भोपाल - शहीद पुलिस जवानों की स्मृति को नमन करने गरिमामय तरीके से मनेगा पुलिस स्मृति दिवस
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
शहीद पुलिस जवानों की स्मृति को नमन करने गरिमामय तरीके से मनेगा पुलिस स्मृति दिवस
एडीजी श्री डी. श्रीनिवास वर्मा ने बैठक लेकर तैयारियों की समीक्षा की, अधिकारियों को सौंपी जिम्मेदारियां
पुलिस के उन वीर जवानों के बलिदान और शौर्य की स्मृति में, जिन्होंने कर्तव्य निर्वहन के दौरान अपने प्राण न्यौछावर किए, 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस गरिमापूर्ण तरीके से मनाया जाएगा। कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एसएएफ) श्री डी. श्रीनिवास वर्मा ने शुक्रवार को अधिकारियों की बैठक लेकर तैयारियों की समीक्षा की तथा सभी व्यवस्थाएं निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश देते हुए विभिन्न अधिकारियों को जिम्मेदारियां सौंपीं।
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्री वर्मा ने निर्देश दिए कि पुलिस स्मृति दिवस कार्यक्रम के लिए लाल परेड ग्राउंड परिसर स्थित स्मारक स्थल पर साज-सज्जा एवं बैठक व्यवस्था बेहतर ढंग से सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि मार्च-पास्ट में पुलिस बल की विभिन्न प्लाटूनों के साथ होमगार्ड की प्लाटून भी शामिल किया जाए, साथ ही अवश्रोही दल एवं श्वान दस्ता शामिल किया जाये। उत्कृष्ट मार्च-पास्ट के लिए नियमित पूर्वाभ्यास पर विशेष बल देते हुए उन्होंने इसकी तैयारियां समय से पूर्ण करने के निर्देश दिए।
श्री वर्मा ने पुलिस स्मृति दिवस में शामिल होने वाले शहीद पुलिसकर्मियों के परिजनों को सम्मानपूर्वक आमंत्रित करने तथा उनके आने-जाने एवं ठहरने की उत्कृष्ट व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही अन्य अतिथियों को समय पर एवं सम्मानपूर्वक आमंत्रित करने के लिए भी कहा।
बैठक में तय किया गया कि मार्च-पास्ट के लिए पूर्वाभ्यास 6 अक्टूबर से शुरू होगा, जबकि फुल-ड्रेस रिर्हसल परेड 19 अक्टूबर को आयोजित की जाएगी।
बैठक में सेनानी 7वीं वाहिनी श्री हितेश चौधरी, 23वीं वाहिनी श्री प्रमोद कुमार सिन्हा एवं 25वीं वाहिनी श्री नगेन्द्र सिंह सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
🎙️ जनता का संदेश का मत
शहीद पुलिस जवानों के बलिदान को याद करते हुए हम समाज में शांति और सहिष्णुता की नींव मजबूत कर सकते हैं। जब भी किसी विवाद का सामना हो, संवाद और कानूनी रास्ते अपनाएँ, ताकि हिंसा की आवश्यकता न पड़े। हर जीवन की कद्र करें और सहानुभूति से कार्य करें, जिससे हम एक सुरक्षित, समावेशी समाज का निर्माण कर सकें, जहाँ न्याय और सम्मान का शासन हो।