यंत्रों से किसानों का श्रम और समय बच रहा है तथा खेती में आधुनिक तकनीक का उपयोग बढ़ रहा है।