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चारभुजा में अनूठी परंपरा, गोलियों के बाद पत्थर बरसाकर हुआ रावण वध

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 20 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
चारभुजा में अनूठी परंपरा, गोलियों के बाद पत्थर बरसाकर हुआ रावण वध

राजसमंद के चारभुजा में दशहरे पर वर्षों पुरानी रावण वध की परंपरा निभाई गई। 11 राउंड गोलियां चलाने के बाद भी रावण का पुतला नहीं गिरा तो ग्रामीणों ने पत्थर बरसाकर रावण वध की रस्म पूरी की।

राजसमंद। जिले के चारभुजा कस्बे में दशहरे के अवसर पर वर्षों पुरानी अनूठी रावण वध की परंपरा निभाई गई। इस दौरान धार्मिक अनुष्ठानों के बाद भगवान श्रीराम की प्रतिमा को रावण वध स्थल तक ले जाया गया। यहां रावण पर 11 राउंड गोलियां दागी गईं, लेकिन इसके बावजूद रावण नहीं गिरा। इसके बाद ग्रामीणों ने पत्थर बरसाकर रावण वध की परंपरा पूरी की।

दशहरे के अवसर पर सबसे पहले भगवान चारभुजानाथ मंदिर में उत्थापन एवं कसार आरती की गई। इसके बाद देवस्थान विभाग के सिपाही, पुजारी और कस्बेवासी इमली वाले बालाजी हनुमान मंदिर पहुंचे। यहां कद्दू की बलि देकर शस्त्र पूजन किया गया।

धार्मिक अनुष्ठान के बाद भगवान श्रीराम की प्रतिमा को अखाड़े से दर्शन घाटी स्थित रावण वध स्थल तक ले जाया गया। यहां परंपरा के अनुसार रावण वध की रस्म शुरू हुई।

रावण पर 11 राउंड गोलियां चलाई गईं, लेकिन इसके बाद भी रावण नहीं गिरा। इसके बाद ग्रामीणों ने पत्थर बरसाए, जिससे रावण का अंत हुआ और वर्षों पुरानी परंपरा का निर्वहन किया गया।

रावण वध की रस्म पूरी होने के बाद भगवान श्रीराम की प्रतिमा की आरती उतारी गई। चारभुजा में दशहरे के अवसर पर निभाई जाने वाली यह परंपरा धार्मिक आस्था और स्थानीय संस्कृति से जुड़ी हुई है। इस वर्ष भी पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार आयोजन संपन्न हुआ।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।