BRICS Summit में PM मोदी और शी जिनपिंग के बीच बातचीत से पहले चीन का 'अच्छे पड़ोसी' वाला संदेश
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नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय बैठक से पहले चीन की ओर से सकारात्मक और नरम रुख देखने को मिला है। बीजिंग ने दोनों एशियाई महाशक्तियों के बीच "अच्छे पड़ोसी" वाले संबंधों पर बल देते हुए मतभेदों को परिपक्वता से सुलझाने की बात कही है।
सात वर्षों के लंबे अंतराल के बाद राष्ट्रपति शी जिनपिंग की यह पहली भारत यात्रा है। वर्ष 2020 की गलवान घाटी की झड़प और सीमा विवाद के बाद से दोनों देश अपने राजनयिक एवं व्यापारिक संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में सतर्कता से कदम आगे बढ़ा रहे हैं। बैठक पर टिप्पणी करते हुए, भारत में चीन के राजदूत शू फीहोंग ने कहा कि बीजिंग दोनों देशों के बीच संबंधों को रणनीतिक रूप से बेहतर बनाने के लिए नई दिल्ली के साथ काम करेगा।इसे भी पढ़ें: Explained Story | दोस्त, दुश्मन और ट्रंप फैक्टर...
भारत के लिए BRICS में संतुलन बनाने की बड़ी चुनौती | BRICS Summit 2026 बैठक से जुड़े मुख्य बिंदु: शी जिनपिंग का भारत दौरा: वर्ष 2019 के ममलापुरम (चेन्नई) अनौपचारिक शिखर सम्मेलन के बाद शी जिनपिंग की यह पहली भारत यात्रा है। शीर्ष नेताओं की लगातार तीसरी मुलाकात: कज़ान और तियानजिन के बाद PM मोदी और शी जिनपिंग के बीच यह लगातार तीसरे साल द्विपक्षीय वार्ता हो रही है।
समय सीमा: राष्ट्रपति शी का नई दिल्ली पहुँचने का समय दोपहर करीब 1 बजे निर्धारित है, जबकि PM मोदी के साथ उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक शाम 5:45 बजे प्रस्तावित है। शू ने ट्वीट किया, "चीन दोनों नेताओं के रणनीतिक मार्गदर्शन पर अमल करने, रणनीतिक ऊंचाई और दीर्घकालिक नजरिए से द्विपक्षीय संबंधों को संभालने, बातचीत बढ़ाने, सहयोग बढ़ाने, मतभेदों को सही ढंग से सुलझाने और अच्छे पड़ोसी व एक-दूसरे की सफलता में मददगार साझेदार के तौर पर दोस्ती निभाने के लिए भारत के साथ काम करेगा।" PM मोदी और शी के बीच यह द्विपक्षीय बैठक लगातार तीसरे साल होगी, इससे पहले वे कज़ान और तियानजिन में मिल चुके हैं।
चीनी राष्ट्रपति के दोपहर करीब 1 बजे नई दिल्ली पहुंचने का कार्यक्रम है और PM मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक शाम 5.45 बजे होगी। चीन ने बातचीत और सहयोग पर जोर दिया चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने भी शू की तरह "अच्छे पड़ोसी" होने पर जोर दिया। माओ ने यह भी कहा कि चीन बातचीत और बातचीत के जरिए विवादों को सुलझाने और ईरान-अमेरिका संघर्ष व रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच शांति और स्थिरता में योगदान देने के लिए BRICS देशों के साथ काम करने को तैयार है।
उन्होंने कहा कि BRICS उभरते बाजारों और विकासशील देशों के लिए एक प्रमुख मंच के रूप में उभरा है और "ग्लोबल साउथ में सबसे आगे रहने वाली एक वास्तविक ताकत" बन गया है। ब्रिक्स के मौजूदा अध्यक्ष के तौर पर, भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेज़बानी कर रहा है।इसे भी पढ़ें: PM Modi on BRICS Business Forum: दुनिया में बढ़ रही ट्रेड की दीवारें, India बना रहा आर्थिक संबंधों के मजबूत Bridge शी की भारत की पहली यात्रा सितंबर 2014 में हुई थी।
इसके बाद, 2016 में गोवा में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए वे फिर भारत आए थे, और उनकी पिछली यात्रा 2019 में चेन्नई के पास ममलापुरम में पीएम मोदी के साथ अनौपचारिक शिखर सम्मेलन के लिए हुई थी।
📡 स्रोत: NewsData.io