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छतरपुर: नौगांव की 122 साल पुरानी रामलीला, आज भी बाल कलाकार निभाते हैं भगवान राम सहित प्रमुख पात्रों की भूमिका

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 15 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
छतरपुर: नौगांव की 122 साल पुरानी रामलीला, आज भी बाल कलाकार निभाते हैं भगवान राम सहित प्रमुख पात्रों की भूमिका

1905 में शुरू हुई परंपरा आज भी निर्बाध जारी

दो महीने तक कठिन नियम-संयम और अनुष्ठानों का पालन करते हैं 15 वर्ष से कम उम्र के कलाकार

छतरपुर, अक्टूबर 15: बुंदेलखंड के नौगांव की रामलीला 122 वर्षों से आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की अनूठी मिसाल बनी हुई है। वर्ष 1905 में शुरू हुई यह रामलीला आज भी लगातार आयोजित की जा रही है। इसकी सबसे खास बात यह है कि भगवान श्रीराम सहित प्रमुख पात्रों की भूमिका 15 वर्ष से कम उम्र के बाल कलाकार निभाते हैं।

रामलीला में अभिनय करने वाले बाल कलाकारों को लगभग दो महीने तक कठिन नियम-संयम और धार्मिक अनुष्ठानों का पालन करना पड़ता है। संवादों और चौपाइयों की प्रस्तुति आज भी पारंपरिक शैली में की जाती है, जिससे इस आयोजन की ऐतिहासिक पहचान बनी हुई है।

बुधवार को मंचित श्रीराम वनवास प्रसंग ने दर्शकों को भावुक कर दिया। भगवान श्रीराम के वनगमन के प्रसंग को देखकर रामलीला मैदान में मौजूद श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

नौगांव की यह रामलीला बुंदेलखंड की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर के साथ-साथ क्षेत्र के लोगों की अटूट आस्था और पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा का प्रतीक बनी हुई है।

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बाइट 1: डॉ भरत पाठक, अध्यक्ष, महाराजा छत्रसाल स्मृति शोध संस्थान, मऊ सहानिया

बाइट 2: विनोद महरोत्रा, संस्थापक परिवार एवं अध्यक्ष,श्री रामलीला मंडल नौगांव

बाइट 3: देवीदीन दुबे सभापति, श्री रामलीला मंडल नौगांव

बाइट 4: नंदिता पाठक, उपाध्यक्ष, मध्य प्रदेश भाजपा, भोपाल

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।