छठ-दीवाली से पहले एक और झटका! 7-8% महंगा हो सकता है खाने का तेल
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आने वाले महीनों में कई बड़े त्योहार हैं- दशहरा, छठ पूजा और दीवाली.
लोग इनकी तैयारियों में जुटे हुए हैं, लेकिन बढ़ती महंगाई ने आम आदमी को टेंशन में डाल दिया है.
प्याज, चीनी, नींबू के बाद अब सुनने में आ रहा है कि खाना पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाले तेल की भी कीमतें बढ़ने वाली हैं.
भारत अपनी जरूरत का लगभग 58% खाद्य तेल आयात करता है , जिससे वैश्विक बाजार में होने वाली हलचल का सीधा असर घरेलू कीमतों पर पड़ता है.
अगर अगले फेस्टिव सीजन से पहले कीमतें बढ़ती हैं, तो यह मार्च के बाद एडिबल ऑयल की कीमतों में बढ़ोतरी का तीसरा दौर होगा.
18-20% तक बढ़ जाएंगे दाम!
अगर अगले फेस्टिव सीजन से पहले कीमतें बढ़ती हैं, तो यह मार्च के बाद एडिबल ऑयल की कीमतों में बढ़ोतरी का तीसरा दौर होगा. मार्च से शुरू हुए दो दौर में कंपनियां 5-6% तक कीमतें बढ़ा चुकी हैं.
इसके चलते मार्च और जून के बीच कुल कीमतें 10-12% तक बढ़ तक बढ़ गई हैं.
अब मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और कच्चे माल की सप्लाई में कमी होने की वजह से कीमतों में 7-8% की एक और बढ़ोतरी की आशंका है.
अगर ऐसा होता है, तो मार्च से लेकर अब तक खाद्य तेलों के कुल दाम करीब 18-20% तक बढ़ जाएंगे.
क्यों बढ़ाए जाएंगे दाम?
कीमतों पर यह नया दबाव कच्चे खाने वाले तेलों की ज्यादा आयात लागत की वजह से है.
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के डेटा से पता चला है कि 18 सितंबर को मुंबई बंदरगाहों पर कच्चा पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल क्रमशः 1,265 डॉलर, 1,314 डॉलर और 1,380 डॉलर प्रति टन की कीमत पर पहुंचा.
जहां पाम और सोयाबीन तेल की लागत एक साल पहले के मुकाबले 11% ज्यादा थी. वहीं, सूरजमुखी तेल की लागत में 7% का इजाफा हुआ है.
कमजोर रुपये, बढ़ा हुआ ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट और इंश्योरेंस प्रीमियम बढ़ने से दुनिया भर में वेजिटेबल ऑयल की कीमतें बढ़ी हैं, जिसने रिफाइनरों और प्रोसेसर्स पर बोझ बढ़ा दिया है.
इमामी ग्रुप के डायरेक्टर आदित्य अग्रवाल ने कहा, "कच्चे खाने वाले तेल की लैंडेड कॉस्ट
📡 स्रोत: ABP Live Vyapar
💡 पृष्ठभूमि (Background)
खाद्य तेल की कीमतों में 7‑8% की बढ़ोतरी की संभावना है, जो छठ, दशहरा और दीवाली के त्योहारों के करीब है। भारत लगभग 58% तेल आयात पर निर्भर है, इसलिए वैश्विक आपूर्ति में बदलाव से घरेलू दाम प्रभावित होते हैं। यह विषय महत्वपूर्ण है क्योंकि त्योहारों के दौरान खाने का तेल प्रमुख सामग्री है, और बढ़ती महंगाई से परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ता है। आम जनता को अपनी खरीदारी की योजना बदलनी पड़ेगी, बजट में कटौती करनी होगी, और कुछ घरों को त्योहार के व्यंजनों में बदलाव करना पड़ेगा।