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बिहार-नेपाल बॉर्डर पर 100+ ट्रक 2 दिनों से खड़े:तीज-दशहरे से पहले सीतामढ़ी में 90% घटे नेपाली कस्टमर्स, बॉर्डर के कारोबारियों पर तबाही का इंपैक्ट

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 8 सितंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
बिहार-नेपाल बॉर्डर पर 100+ ट्रक 2 दिनों से खड़े:तीज-दशहरे से पहले सीतामढ़ी में 90% घटे नेपाली कस्टमर्स, बॉर्डर के कारोबारियों पर तबाही का इंपैक्ट

“पहले दुकान पर नेपाली ग्राहकों की भीड़ लगी रहती थी। अब मुश्किल से 10% लोग भी शॉप पर नहीं आ रहे हैं। करीब 90% कारोबार ठप है। इस बार करोड़ों का नुकसान होने का डर हमें हर दिन सता रहा है। नेपाल की तबाही का दर्द अब हमारे बाजार और रोजी-रोटी में भी दिख रहा है।" ये बयान बिहार-नेपाल बॉर्डर पर कपड़ा शॉप चलाने वाले विनोद कुमार ठाकुर का है।

इनका कहना है, नेपाल में सितंबर-अक्टूबर महीने में तीज और दशहरा (दशईं) सबसे बड़ा फेस्टिवल होता है। अब अगर इसी समय कस्टमर्स हमारे शॉप पर नहीं आएंगे, तो कमाई कहां से होगी। दरअसल, नेपाल में आई फ्लैश फ्लड ने सिर्फ वहां की सड़कें, बस्तियां और टूरिस्ट प्लेस को ही नहीं, बल्कि बिहार से जुड़े कारोबार और टूरिज्म की रफ्तार पर भी ब्रेक लगा दिया है।

भारत-नेपाल सीमा पर आवाजाही से लेकर सीमावर्ती बाजारों, टूरिस्ट गाड़ियों और सामान से भरे ट्रकों तक पर इसका असर दिखाई दे रहा है। फ्लैश फ्लड के बाद बिहार-नेपाल बॉर्डर पर सबसे ज्यादा झटका किसे लगा है?

क्या फेस्टिवल से पहले कारोबारियों को होगा नुकसान? टूरिस्टों की संख्या पर कितना पड़ रहा असर? सीमा पर 2 दिनों से खड़े मालवाहक की स्थिति क्या है? नेपाल में फंसे भारतीय पर्यटकों का क्या है हाल?

बिहार के व्यापारियों को कितना हो सकता है नुकसान?

इन सारे सवालों का जवाब इस रिपोर्ट में पढ़िए… पहले बॉर्डर से जुड़ी तस्वीरें देखिए… बॉर्डर पर नेपाली कस्टमर्स के नहीं आने से दुकानें सूनी भारत-नेपाल बॉर्डर पर कहीं नेपाली कस्टमर्स के नहीं आने से दुकानें सूनी हैं, तो कहीं नेपाल जाने वाले टूरिस्ट गाड़ियों की संख्या अचानक घट गई है। माल लेकर पहुंचे ट्रक 2 दिनों से बॉर्डर पर भंसार की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं।

दैनिक भास्कर की टीम ने बिहार-नेपाल सीमा के अलग-अलग बॉर्डर पॉइंट जोगबनी, रक्सौल और भिट्ठामोड़-जलेश्वर पर पहुंचकर ग्राउंड हालात जाना। सीमा के दोनों ओर तस्वीरें अलग-अलग जरूर हैं, लेकिन आपदा का असर कहीं न कहीं कारोबार और लोगों की आवाजाही पर दिख रहा है। जलेश्वर भंसार में जहां सामान्य दिनों में रोजाना 1000 से ज्यादा टूरिस्ट गाड़ियां पहुंचती थी, वहां अब पूरे दिन में गिनती की 4-5 गाड़ियां ही पहुंच रही हैं।

ज्यादातर गाड़ियां नजदीकी जनकपुर धाम तक जा रहे हैं, जबकि काठमांडू जैसे दूर के टूरिस्ट प्लेस की ओर जाने वाले पर्यटकों की सं

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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