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चीनी के बढ़ते दामों पर लगेगी लगाम? 15 दिन पहले शुरू होगी पेराई

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 2 सितंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
चीनी के बढ़ते दामों पर लगेगी लगाम? 15 दिन पहले शुरू होगी पेराई

त्योहारों का समय आते ही चीनी के बढ़ते दामों ने लोगों की नाक में दम कर दिया है.

कुछ जगहों पर चीनी 70 रुपये किलो से ज्यादा बिक चुकी है, लेकिन अब इसकी कीमत करीब 60 रुपये किलो है. दाम कम करने के लिए सरकार ने चीनी को ड्यूटी फ्री आयात की मंजूरी दी है.

इसके साथ ही महाराष्ट्र की चीनी मिलों से 15 दिन पहले गन्ने की पेराई शुरू करने को कहा गया है.

अब देखना होगा कि इस फैसले से आम लोगों को चीनी के दामों में कितनी राहत मिलती है.

महाराष्ट्र देश का सबसे बड़ा चीनी बनाने वाला राज्य है.

सोलापुर और मराठवाड़ा यहां के प्रमुख गन्ना बनाने वाले इलाके हैं. लेकिन, 15 अक्टूबर से बड़े स्तर पर गन्ने की कटाई शुरू करना आसान नहीं होगा.

महाराष्ट्र के चीनी अधिकारी संजय भोसले के मुताबिक, राज्य में गन्ने की कटाई के लिए बड़ी संख्या में मजदूर दूसरे राज्यों से आते हैं.

मध्य प्रदेश के साथ दूसरे राज्यों के मजदूर आमतौर पर दशहरा और दिवाली के बाद महाराष्ट्र पहुंचते हैं.

इस साल दशहरा 20 अक्टूबर को है, इसलिए 15 अक्टूबर से ही बड़ी संख्या में मजदूरों का मिलना मुश्किल हो सकता है.

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जल्दी पेराई से कम चीनी की रिकवरी

समय से पहले पेराई शुरू करने पर सबसे बड़ी परेशानी चीनी की रिकवरी को लेकर है.

रिकवरी यानी एक फिक्स मात्रा के गन्ने से कितनी चीनी निकलती है.

संजय भोसले के अनुसार, 15 अक्टूबर से 15 नवंबर के बीच पेराई शुरू होने पर रिकवरी 7 से 7.5% तक गिर सकती है. वहीं नवंबर के बाद ये आमतौर पर 8% से ऊपर रहती है. सोलापुर में रिकवरी 8 से 11% तक पहुंच सकती है.

रिकवरी कम होने से चीनी मिलों को बड़ा फाइनेंशियल नुकसान हो सकता है. ऐसे में मिलों के लिए जल्दी पेराई शुरू करना जोखिम भरा हो सकता है.

किसानों की कमा

📡 स्रोत: ABP Live Vyapar

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

इस खबर में बताया गया है कि त्योहारों के दौरान चीनी के दाम बढ़ने से लोगों पर असर पड़ा है और सरकार ने चीनी को ड्यूटी फ्री आयात करने की मंजूरी दी है तथा महाराष्ट्र की मिलों से 15 दिन पहले गन्ने की पेराई शुरू करने को कहा गया है। यह विषय महत्वपूर्ण है क्योंकि बढ़ते दामों से आम जनता का खर्च बढ़ रहा है और खाद्य सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। इस निर्णय से चीनी की आपूर्ति बढ़ेगी, दाम कम हो सकते हैं और उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है, जिससे परिवारों का आर्थिक बोझ हल्का हो सकता है।

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