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बिहार में बाढ़-बगहा-सुपौल के 10 से ज्यादा स्कूल बंद:1 लाख लोग प्रभावित, सड़क किनारे तंबू में रह रहे; पीड़ित बोले- चूड़ा-मुढ़ी से कट रही जिंदगी

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 28 सितंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
बिहार में बाढ़-बगहा-सुपौल के 10 से ज्यादा स्कूल बंद:1 लाख लोग प्रभावित, सड़क किनारे तंबू में रह रहे; पीड़ित बोले- चूड़ा-मुढ़ी से कट रही जिंदगी

"घर में पानी घुस गया है। चूल्हा-चौका सब डूब गया। खाना कैसे बनाएं, यही समझ नहीं आ रहा। 3 दिन से बच्चे भूखे हैं। बिसकुट, चूड़ा-मुढ़ी के सहारे जी रहे हैं।" ये सिर्फ एक घर की परेशानी नहीं है, बल्कि बिहार के हजारों घरों के लोग इस परेशानी का सामना कर रहे हैं। पिछले 3 दिनों की बारिश में बिहार के करीब हजारों घर बाढ़ के पानी में डूब गए हैं।

दरअसल, नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में हुई मूसलाधार बारिश के कारण बिहार की नदियां उफनाई है, जिससे कई जिले बाढ़ की चपेट में है। गंडक और कोसी नदी का जलस्तर बढ़ने से 17 जिलों के करीब 6 गांव टापू बन गए हैं। इधर, बगहा के गंडक बराज से 4 लाख क्यूसेक से अधिक पानी डिस्चार्ज किया गया है। जो इस सीजन में एक रिकॉर्ड है।

वहीं, सुपौल के 65 गांवों में बाढ़ की स्थिति है। बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए जिले में 6 कम्युनिटी किचन शुरू किए गए हैं। बाढ़ के खतरे को देखते हुए कोसी बराज के 43 और गंडक बराज के सभी 36 गेट खोल दिए गए हैं। पहले बाढ़ से जुड़ी तस्वीरें देखिए… अब पढ़िए बिहार के गांव से भास्कर की रिपोर्ट 4 फीट तक बगहा-वाल्मीकिनगर सड़क पर भरा पानी पश्चिम चंपारण के बगहा में शनिवार तड़के गंडक का पानी रिहाइशी इलाकों में घुस गया था।

दो दिनों (शनिवार-रविवार) से करीब 500 घर जलमग्न हैं। 6 गांव टापू बन गए हैं। चकदहवा, झंडू टोला, बीन टोली और कान्ही टोला का मुख्य सड़क से संपर्क टूट चुका है। बाढ़ प्रभावित लोग छत और मचान पर शरण लिए हैं। कुछ इलाकों में नाव की मदद से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। बगहा-वाल्मीकिनगर सड़क पर करीब 4 फीट तक पानी बह रहा है।

तेज बारिश के बीच दैनिक भास्कर की टीम सबसे पहले बगहा के उन गांवों में पहुंची, जहां गांव टापू में तब्दील हो गए है। गांव में घुसते ही हर तरफ पानी ही पानी दिखाई दे रहा था। कोई अपने गाय-भैंस को सड़क किनारे ले जा रहा था तो कुछ बच्चे अपनी जान बचाकर गांव से दूर भाग रहे थे। इस दौरान हमारी टीम ने सबसे पहले एक महिला ने बात की।

आशा देवी ने बताया, मैं विधवा हूं। मेरे पति नहीं हैं, जिसकी वजह से बच्चों को अकेले ध्यान रखना पड़ रहा है। मेरे घर में घुटने से ज्यादा पानी भर गया है। सारा सामान डूबने की वजह से खाने का कुछ भी सामान नहीं बचा है। ग्रामीणों ने शोर मचाकर लोगों को जगाया वहीं, एक अन्य महिला मानसी देवी ने कहा कि मेरा पूरा घर डूब गया है।

