भीलवाड़ा लोक अदालत में 21 बेंच, 86 लाख का अवार्ड
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भीलवाड़ा में तृतीय राष्ट्रीय लोक अदालत के तहत 21 बेंचों पर हजारों प्रकरणों के निस्तारण की प्रक्रिया जारी है। एमएसीटी बेंच में करीब 86 लाख रुपये का अवार्ड पारित किया गया।
भीलवाड़ा, 10 अक्टूबर | भीलवाड़ा के जिला एवं सेशन न्यायालय परिसर में इस वर्ष की तृतीय राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है। जिला एवं सेशन न्यायाधीश अभय जैन के निर्देश पर राजीनामे योग्य प्रकरणों के निस्तारण के लिए जिले में कुल 21 बेंचों का गठन किया गया है। इनमें भीलवाड़ा मुख्यालय पर पांच बेंचों के माध्यम से मामलों का निस्तारण किया जा रहा है।
लोक अदालत में सिविल, फौजदारी, राजस्व, बैंक, बिजली, पारिवारिक विवाद, मोटर दुर्घटना दावा, चेक बाउंस और अन्य राजीनामा योग्य मामलों को आपसी सहमति से सुलझाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस दौरान न्यायालयों में लंबित 18,450 और अन्य श्रेणियों के 16,500 प्रकरण समझौते के लिए चिह्नित किए गए हैं।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव रश्मि आर्य ने बताया कि लोक अदालत में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) बेंच के माध्यम से करीब 86 लाख रुपये का अवार्ड पारित किया गया है। मामलों के निस्तारण के लिए वित्त विभाग, बिजली विभाग, बैंकों और अन्य संस्थाओं के अधिकारी, बैंककर्मी तथा अधिवक्ता मौजूद हैं। अधिक से अधिक प्रकरणों का आपसी सहमति से निस्तारण सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों और अधिवक्ताओं के साथ बैठकें भी की गईं।
सचिव रश्मि आर्य ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत आमजन को सुलभ और सौहार्दपूर्ण न्याय उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसमें किसी पक्ष की हार या जीत के बजाय आपसी सहमति से विवादों का समाधान किया जाता है। जमीन के बंटवारे, पारिवारिक विवाद, चेक बाउंस और छोटी-मोटी मारपीट जैसे राजीनामा योग्य मामलों में पक्षकारों को समझौते के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
लोक अदालत का उद्देश्य लंबे समय से लंबित विवादों का शीघ्र समाधान कराना, न्यायालयों में मामलों का बोझ कम करना और दोनों पक्षों के बीच आपसी मनमुटाव दूर करना है, ताकि विवादों का शांतिपूर्ण निस्तारण कर पक्षकार नई शुरुआत कर सकें।
बाइट - रश्मि आर्य, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, भीलवाड़ा
🎙️ जनता का संदेश का मत
भीलवाड़ा की लोक अदालत के प्रयास से लाखों रुपये का अवार्ड मिलने से यह स्पष्ट होता है कि न्यायालयों के माध्यम से विवादों का समाधान संभव है। जब भी किसी असहमति का सामना हो, तो कानूनी मार्ग अपनाना ही सबसे सुरक्षित और सम्मानजनक विकल्प है। समाज को यह सिखना चाहिए कि संघर्षों को शांतिपूर्वक और कानून के तहत सुलझाने से न केवल व्यक्तिगत हित सुरक्षित रहते हैं, बल्कि सामूहिक विश्वास और समरसता भी बढ़ती है।