बीना विधायक निर्मला सप्रे के दल-बदल मामले में सुप्रीम कोर्ट का निर्देश, विधानसभा अध्यक्ष दो महीने में लें फैसला, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की याचिका पर आया निर्देश
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नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की याचिका पर सुनवाई, कांग्रेस विधायक की सदस्यता समाप्त करने की मांग से जुड़े मामले में समय-सीमा तय
भोपाल, 4 नवंबर 2026। बीना विधायक निर्मला सप्रे से जुड़े दल-बदल मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष को दो महीने के भीतर लंबित याचिका पर निर्णय लेने को कहा है। यह याचिका विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दायर की थी, जिसमें निर्मला सप्रे की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग की गई है।
वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में निर्मला सप्रे कांग्रेस के टिकट पर बीना से विधायक निर्वाचित हुई थीं। लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान उनके भाजपा के मंच पर दिखाई देने और भाजपा के साथ राजनीतिक रूप से जुड़ने के आरोपों के आधार पर उमंग सिंघार ने दल-बदल कानून के तहत उनकी सदस्यता समाप्त करने की मांग की थी। इस संबंध में जून 2024 में विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष याचिका प्रस्तुत की गई थी।
दसवीं अनुसूची के मामलों के शीघ्र निराकरण पर जोर
सुप्रीम कोर्ट में उमंग सिंघार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत आने वाली अयोग्यता याचिकाओं का शीघ्र निराकरण होना चाहिए। न्यायालय ने मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष को संबंधित मामले में दो महीने के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया।
उमंग सिंघार ने फैसले का किया स्वागत
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि यह आदेश लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक मर्यादाओं के महत्व को रेखांकित करता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने विधानसभा अध्यक्ष को दो महीने में निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं, जिसके लिए वे न्यायालय के आभारी हैं।
सिंघार ने कहा कि जनता ने निर्मला सप्रे को कांग्रेस के टिकट पर चुनकर विधानसभा भेजा था। उनके अनुसार, जनता के जनादेश की गरिमा बनाए रखने के लिए दल-बदल कानून के तहत जवाबदेही तय होना आवश्यक है। उन्होंने विश्वास जताया कि विधानसभा अध्यक्ष निर्धारित समय-सीमा में निष्पक्ष और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप निर्णय लेंगे।
उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस स्तर पर निर्मला सप्रे की सदस्यता समाप्त करने का फैसला नहीं सुनाया है, बल्कि विधानसभा अध्यक्ष को लंबित अयोग्यता याचिका पर दो महीने में निर्णय लेने का निर्देश दिया है। निर्मला सप्रे ने कांग्रेस छोड़ने और भाजपा में औपचारिक रूप से शामिल होने के आरोपों से इनकार किया है।