भोपाल- एम्स में मिथिला कला की कार्यशाला, प्रतिभागियों ने जानी मधुबनी चित्रकला की बारीकियां
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कार्यशाला का संचालन निधि ठक्कर (मधुबनी पेंटिंग, डॉट आर्ट और स्टोन आर्ट की कलाकार) ने किया। उन्होंने बताया कि मिथिला कला कहां से आई, समय के साथ कैसे बदली और भारतीय संस्कृति में इसका क्या स्थान है। उन्होंने यह भी बताया कि मिथिला क्षेत्र में विवाह और त्योहारों के अवसर पर घरों की दीवारों और आंगनों को इस कला से सजाने की पुरानी परंपरा रही है।
सुश्री ठक्कर ने इस कला की खास पहचान, पारंपरिक आकृतियों, पैटर्न और रंगों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने समझाया कि बारीक और जटिल डिजाइन किन तरीकों से बनाए जाते हैं। कामकाज की भागदौड़ और रोजमर्रा के दबाव के बीच ऐसी कार्यशालाएं मन को सुकून देने का अच्छा जरिया बनती हैं। रंगों और रेखाओं के साथ समय बिताने से रचनात्मकता निखरती है, तनाव घटता है और मन को शांति मिलती है।
जब विद्यार्थी, संकाय सदस्य और कर्मचारी मानसिक रूप से तरोताजा रहते हैं, तो वे अपना काम ज्यादा एकाग्रता और कुशलता से कर पाते हैं।