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छूने से नहीं फैलता सोरायसिस, जानें लक्षण और उपचार

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 29 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
छूने से नहीं फैलता सोरायसिस, जानें लक्षण और उपचार

विश्व सोरायसिस दिवस पर कुचामन सिटी के राजकीय जिला अस्पताल में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। चर्म रोग विशेषज्ञों ने बताया कि सोरायसिस छूने, हाथ मिलाने या साथ बैठने से नहीं फैलता।

29 अक्टूबर,डीडवाना-कुचामन। त्वचा पर लाल चकत्ते और उन पर जमी सफेद पपड़ी देखकर कई लोग सोरायसिस से पीड़ित व्यक्तियों से दूरी बनाने लगते हैं। कुछ लोग मरीजों से हाथ मिलाने, गले मिलने या उनके संपर्क में आने से भी बचते हैं। जबकि सच्चाई यह है कि सोरायसिस कोई संक्रामक बीमारी नहीं है और यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में छूने या सामान्य संपर्क से नहीं फैलती। जागरूकता की कमी के कारण मरीजों को शारीरिक परेशानी के साथ सामाजिक भेदभाव और मानसिक तनाव का भी सामना करना पड़ता है।

इसी संदेश के साथ 29 अक्टूबर को विश्व सोरायसिस दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर डीडवाना-कुचामन जिले के राजकीय जिला अस्पताल, कुचामन सिटी में लोगों को सोरायसिस के लक्षण, कारण, उपचार और इससे जुड़ी भ्रांतियों के बारे में जागरूक किया जा रहा है। चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र कुमार सारण और डॉ. सरिता कलवानिया ने बीमारी से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा करते हुए मरीजों के प्रति संवेदनशीलता और सहयोग का व्यवहार रखने की अपील की।

‘मेरी त्वचा से परे देखिए’ है इस वर्ष की थीम

विश्व सोरायसिस दिवस 2026 की थीम ‘Look Beyond My Skin’ यानी ‘मेरी त्वचा से परे देखिए’ रखी गई है। इसका उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि सोरायसिस से प्रभावित व्यक्ति की पहचान केवल उसकी त्वचा पर दिखाई देने वाले निशानों तक सीमित नहीं है। उसकी भावनाओं, अनुभवों, व्यक्तित्व और सामाजिक जीवन को भी समझना जरूरी है।

इस वर्ष जागरूकता के संदेश में युवाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है, ताकि त्वचा संबंधी लक्षणों के कारण उन्हें शर्मिंदगी, उपेक्षा और भेदभाव का सामना नहीं करना पड़े। विशेषज्ञों का कहना है कि बीमारी के प्रति सही जानकारी फैलाकर मरीजों के आत्मविश्वास को बढ़ाया जा सकता है और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़कर रखा जा सकता है।

क्या है सोरायसिस और कैसे दिखते हैं इसके लक्षण?

चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र कुमार सारण ने बताया कि सोरायसिस प्रतिरक्षा तंत्र से जुड़ी एक दीर्घकालिक सूजन संबंधी बीमारी है। इसमें त्वचा की कोशिकाएं सामान्य से अधिक तेजी से बनने लगती हैं, जिसके कारण त्वचा पर लाल, मोटे और पपड़ीदार चकत्ते दिखाई देने लगते हैं। बीमारी की गंभीरता अलग-अलग मरीजों में अलग हो सकती है। कुछ लोगों में इसके लक्षण शरीर के सीमित हिस्सों में दिखाई देते हैं, जबकि कुछ मरीजों में यह शरीर के बड़े हिस्से को प्रभावित कर सकती है।

उन्होंने बताया कि सोरायसिस के लक्षण सिर की त्वचा, कोहनी, घुटनों, हाथ-पैर और शरीर के अन्य हिस्सों में दिखाई दे सकते हैं। खुजली, जलन, त्वचा में सूखापन और दरारें पड़ना इसकी प्रमुख समस्याओं में शामिल हैं। कुछ मामलों में त्वचा की दरारों से खून भी आ सकता है। इसके अलावा, मरीजों के नाखूनों के रंग और बनावट में बदलाव हो सकता है तथा नाखून कमजोर होकर टूटने लग सकते हैं।

छूने, हाथ मिलाने या साथ खाना खाने से नहीं फैलती बीमारी

डॉ. नरेंद्र कुमार सारण ने बताया कि सोरायसिस को लेकर समाज में कई तरह की भ्रांतियां मौजूद हैं। कुछ लोग इसे संक्रामक बीमारी समझ लेते हैं और मरीजों से दूरी बनाने लगते हैं। जबकि सोरायसिस छूने, हाथ मिलाने, गले लगने, साथ बैठने या साथ खाना खाने से नहीं फैलता।

