भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने निशा भगत आत्महत्या मामले की सीबीआई जांच की मांग
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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने निशा भगत आत्महत्या मामले की सीबीआई जांच की मांग, कहा- धर्मांतरण और जमीन दलालों के खिलाफ आवाज उठाने के कारण निशाने पर थीं निशा भगत।
Short Headline: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने निशा भगत आत्महत्या मामले की सीबीआई जांच की मांग
06 नवंबर, रांची: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने आदिवासी समाज की युवा नेत्री निशा भगत की आत्महत्या मामले में गंभीर सवाल उठाते हुए पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि निशा भगत लगातार धर्मांतरण और जमीन दलालों के खिलाफ मुखर होकर आवाज उठा रही थीं। इन मुद्दों पर उनके लगातार संघर्ष के कारण वह ऐसे तत्वों के निशाने पर थीं। आखिर किन परिस्थितियों में उन्हें इतना खौफनाक कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा, इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने रिम्स पहुंचकर घटना की जानकारी भी ली एवं परिजनों को ढांढस बंधाया।
श्री साहू ने कहा कि सीबीआई जांच से ही इस पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकेगी। यह पता चल सकेगा कि निशा भगत किन परिस्थितियों से गुजर रही थीं और उनकी मौत के पीछे कोई दबाव, धमकी या अन्य कारण तो नहीं थे। मामले के हर पहलू की गहराई से जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आए और दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा न जाए।
उन्होंने निशा भगत के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि जनजातीय समाज के हक-अधिकारों की मुखर आवाज और उनके हितों के लिए निरंतर संघर्षरत युवा नेत्री के असामयिक निधन की दुःखद सूचना से वे अत्यंत स्तब्ध एवं मर्माहत हैं। उनका निधन जनजातीय समाज के लिए अपूरणीय क्षति है।
इस दौरान केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश, प्रदेश उपाध्यक्ष भानु प्रताप शाही, प्रदेश महामंत्री मनोज सिंह, भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष शशांक राज, रांची की मेयर रोशनी खलखो सहित पार्टी के अन्य नेता एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
💡 पृष्ठभूमि (Background)
निशा भगत, एक युवा आदिवासी नेता, 2024 में आत्महत्या कर ली, जिसके बाद उनके परिवार ने सरकार से जांच की मांग की। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने इस मामले में सीबीआई जांच की मांग की, यह कहते हुए कि निशा को धर्मांतरण और जमीन दलालों के खिलाफ आवाज उठाने के कारण निशाने पर रखा गया था। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह ग्रामीण समाज में राजनीतिक दबाव और न्याय की मांग को उजागर करती है। यदि जांच से किसी अनियमितता का पता चलता है, तो यह जनता में सरकारी जवाबदेही और सामाजिक न्याय के प्रति विश्वास को बढ़ा या घटा