आंधी-पानी की वजह से घर टूट गया है। सरकार से मांग है कि वो हमलोगों का घर बनाकर दें। शुक्रवार की रात 3 बजे अचानक हमारी बस्ती में पानी घुस गया था। उस समय ज्यादातर लोग सो रहे थे। जब पानी की तेज आवाज आनी शुरू हुई तो कुछ लोगों ने शोर मचाकर लोगों को जगाना शुरू किया। जितनी देर में हमलोग जगे, उतनी देर में आधा से ज्यादा सामान भींग चुका था।

मिट्टी का चूल्हा भी डूब गया था। जैसे-तैसे हमलोगों ने अपने-अपने बच्चों को जमीन से उठाकर चौकी पर लेटा दिया। कुछ परिवार मवेशियों को लेकर ऊंची जगहों पर पहुंचे। देखते ही देखते गांव का मुख्य रास्ता पानी में डूब गया। कमर से ज्यादा पानी भर गया है। अब नाव के सहारे ही हमलोग इधर-उधर कर सकते हैं।

"खाना स्कूल में बन रहा, नाव से लोगों को निकाल रहे" प्रशासन की ओर से चकदहवा और झंडवा टोला में ऊंची जगह पर कम्युनिटी किचन शुरू किया गया है। प्रभावित लोगों को वहीं भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। मेडिकल टीम भी भेजी गई है। एसएसबी की टीम राहत कार्य में मदद कर रही है। प्रशासन के अनुसार, जो लोग घर छोड़कर सुरक्षित स्थान पर जाना चाहते हैं, उन्हें नाव से निकाला जा रहा है।

जो परिवार घर छोड़ने को तैयार नहीं हैं, उनके लिए भी स्कूल में भोजन और मेडिकल सुविधा की व्यवस्था की गई है। रेवहिया में 300 घर पानी में, सड़क किनारे तंबू में रह रहे लोग बगहा के मधुबनी प्रखंड के चिउरही पंचायत के रेवहिया गांव में करीब 300 घर में पानी घुस गया है। घर छोड़ चुके ग्रामीण धनहा-रतवल मुख्य मार्ग के किनारे तंबू लगाकर रह रहे हैं।

इन लोगों को खाना, पीने के पानी और पशुओं के चारे की समस्या है। मुखिया विजय यादव ने प्रभावित लोगों के बीच बिस्किट और गुड़-चूड़ा बांटा है। सीओ नंदलाल राम ने प्लास्टिक शीट देने की बात की है। मधुबनी के सिसई में प्रभावित ग्रामीण स्कूल की छत पर रहने को मजबूर हैं। VTR के जंगल में भी पानी नेपाल में लगातार हुई भारी बारिश का असर अब पश्चिम चंपारण के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (VTR) में भी दिखाई दे रहा है।

गंडक नदी में बढ़े पानी के बाद VTR के निचले इलाकों में पानी पहुंच गया है। मदनपुर और वाल्मीकिनगर वन क्षेत्रों में पानी भरने से जंगल के उन हिस्सों में भी जलजमाव की स्थिति बन गई है, जहां आमतौर पर वन्यजीव विचरण करते हैं। जंगल में पानी बढ़ने के साथ सबसे बड़ी चुनौती वन्यजीवों को सुरक्षित और ऊंचे स्थान उपलब्ध कराने की है।

बाढ़ का पानी निचले इलाकों में फैलने पर वन्यजीव स्वाभाविक रूप से ऊंची जमीन की ओर बढ़ते हैं। ऐसे में अगर पानी का फैलाव और बढ़ा तो उनके जंगल से बाहर निकलकर आसपास के गांवों या आबादी वाले इलाकों की तरफ आने की आशंका बढ़ गई है। कोसी में घट रहा पानी नेपाल में बारिश थमने के बाद कोसी का जलस्तर अब घट रहा है।

