छिंदवाड़ा का ऐतिहासिक पुस्तकालय आज भी संजोए है गौरवशाली विरासत, महात्मा गांधी की स्मृतियां हैं खास पहचान
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
छिंदवाड़ा की ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल पुराना पुस्तकालय आज भी अपने गौरवशाली अतीत की कहानी बयां कर रहा है। वर्ष 1918 में ब्रिटिश शासनकाल के दौरान स्थापित यह पुस्तकालय महज किताबों का संग्रह नहीं, बल्कि देश के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी ऐतिहासिक घटनाओं का भी साक्षी रहा है। तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर चिटनवीस के निर्देशन में स्थापित इस पुस्तकालय का इतिहास बेहद खास है।
6 जनवरी 1921 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने छिंदवाड़ा प्रवास के दौरान इसी परिसर में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया था। गांधीजी के आगमन और उनके ऐतिहासिक संबोधन की यादें आज भी यहां मौजूद हैं। परिसर में लगा शिलालेख उस ऐतिहासिक पल की गवाही देता है और आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्रता आंदोलन के गौरवशाली इतिहास से जोड़ता है।
वर्तमान में नगर निगम और स्थानीय समिति की देखरेख में संचालित इस पुस्तकालय में आज भी बड़ी संख्या में वरिष्ठ नागरिक और युवा नियमित रूप से पहुंचते हैं। यहां उपलब्ध पुरानी और महत्वपूर्ण पुस्तकों के माध्यम से पाठक इतिहास, साहित्य और ज्ञान की दुनिया से जुड़ते हैं। इसके साथ ही देश-दुनिया की समसामयिक गतिविधियों की जानकारी भी प्राप्त करते हैं।
बदलते दौर में जहां डिजिटल माध्यमों का चलन बढ़ा है, वहीं छिंदवाड़ा का यह ऐतिहासिक पुस्तकालय आज भी पुस्तकों और अध्ययन के प्रति लोगों की रुचि को बनाए हुए है। यह परिसर न केवल शहर की ऐतिहासिक पहचान है, बल्कि नई पीढ़ी के लिए इतिहास और ज्ञान की अनमोल विरासत भी है।
बाइट – उमेश अग्रवाल, अध्यक्ष, गांधीगंज व्यापारी मंडल
बाइट – अशोक संचेती, सचिव, गांधीगंज व्यापारी मंडल
बाइट – विनीत साहू, युवा ------
वर्ष 1918 में ब्रिटिश शासनकाल के दौरान हुई थी पुस्तकालय की स्थापना
तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर चिटनवीस के निर्देशन में हुआ था निर्माण
6 जनवरी 1921 को महात्मा गांधी ने इसी परिसर में की थी जनसभा
शिलालेख में आज भी संजोई हैं गांधीजी के ऐतिहासिक प्रवास की यादें
वरिष्ठ नागरिकों और युवाओं के लिए आज भी ज्ञान का प्रमुख केंद्र बना पुस्तकालय