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चंबा में डेढ़ वर्षीय बच्ची की उपचार के दौरान हुई मौत के मामले जांच समिति गठित, मामले की जांच शुरू

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 26 सितंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
चंबा में डेढ़ वर्षीय बच्ची की उपचार के दौरान हुई मौत के मामले जांच समिति गठित, मामले की जांच शुरू

अगस्त 08, चंबा (हिमाचल प्रदेश): पंडित जवाहरलाल नेहरू राजकीय मेडिकल कालेज एवं अस्पताल चंबा में रविवार को उपमंडल चुराह की ग्राम पंचायत सेईकोठी के गांव नरवाड़ निवासी डेढ़ वर्षीय बच्ची की उपचार के दौरान हुई मौत के मामले मे मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने एक जांच समिति गठित कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

बच्ची की मौत के बाद आक्रोशित स्वजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया और डाक्टरों पर उपचार में घोर लापरवाही बरतने के सीधे आरोप जड़े। मृतका की पहचान कृतिका (डेढ़ वर्ष) पुत्री कुलदीप सिंह के रूप में हुई है। मृतक बच्ची के पिता कुलदीप सिंह ने रोते-बिलखते हुए अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि उनकी डेढ़ वर्षीय बेटी कृतिका की छाती जाम थी और उसमें खून की कमी के लक्षण थे। उन्होंने सोचा कि तीसा अस्पताल के बजाय चंबा मेडिकल कालेज एवं अस्पताल में बच्ची को बेहतर और त्वरित उपचार मिल सकेगा। वह शाम करीब चार बजे बच्ची को लेकर मेडिकल कालेज पहुंचे थे, लेकिन उन्हें त्वरित दाखिल तक नहीं किया गया और शाम करीब 5:30 बजे बच्ची को एडमिट किया गया।

पिता का आरोप है कि दाखिल करने के बाद उन्हें एक्सरे करवाने के लिए भेजा गया, लेकिन वहां कोई भी स्वास्थ्य कर्मी मौजूद नहीं मिला। इसके उपरांत अस्पताल स्टाफ ने दो अन्य टेस्ट करवाने के लिए कह दिया, जिसके लिए उन्हें बाहर निजी लैब के चक्कर काटने पड़े। निजी लैब से टेस्ट करवाकर जब वे वापस लौटे तो स्टाफ ने कहा कि बच्ची को भाप देनी पड़ेगी और इंजेक्शन लगेगा।

उन्होंने कहा कि इमरजेंसी वार्ड पूरी तरह से इंटर्न डाक्टरों के हवाले छोड़ा गया था और कोई भी विशेषज्ञ या वरिष्ठ डाक्टर मरीज की सुध लेने वाला नहीं था। बच्ची करीब पौने घंटे तक तड़पती रही, लेकिन कोई डाक्टर देखने तक नहीं आया। बच्ची के दम तोड़ने से महज 15 मिनट पहले एक डाक्टर देखने पहुंचे।

इस दौरान बच्ची को इंजेक्शन लगाया और भाप दी, उसके तुरंत बाद बच्ची पूरी तरह अचेत हो गई और उसने दम तोड़ दिया। अस्पताल के रवैये से आहत बच्ची की मां ने रोते हुए चीख-चीखकर कहा कि अगर मेडिकल कालेज में गंभीर बच्चों को समय पर सही उपचार नहीं मिल सकता, तो ऐसे अस्पताल को सरकार को तुरंत बंद कर देना चाहिए।

उधर, मेडिकल कालेज के एमएस डॉ. प्रदीप ने कहा कि स्वजन बच्ची के शव को अपने साथ ले गए हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बच्ची को शाम पांच से साढ़े पांच बजे के करीब अस्पताल लाया गया था। स्वजनों की ओर से लगाए गए लापरवाही के तमाम आरोपों को गंभीरता से लिया गया है। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक विशेष जांच कमेटी गठित की जाएगी।

जांच कमेटी की रिपोर्ट में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। वहीँ दूसरी तरफ मेडिकल कॉलेज के चिकित्सा अधीक्षकप्रदीप सिंह ने कहा की ये दुःखद घटना है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है जिसके लिए एक समिति का गठन किया गया है।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।