उन्होंने कहा कि इस गलतफहमी के कारण मरीजों को कई बार सामाजिक उपेक्षा और भेदभाव का सामना करना पड़ता है। इससे उनके आत्मसम्मान और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। बीमारी से परेशान व्यक्ति को परिवार, दोस्तों और समाज के सहयोग की जरूरत होती है, न कि उसे अलग-थलग करने की।

विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की कि त्वचा पर दिखाई देने वाले निशानों के आधार पर किसी के प्रति भेदभाव न करें। सही जानकारी के अभाव में किसी मरीज से दूरी बनाना उसकी परेशानी को और बढ़ा सकता है।

आधुनिक उपचार से नियंत्रित किए जा सकते हैं लक्षण

चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. सरिता कलवानिया ने बताया कि सोरायसिस लंबे समय तक रहने वाली बीमारी है, लेकिन आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों की मदद से इसके लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है। उपचार का चयन बीमारी की गंभीरता, प्रभावित त्वचा के हिस्से और मरीज की व्यक्तिगत स्थिति के आधार पर किया जाता है।

उन्होंने बताया कि मरीजों को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार त्वचा पर लगाने वाली औषधीय क्रीम, फोटोथेरेपी और जरूरत पड़ने पर अन्य दवाएं दी जा सकती हैं। उपचार के दौरान नियमित चिकित्सकीय परामर्श लेना जरूरी है।

डॉ. कलवानिया ने कहा कि मरीजों को बीमारी के कारण घबराना नहीं चाहिए और न ही बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाएं बंद करनी चाहिए। घरेलू नुस्खों के भरोसे उचित उपचार में देरी करने से भी बचना चाहिए। समय पर विशेषज्ञ से परामर्श लेने और उपचार संबंधी निर्देशों का पालन करने से बीमारी को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है।

सोरायसिस का असर जोड़ों पर भी पड़ सकता है

विशेषज्ञों ने बताया कि सोरायसिस का प्रभाव केवल त्वचा तक सीमित नहीं रहता। कुछ मरीजों में सोरायटिक आर्थराइटिस यानी सोरायसिस से संबंधित गठिया भी विकसित हो सकता है। इस स्थिति में जोड़ों में दर्द, सूजन और अकड़न जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

यदि त्वचा संबंधी लक्षणों के साथ जोड़ों में लगातार दर्द, सूजन या अकड़न महसूस हो, तो इसे सामान्य परेशानी मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है, ताकि समय पर जांच और उचित उपचार किया जा सके।

विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि बीमारी के कारण होने वाला मानसिक तनाव, आत्मविश्वास में कमी और सामाजिक अलगाव मरीज के जीवन को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए उपचार में शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मरीज की मानसिक और भावनात्मक स्थिति का ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण है।

मरीजों को सम्मान और सहयोग देने की अपील विश्व सोरायसिस दिवस का उद्देश्य बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाना, गलत धारणाओं को दूर करना और सोरायसिस से प्रभावित लोगों को सम्मानजनक जीवन जीने के लिए प्रोत्साहित करना है। इस दिवस की शुरुआत वर्ष 2004 में इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ सोरायसिस एसोसिएशन्स की पहल पर हुई थी।

कुचामन सिटी के राजकीय जिला अस्पताल में जागरूकता के माध्यम से लोगों को यह संदेश दिया जा रहा है कि सोरायसिस से प्रभावित व्यक्ति को समाज से अलग करने के बजाय उसे समझने और सहयोग देने की जरूरत है। सही जानकारी, समय पर उपचार और परिवार एवं समाज के सकारात्मक व्यवहार से मरीजों के जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाई जा सकती है।

विशेषज्ञों का स्पष्ट संदेश है कि सोरायसिस छूने से नहीं फैलता। बीमारी से प्रभावित व्यक्ति को दूरी या तिरस्कार नहीं, बल्कि समझ, सम्मान और सहयोग की जरूरत है। त्वचा पर दिखाई देने वाले निशानों से आगे बढ़कर व्यक्ति को उसकी पूरी पहचान के साथ स्वीकार करना ही इस वर्ष की थीम का मूल उद्देश्य है।

बाइट डॉ. नरेंद्र कुमार सारण, चर्म रोग विशेषज्ञ, राजकीय जिला अस्पताल, कुचामन सिटी।

डॉ. सरिता कलवानिया, चर्म रोग विशेषज्ञ।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।