छात्र बोले- 10 मिनट पहले निकले, नहीं तो दबे होते:बिल्डिंग से दरकने की आवाजें आ रही थीं; जन्माष्टमी की छुट्टी से बची दिल्ली हादसे में कई जान
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शुक्र है हम बच गए....यह कहना है, दिल्ली के सत्य निकेतन के हॉस्टल से कुछ देर पहले निकले छात्रों का। इनके मुताबिक, हादसे से कुछ देर पहले दीवारों से दरकने यानी क्रैक की आवाजें भी आ रही थीं। कुछ छात्रों ने बताया कि वे हादसे से महज 10-20 मिनट पहले ही बिल्डिंग से बाहर निकले थे। लौटे तो सबकुछ बिखर गया था।
बिल्डिंग के बेसमेंट में करीब एक हफ्ते से काम चल रहा था। हादसा दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन में रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे हुआ। गिरी हुई इमारत करीब 40 साल पुरानी थी। मलबे से अब तक 6 लोगों के शव मिल चुके हैं। हॉस्टल गिरने के पहले आखिर क्या हुआ था, उस बिल्डिंग में कितने लोग रहते थे, जानेंगे वहां रहने वाले छात्रों से हाल… ‘अगर वहां से नहीं निकलते तो हम भी दब जाते’ हॉस्टल में रहने वाले मोहम्मद यासीन ने कहा, " मैं फ्लैट में रहता हूं।
कल मैं अपने वारस के पास सत्य निकेतन में रुका था। हम लोग रातभर बात करते रहे। दोपहर में 12 बजे उठे। मेरा दोस्त वारिस बोला बिल्डिंग गिरने वाली है, उसमें क्रैक आ रहे हैं। दरकने की आवाज आ रही थी।" यासीन ने बताया, "तभी हम फ्रैश होने के लिए बाथरूम गए। देर रात से पानी नहीं आ रहा था। मैंने कहा, मेरे फ्लैट पर चलो, 20 मिनट बाद आए तो देखा बिल्डिंग गिर गई।
हमारे कुछ दोस्त भी दब गए थे। वे एम्स में भर्ती हैं। नीरज और नीतीश दोनों मलबे में दबकर घायल हो गए थे। अगर वहां से नहीं निकलते तो हम भी दब जाते। छोटी सी जगह थी, रेंट भी बहुत ज्यादा लेते हैं। 14-15 हजार रेंट है।" वारिस बोले- एक घंटे से दीवारें दरकने की आवाजें आ रही थीं वारिस ने बताया, 'मैं यहां एक महीने पहले आया था।
इस हॉस्टल में 13 से 14 लोग रहते थे। 5 फ्लोर में 2 कमरे थे। हर कमरे में 2 लोग रहते थे। जब मैं निकला था, उस वक्त 6 या 7 लोग थे। वहां एक हफ्ते से कंस्ट्रक्शन चल रहा था।" उन्होंने बताया, “मैंने एक घंटे पहले यासीन से मजाक में बोला कि बिल्डिंग गिरने वाली है। उसने सीरियसली नहीं लिया। दीवारों से दरकने की आवाजें आ रहीं थीं।
अगर हम फ्रैश होने के लिए नहीं निकलते तो,शायद ही हम बच पाते। बिल्डिंग गिरने की बात सुनकर मुझे झटका लगा। मेरे दोस्त लोग मुझे सही-सलामत देखकर खुश हैं।” हबीब बोला- हॉस्टल में 4 फ्लोर, 8 कमरे थे हबीब ने बताया, "जन्माष्टमी की छुट्टी के कारण कॉलेज 3 दिन से बंद था। इसलिए मै
📡 स्रोत: Dainik Bhaskar