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'भूखी थी...2 रोटी उठा ली तो कहा-बाप की है क्या':दुबई से भोपाल लौटीं महिला बोलीं-कई दिन रोती रही, सोचती थी कैद से कैसे निकलूंगी

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 27 सितंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
'भूखी थी...2 रोटी उठा ली तो कहा-बाप की है क्या':दुबई से भोपाल लौटीं महिला बोलीं-कई दिन रोती रही, सोचती थी कैद से कैसे निकलूंगी

उस दिन बहुत भूख लगी थी। सामने खाना रखा था। दो रोटी उठा ली। तभी वहां मौजूद एक महिला की नजर मुझ पर पड़ी। वह कहने लगी, क्या ये रोटी इसके बाप की है। यह सुनते ही मेरे हाथ रुक गए। रोटियां वापस रख दीं। ये चुभने वाले शब्द जिस महिला ने कहे थे, उसके लिए शायद वे सिर्फ दो रोटियां थीं। लेकिन मेरे लिए वे पूरी जिंदगी का आईना बन गए।

जिस दुबई में पैसे कमाने गई थी, वहां कई दिन ऐसे गुजरे। भूख लगी होने के बावजूद भरपेट खाना नहीं खा सकी। कमजोर होती गई। रोती रही। घरवालों से बात करने के लिए तरसती रही। मन में सिर्फ एक ही सवाल घूमता रहा- ‘मैं यहां से वापस कैसे जाऊंगी?’ यह कहानी मध्य प्रदेश के भोपाल की रहने वाली सुल्ताना (बदला हुआ नाम) की है।

वह जून 2026 में एक एजेंट के जरिए दुबई गई थी। 10-12 हजार रुपए महीने की सैलरी पर बात हुई थी। उस एजेंट से सुल्ताना की मुलाकात मोहल्ले के ही परिचित के जरिए हुई थी। बताया था कि घरेलू काम करने हैं। एजेंट मोबिन ने कहा था कि वह दुबई पहुंचा देगा और इसके लिए उससे कोई पैसा नहीं लिया जाएगा। उसकी बातों में आकर दुबई चली तो गई लेकिन कहानी बदल गई।

घर लौटने का कहा तो वे डेढ़ लाख रुपए देने का कहने लगे। महिला ने दुबई पहुंचने के बाद किन परिस्थितियों में 3 महीने गुजारे, कैसे वह भारत लौटने में कामयाब हुईं। पढ़िए… टिकट भी मुंबई एयरपोर्ट पर दिया सुल्ताना बताती है कि टिकट और वीजा मुंबई एयरपोर्ट पहुंचने के बाद आखिरी समय में दिए गए। दुबई पहुंची तो वहां पहले से कई महिलाएं मौजूद थीं।

वे भी भारत के अलग-अलग हिस्सों से लाई गई थीं। कुछ दूसरी जगहों से भी आई थीं। वहां एक तरह का सेंटर था, जहां से अलग-अलग घरों में काम के लिए भेजा जाता था। शुरू में मुझे लगा कि काम करूंगी, पैसे कमाऊंगी और परिवार की मदद करूंगी। लेकिन, कुछ समय बाद ही हालात मेरे लिए मुश्किल होते गए। ऐसे में मैंने कहा कि वह और काम नहीं करना चाहती हूं, मुझे घर वापस जाना है।

तभी उनका व्यवहार बदलना शुरू हो गया। मुझसे कहा गया कि वापस जाना है तो डेढ़ लाख रुपए देने होंगे। वे बार-बार कहते थे- परिवार को फोन करो और पैसे मंगवाओ। मैंने एजेंट मोबिन से भी मदद मांगी थी, लेकिन उसने भी परिवार पर दबाव डालकर पैसे मंगाने की बात कह दी। मैं अपने परिवार से हजारों किलोमीटर दूर थी।

लौटने का कोई रास्ता नजर नहीं आता था। बाहर ताला...

नीचे जाने तक की आजादी नहीं सुल्ताना के मुताबिक, कुछ दिनों बाद उसे दूसरी जगह ले जाया गया। वहां वह ऊपर रहती थी। नीचे जाने वाले रास्ते पर बाहर से ताला लगा दिया जाता था। कैमरे लगे थे। मेरी गतिविधियों पर नजर रखी जाती थी। खाने के लिए नीचे जाती तो एक व्यक्ति मौजूद रहता। वह कहता था कि पैसे मिलेंगे, तभी जा पाओगी।

वह घरनुमा जगह कैद बन गई। दो रोटी उठाई, फिर वापस रख दी सुल्ताना की आवाज में सबसे ज्यादा दर्द खाने की बात बताते वक्त सुनाई देता है। वह बताती है कि सुबह-शाम खाना मिलता था, लेकिन सीमित मात्रा से ज्यादा यानी भरपेट खाना लेने पर टोका जाता था। एक दिन मैंने दो रोटियां उठा लीं। बहुत भूख लगी थी। तभी वहां मौजूद एक महिला ने डांटते हुए कहा- बाप का है क्या, जो भरकर खा रही है।

