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छाती पर कलश स्थापित कर नौ दिनों की साधना में लीन हैं विश्वजीत

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 15 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
छाती पर कलश स्थापित कर नौ दिनों की साधना में लीन हैं विश्वजीत

मुंगेर के कमराय दुर्गा मंदिर में बांका निवासी 33 वर्षीय विश्वजीत कुमार सिंह लगातार चौथे वर्ष छाती पर कलश स्थापित कर नौ दिनों तक मां दुर्गा की आराधना कर रहे हैं।

15 अक्टूबर, असरगंज (मुंगेर, बिहार) : शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर मां दुर्गा की आराधना और भक्ति के विविध रूप देखने को मिल रहे हैं। इसी क्रम में मुंगेर जिले की सीमा पर स्थित कमराय चौक दुर्गा मंदिर में 33 वर्षीय भक्त विश्वजीत कुमार सिंह अपनी छाती पर कलश स्थापित कर नौ दिनों की कठिन साधना में लीन हैं। उनकी इस अनूठी साधना को देखने और मां दुर्गा के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करने के लिए असरगंज, कमराय समेत आसपास के गांवों तथा अन्य जिलों से भी श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं।

नवरात्र के प्रथम दिन पंडित मुकेश कुमार झा ने वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ विश्वजीत कुमार सिंह की छाती पर कलश स्थापित कराया। इसके बाद से वह लगातार मां दुर्गा की आराधना में लीन हैं। विशेष बात यह है कि विश्वजीत लगातार चौथे वर्ष इस कठिन साधना को कर रहे हैं। उनकी साधना क्षेत्र में चर्चा और श्रद्धा का विषय बनी हुई है। नवरात्र के दौरान मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना हुआ है।

कमराय दुर्गा मंदिर से है गहरा जुड़ाव

विश्वजीत कुमार सिंह मूल रूप से बांका जिले के शंभूगंज थाना क्षेत्र के चटमाडीह गांव के निवासी हैं। वह स्वर्गीय रंजीत प्रसाद सिंह के पुत्र हैं। उनकी बहन की शादी कमराय गांव में हुई है। इसी पारिवारिक संबंध के कारण उनका कमराय चौक स्थित दुर्गा मंदिर से गहरा जुड़ाव है। इसी मंदिर में वह लगातार चौथे वर्ष छाती पर कलश स्थापित कर नौ दिनों तक मां दुर्गा की आराधना कर रहे हैं।

साधना से पहले महीनों तक करते हैं अभ्यास

विश्वजीत की पत्नी अवंतिका देवी ने बताया कि इस कठिन साधना को शुरू करने से पहले वह कई महीनों तक अभ्यास करते हैं। उनके अनुसार, साधना की अवधि में विश्वजीत नौ दिनों तक किसी प्रकार का आहार ग्रहण नहीं करते हैं। इस दौरान तुलसी और गंगाजल से उनका चेहरा पोंछा जाता है। इस साधना के लिए धैर्य, एकाग्रता और दृढ़ संकल्प की आवश्यकता होती है।

विश्वजीत कुमार सिंह का कहना है कि मां दुर्गा की कृपा और आशीर्वाद से ही वह छाती पर कलश स्थापित कर उनकी आराधना कर पाते हैं। उनके लिए यह साधना मां के प्रति अटूट श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है।

नवरात्र के दौरान उनकी साधना को देखने के लिए मंदिर पहुंच रहे श्रद्धालु मां दुर्गा के प्रति अपनी आस्था प्रकट कर रहे हैं। मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना और भक्ति का माहौल बना हुआ है। विश्वजीत की यह साधना स्थानीय स्तर पर लोगों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।