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बीकानेर जेल में थिएटर से बदल रही बंदियों की जिंदगी

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 24 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
बीकानेर जेल में थिएटर से बदल रही बंदियों की जिंदगी

बीकानेर केंद्रीय कारागार में थिएटर के जरिए बंदियों के व्यक्तित्व विकास, आत्मविश्वास और भावनात्मक अभिव्यक्ति को बढ़ावा देने की अनूठी पहल की जा रही है। मलंग फोक फाउंडेशन और एसकेआरयू के सहयोग से आयोजित दस दिवसीय कार्यशाला में बंदी अभिनय, संवाद अदायगी, स्टोरीटेलिंग, संगीत और शारीरिक गतिविधियों के माध्यम से खुद को अभिव्यक्त करना सीख रहे हैं।

थिएटर प्रशिक्षक अजहर गौर और डॉ. आरती उपाध्याय के मार्गदर्शन में चल रही यह कार्यशाला बंदियों को तनाव प्रबंधन, आत्मचिंतन और जीवन को नए नजरिए से देखने का अवसर दे रही है। शिक्षा, योग और रोजगारपरक गतिविधियों के साथ यह पहल जेल में सकारात्मक वातावरण बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

बीकानेर, 24 अक्टूबर। जेल की ऊंची दीवारें, बंद दरवाजे और सलाखों के पीछे गुजरती जिंदगी... आमतौर पर यही तस्वीर हमारे जेहन में आती है। लेकिन बीकानेर केंद्रीय कारागार में इन दिनों रंगमंच के जरिए बदलाव की एक नई कहानी लिखी जा रही है। यहां थिएटर केवल अभिनय सीखने का माध्यम नहीं, बल्कि बंदियों को अपनी भावनाओं को समझने, आत्मविश्वास बढ़ाने और खुद को नए सिरे से पहचानने का अवसर दे रहा है।

बीकानेर केंद्रीय कारागार में इन दिनों थिएटर के जरिए बंदियों के व्यक्तित्व विकास की एक विशेष पहल चल रही है। मलंग फोक फाउंडेशन और एसकेआरयू के सहयोग से आयोजित दस दिवसीय कार्यशाला में बंदियों को अभिनय, संवाद अदायगी, शारीरिक गतिविधियों, स्टोरीटेलिंग, तात्कालिक अभिनय और संगीत के माध्यम से अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करना सिखाया जा रहा है।

इस कार्यशाला का उद्देश्य सिर्फ अभिनय की बारीकियां सिखाना नहीं, बल्कि बंदियों को अपने भीतर झांकने, अपनी भावनाओं को पहचानने और जीवन के अनुभवों को एक नए नजरिए से देखने का अवसर देना भी है। थिएटर की खासियत है कि यहां व्यक्ति किसी किरदार को निभाने के साथ-साथ उसकी परिस्थितियों और भावनाओं को भी समझने की कोशिश करता है।

इसी सोच के साथ थिएटर प्रशिक्षक अजहर गौर और डॉ. आरती उपाध्याय बंदियों के साथ विभिन्न रचनात्मक गतिविधियां करवा रहे हैं। संवाद, भाव-भंगिमाओं, शारीरिक अभ्यास, सांसों पर ध्यान और संगीत के जरिए बंदियों को अपनी झिझक दूर करने, समूह में सहभागिता बढ़ाने और अपनी बात खुलकर रखने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

इन गतिविधियों के माध्यम से उन्हें दूसरों को सुनने, आपसी संवाद बढ़ाने और अपने अनुभवों को रचनात्मक रूप से व्यक्त करने का अवसर मिल रहा है। जेल की एक जैसी दिनचर्या के बीच यह कार्यशाला बंदियों के लिए एक अलग अनुभव लेकर आई है। अभिनय और समूह गतिविधियों के जरिए वे न सिर्फ कुछ नया सीख रहे हैं, बल्कि अपनी क्षमताओं को पहचानने और साथियों के साथ जुड़ने का भी प्रयास कर रहे हैं।

कार्यशाला में शामिल बंदियों के अनुभव बताते हैं कि रंगमंच उनके लिए अपनी बात कहने और अपने भीतर की भावनाओं को व्यक्त करने का एक नया माध्यम बन रहा है। बीकानेर केंद्रीय कारागार में बंदियों को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने के लिए थिएटर के अलावा शिक्षा, योग और रोजगारपरक कार्यों पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

यहां दुकान, मसाला निर्माण और फैक्ट्री से जुड़े काम संचालित हैं। वहीं, शिक्षा के लिए इग्नू का केंद्र भी मौजूद है। योग और अन्य गतिविधियों के माध्यम से शारीरिक सक्रियता और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। थिएटर कार्यशाला भी इसी व्यापक पहल का हिस्सा है, जिसका मकसद बंदियों को अपनी क्षमताओं को पहचानने और रचनात्मक गतिविधियों के जरिए खुद को अभिव्यक्त करने का अवसर देना है।

जेल की सलाखों के पीछे चल रही यह पहल इस बात को रेखांकित करती है कि रचनात्मकता के लिए कोई दीवार अंतिम सीमा नहीं होती। रंगमंच के जरिए बंदियों को अपनी भावनाओं को समझने, आत्मविश्वास बढ़ाने और जीवन को नए नजरिए से देखने का अवसर मिल रहा है। यहां थिएटर महज किरदार निभाने की कला नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, संवाद और बदलाव की संभावनाओं को तलाशने का एक माध्यम बन रहा है।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।