यह सुनने के बाद निवाला गले से नहीं उतरा, मैंने रोटियां वापस रख दीं। कुछ दिनों में हालत इतनी कमजोर हो गई कि तबीयत और ताकत दोनों गिरने लगी। महिलाओं को लाइन में खड़ा करते, कैमरे से देखते थे सुल्ताना का कहना है कि वहां महिलाओं पर नजर रखने के लिए कैमरों का इस्तेमाल किया जाता था। वहां मौजूद लोगों को पता रहता था कि कौन महिला क्या कर रही है।

कई बार महिलाओं को एक लाइन में खड़ा किया जाता था। अगर कोई महिला काम को लेकर सवाल करती, विरोध करती या ऊंची आवाज में जवाब देती तो उसके साथ गाली-गलौज की जाती। मैंने अपने सामने मारपीट होते देखी है। कई महिलाएं रात-रात भर रोती थीं। वे एक-दूसरे से कहती थीं कि किसी तरह यहां से निकलना है। मुझे डर इस बात का था कि आज जो दूसरी महिला के साथ हो रहा है, कहीं कल मेरे साथ न हो जाए।

‘महिलाओं को मारते थे...

मैं डर गई थी’ सुल्ताना के मुताबिक उसके साथ सीधे मारपीट नहीं हुई, लेकिन दूसरी महिलाओं के साथ कथित मारपीट ने उसे अंदर तक डरा दिया। उसका दावा है कि महिलाओं को गाली दी जाती थी और कुछ मामलों में हाथ भी उठाया जाता था। कई महिलाएं वहां से निकलने के लिए अपने परिवार से पैसे मंगाने को मजबूर हुईं। कुछ ने घर या संपत्ति बेचकर रकम जुटाई।महिलाओं से डेढ़ लाख, दो लाख और कुछ मामलों में उससे ज्यादा रकम मांगे जाने की बातें भी सामने आती थीं। ओमान भेज देंगे’...

लेकिन आगे क्या होगा सुल्ताना का कहना है कि जो महिलाएं वहां काम करने से इनकार करती थीं, उनसे दूसरी जगह भेजने की बातें की जाती थीं। उनसे ओमान भेजने का कहा जाता था। इससे महिलाओं में डर और बढ़ जाता था। वहां उनके साथ क्या होने वाला था, यह कोई नहीं जानता था। छोटे भाई ने मददगार ढूंढा, फिर शुरू हुई वापसी सुल्ताना के मुताबिक- मेरे छोटे भाई का संपर्क आबिद नाम के व्यक्ति से हुआ।

इसके बाद मदद की कोशिश शुरू हुई। अगर आबिद भाई मदद नहीं करते तो मैं वहां से कभी नहीं निकल पाती। मेरी हालत ऐसी कर दी थी कि मैं बैठकर या उठकर भी ठीक से कुछ सोच नहीं पा रही थी। अब लौटने के बाद भी मेरा डर खत्म नहीं हुआ है। अब भी मैं उस सदमे से बाहर नहीं निकल पाई हूं। ‘रात में नींद लगती है तो वही सब दिमाग में आने लगता है।

अचानक आंख खुल जाती है। मैं रातभर सो नहीं पाती। बहुत रोई हूं। एक समय तो आंखों से धुंधला दिखाई देने लगा था। अब एजेंट मोबिन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करूंगी।' मददगार ने बताई लौटने की कहानी सुल्ताना ने भारत लौटने में सैयद आबिद हुसैन नाम के एक शख्स ने मदद की। आबिद हुसैन ने दैनिक भास्कर को बताया कि सुल्ताना के भाई का फोन आया था।

उन्होंने बताया कि बहन एजेंट के जरिए अजमान गई है और वहां फंस गई। उसे वापस लाने के लिए पैसे मांगे जा रहे हैं, लेकिन परिवार के पास इतनी रकम नहीं है। मैंने सबसे पहले महिला के दस्तावेज मंगवाए। इसके बाद वहीं बैठकर संबंधित अधिकारियों को शिकायत और मदद के लिए पत्र भेजे। उनका कहना है कि भारतीय दूतावास दुबई, काउंसलेट, प्रवासी भारतीय सहायता केंद्र और विदेश मंत्रालय की मदद टीम को दस्तावेज भेजे गए।

करीब आधे घंटे बाद परिवार से संपर्क किया गया और जरूरी जानकारी लेकर केस दर्ज किया गया। इसके बाद महिला को वापस लाने की प्रक्रिया शुरू हुई। यह भी जानिए… यह खबर भी पढ़ें… इमाम बनाने ओमान भेजा, 40 कमरों के टॉयलेट साफ कराए रायसेन जिले के दीवानगंज निवासी मोहम्मद फैजान ने बताय कि मैं मस्जिद में इमामत कराने गया था, लेकिन वहां पहुंचते ही मुझे 40 कमरों वाले मिनिस्ट्री ऑफिस की सफाई में लगा दिया गया।

रोज टॉयलेट साफ करता था। बर्तन धोता था। 14-15 घंटे काम करता था। कई-कई दिन भूखा रहता था। ऐसा लगता था कि मर जाऊं...

सुसाइड कर लूं। पूरी खबर यहां पढ़ें...

📡 स्रोत: NewsData.io

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