भिवानी में किसानों को जागरूक करने उतरा प्रशासन
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एंकर :- पर्यावरण संरक्षण और धरती की उर्वरा शक्ति को बचाए रखने के लिए भिवानी जिला प्रशासन व कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने किसानों को जागरूक करने की एक बड़ी सकारात्मक पहल शुरू की है। किसानों को पराली जलाने से रोकने और आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों से इसके सही प्रबंधन के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से भिवानी में शुक्रवार को कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में जिले के पंच, सरपंच, ग्राम सचिव तथा नंबरदारों को जोडक़र एक साझा मंच तैयार किया गया, ताकि गांव-गांव जाकर किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के फायदों से अवगत कराया जा सके।
प्रशासन ने किसानों से संवाद करते हुए स्पष्ट किया कि पराली धुआं नहीं बल्कि एक बहुमूल्य जैविक संपदा है, जिसे खेतों में मिलाकर भूमि की उर्वरता बढ़ाई जा सकती है। इसके साथ ही विभागीय नियमों और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के दिशा-निर्देशों की जानकारी देते हुए किसानों से सहयोग की अपील की गई, ताकि कानूनी प्रावधानों और बीएनएस की धारा 163 के तहत होने वाली दंडात्मक कार्रवाई की नौबत ही न आए और किसान जागरूक होकर अपनी जिम्मेदारी निभाएं।
कार्यशाला में भिवानी के कृषि अभियंता नसीब सिंह धनखड़ ने विभागीय योजनाओं और तकनीकी सहायता की जानकारी देते हुए बताया कि प्रशासन का मुख्य लक्ष्य किसानों को जागरूक करना और हर संभव मदद पहुंचाना है। उन्होंने बताया कि गांव स्तर पर हर सौ किसानों के मार्गदर्शन के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है, जो सीधे किसानों से संपर्क कर उन्हें विभागीय सब्सिडी और प्रबंधन के तरीकों की जानकारी देंगे।
किसानों की सुविधा के लिए विभाग वर्ष 2018 से अब तक 50 प्रतिशत अनुदान पर साढ़े तीन से चार हजार आधुनिक कृषि यंत्र जैसे सुपर सीडर, बेलर और रोटावेटर उपलब्ध करवा चुका है, जिससे किसान बिना जलाए एक ही दिन में पराली को मिट्टी में मिलाकर गेहूं की बिजाई कर सकते हैं। उन्होंने किसानों को समझाते हुए कहा कि मिट्टी में 16 प्रकार के पोषक तत्व होते हैं, पराली में आग लगाने से ये तत्व और मित्र कीट नष्ट हो जाते हैं, जिससे फसल की पैदावार घटती है।
उन्होंने बताया कि प्रशासन सैटेलाइट और संयुक्त टीमों के जरिए निगरानी भी रख रहा है और नियमों के तहत आगजनी पर पांच से तीस हजार रुपये तक का जुर्माना, एफआईआर और दो सीजन तक एमएसपी पर बिक्री पर रोक जैसे प्रावधान तय हैं, लेकिन यदि किसान जागरूक होकर सहयोग करेंगे तो वे इन सभी समस्याओं से बच सकते हैं।
कार्यशाला में अपने विचार रखते हुए ग्राम पंचायत बीरण के सरपंच सुल्तान सिंह ने कहा कि पराली जलाने से पर्यावरण दूषित होता है और धरती मां की उपजाऊ शक्ति कमजोर पड़ती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि उनके क्षेत्र में किसान और पशुपालक पराली को चारे और बिछावन के रूप में इस्तेमाल करते हैं, जिससे यह समस्या नहीं बनती। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे गांव स्तर पर किसानों के बीच जाकर उन्हें समझाएंगे कि पराली जलाने की बजाय उसका सदुपयोग करें, जिससे जमीन के पोषक तत्व सुरक्षित रहें और गांव का वातावरण शुद्ध बना रहे।
वहीं, गांव राजपुरा खरकड़ी के सरपंच रविंद्र ने कहा कि पराली को जलाने से मिट्टी और वातावरण दोनों को भारी नुकसान पहुंचता है। उन्होंने कहा कि अगर किसान पराली को पशुओं के सूखे व हरे चारे के रूप में उपयोग करें तो इससे पशुपालकों को भी लाभ होगा और खेत भी सुरक्षित रहेंगे। सरपंच रविंद्र ने बताया कि कृषि विभाग की इस जागरूकता मुहिम और सरकारी संदेश को हर किसान के घर तक पहुंचाने के लिए गांव में मुनादी करवाई जाएगी और सोशल मीडिया तथा व्हाट्सएप ग्रुपों के जरिए किसानों को प्रेरित किया जाएगा ताकि कोई भी भाई अपने खेत में आग न लगाए।
बाईट :- भिवानी के कृषि अभियंता नसीब सिंह धनखड़, ग्राम पंचायत बीरण के सरपंच सुल्तान सिंह व गांव राजपुरा खरकड़ी के सरपंच रविंद्र।