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BRICS समिट पर कांग्रेस में मतभेद:चिदंबरम ने पूछा- भारत को क्या मिला; थरूर बोले- 11 देश के नेताओं को एक मंच पर लाना भारत की ताकत

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 16 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: जनता का संदेश
BRICS समिट पर कांग्रेस में मतभेद:चिदंबरम ने पूछा- भारत को क्या मिला; थरूर बोले- 11 देश के नेताओं को एक मंच पर लाना भारत की ताकत

भारत में BRICS समिट को लेकर कांग्रेस के दो सीनियर नेताओं के अलग-अलग बयान सामने आए हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री पी.

चिदंबरम ने पूछा था कि पहले हुई समिट से भारत को क्या फायदा हुआ। एक दिन बाद कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने समिट के फायदे बताए। उन्होंने कहा कि भारत में सम्मेलन होना देश की कूटनीतिक ताकत को दिखाता है। 11 देशों के बड़े नेताओं का भारत आना और उन्हें एक मंच पर लाना भारत की दूसरे देशों को साथ लाने की क्षमता को दर्शाता है।

18वें BRICS समिट का आयोजन 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होगा। इसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के शी जिनपिंग समेत 11 सदस्य देशों के शीर्ष नेता शामिल हो रहे हैं। सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, टेक्नोलॉजी और एनर्जी जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। चिदंबरम ने कहा था- इन संगठनों की सदस्यता पर विचार हो थरूर के बयान से एक दिन पहले चिदंबरम ने सवाल किया था कि भारत BRICS के अलावा G20, QUAD और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) जैसे कई बहुपक्षीय संगठनों का हिस्सा है, लेकिन इन संगठनों से देश को वास्तव में क्या ठोस लाभ मिला है, इस पर विचार होना चाहिए।

थरूर ने कहा- BRICS को ग्लोबल साउथ के लिए जरूरी मंच थरूर ने BRICS को ग्लोबल साउथ के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बताया। उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ में 100 से ज्यादा देश हैं, लेकिन BRICS में शामिल 11 प्रमुख देश दुनिया की बड़ी आबादी और करीब 41% वैश्विक GDP का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में इस समूह को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

थरूर बोले- BRICS के सामने कई चुनौतियां भी; 5 पॉइंट्स 1.

BRICS में मतभेद: सभी सदस्य देशों की विदेश नीति और हित एक जैसे नहीं हैं। इसलिए बड़े वैश्विक मुद्दों पर सहमति बनाना मुश्किल है। 2.

ईरान-इजराइल और रूस-यूक्रेन मुद्दा: मई में BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में इन मुद्दों पर मतभेद सामने आए। साझा बयान जारी नहीं हो सका। 3.

भारत की चेयर डिक्लेरेशन: संयुक्त बयान की जगह भारत ने BRICS अध्यक्ष के तौर पर अपनी ओर से चेयर डिक्लेरेशन जारी किया। 4.

आगामी सम्मेलन की चुनौती: अगर बड़े मुद्दों पर फिर सहमति नहीं बनी तो BRICS की एकजुटता पर सवाल उठ सकते हैं। इसे भारत के लिए कूटनीतिक चुनौती माना जाएगा। 5.

व्यापार घाटा भी चिंता: BRICS देशों को भारत का निर्यात कम है, जबकि वहां से आयात ज्यादा है। यानी भारत BR

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

ब्रिक्स (ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ़्रीका) समिट पर भारत में कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं के मतभेद सामने आए। एक ओर पूर्व मंत्री पी. चिदंबरम ने सवाल किया कि पिछले समिट से भारत को क्या लाभ मिला, जबकि सांसद शशि थरूर ने बताया कि भारत में समिट की मेजबानी देश की कूटनीतिक ताकत को दर्शाती है और 11 देशों के नेताओं को एक मंच पर लाने से भारत की अंतरराष्ट्रीय भूमिका मजबूत होती है। यह विषय महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत की वैश्विक रणनीति और आंतरिक राजनीतिक ध्रुवीकरण को उजागर करता है। आम जनता के लिए यह

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