लेकिन मरौना, निर्मली, किशनपुर, सरायगढ़-भपटियाही और सुपौल सदर के निचले इलाकों में लोगों की परेशानी बनी हुई है। घरों और आंगन में पानी भरा है। कई परिवार चौकी के ऊपर बैठकर समय काट रहे हैं। इस बीच हमारी टीम मरौना अंचल के घोघरड़िया पंचायत पहुंची। यहां घरों के अंदर तक पानी पहुंच चुका है। चौकी ही परिवारों के लिए बैठने और सोने की जगह बनी हुई है।

एक ग्रामीण ने बताया, शनिवार सुबह करीब 10 बजे से घर में पानी बढ़ना शुरू हुआ। इसके बाद खाना बनाने से लेकर पीने के पानी तक की समस्या खड़ी हो गई है। फिलहाल, हमलोग दुकानों से चूड़ा-मुड़ी खरीदकर किसी तरह गुजारा कर रहे हैं। वहीं, एक महिला ने बताया- हमें पहले से पानी बढ़ने की जानकारी थी, लेकिन घर छोड़कर जाना आसान नहीं था।

बच्चों, मवेशियों और घर के जरूरी सामान को छोड़कर सुरक्षित जगह जाना मुश्किल है। इसकी वजह से कई परिवार पानी के बीच घरों में ही रुके हुए हैं। 7 वार्डों में पानी, 300-400 घर प्रभावित घोघरड़िया पंचायत की मुखिया के मुताबिक, तटबंध के भीतर पंचायत के सात वार्ड हैं। सभी वार्डों में पानी घुसा है।

करीब 300 से 400 घर प्रभावित हैं। मुखिया का कहना है कि पानी बढ़ने की जानकारी प्रशासन और प्रखंड स्तर के अधिकारियों को पहले ही दी गई थी। पानी घटने के बावजूद निचले इलाकों में स्थिति सामान्य नहीं हुई है। हैंडपंप भी पानी में डूब गए हैं। ऐसे में पीने के साफ पानी की समस्या बन गई है। गंडक में 4.79 लाख क्यूसेक डिस्चार्ज बता दें कि वाल्मीकिनगर गंडक बराज से रविवार शाम 5 बजे 4 लाख 79 हजार 100 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया है।

बराज से पानी का डिस्चार्ज लगातार बढ़ते क्रम में है, जो चिंता का विषय है। वहीं, नेपाल के देवघाट से शाम 4 बजे 6 लाख 52 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया। हालांकि, देवघाट में जलस्तर अब घट रहा है, जो राहत की बात है। 26 सितंबर की सुबह 5 बजे कोसी बराज से 3.16 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। शनिवार रात 8 बजे यह घटकर 2.82 लाख क्यूसेक हुआ।

27 सितंबर सुबह 9 बजे डाउनस्ट्रीम डिस्चार्ज 2.23 लाख क्यूसेक रहा। ईस्ट कोसी मेन कैनाल में 3,200 क्यूसेक समेत कुल डिस्चार्ज 2.26 लाख क्यूसेक रहा। पानी घटने लगा है, लेकिन तटबंध के अंदर जमा पानी और घरों में घुसा पानी अभी जमा है। प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में 169 निजी नावें लगाई हैं। 6 कम्युनिटी किचन चल रहे हैं और 1,501 पॉलीथिन शीट बांटी जा चुकी हैं।

17 जिलों में हाई अलर्ट बाढ़ की स्थिति को देखते हुए राज्य के 17 संवेदनशील जिलों में हाई अलर्ट जारी किया गया है। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने आपदा प्रबंधन विभाग और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों समेत संबंधित जिलों के डीएम के साथ समीक्षा की। अधिकारियों को 24 घंटे अलर्ट रहने और नदियों के जलस्तर, तटबंधों और पुल-पुलियों की निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।

NDRF और SDRF की टीमें भी तैनात की गई हैं।

📡 स्रोत: NewsData.io

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