CJP नेता आशुतोष-सौरव को हिरासत में लिया गया:जंतर-मंतर पहुंचे थे; कल से ही यहां प्रदर्शन बैन किया गया था
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कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। दरअसल, दोनों CJP समर्थकों के साथ जंतर-मंतर पर पहुंचे और नारेबाजी की, जिसके बाद पुलिस ने सभी को पकड़ा है। जंतर-मंतर पर अब प्रदर्शन नहीं हो सकते हैं। केंद्र सरकार ने सोमवार को इसे निर्धारित प्रदर्शन स्थल की लिस्ट से हटा दिया है।
गृह मंत्रालय की बनाई कमेटी की सिफारिश पर दिल्ली का रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली का CBD ग्राउंड प्रदर्शन स्थल बनाए गए हैं। इस साल रामलीला मैदान सिर्फ 29 से 31 दिसंबर तक ही खाली है। इससे पहले 10 अक्टूबर को पार्टी के प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं को फ्लाइट से हिरासत में लिया गया था।
CJP नेता जंतर-मंतर पहुंचे, पुलिस ने हिरासत में लिया; तस्वीरें… रविवार को CJP नेताओं ने पुलिस से प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सोमवार को दिल्ली के संसद मार्ग थाने पहुंचे थे। उन्होंने पुलिस से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए तारीख और समय तय करने को कहा था।
पार्टी ने 24 घंटे के भीतर जवाब देने की मांग की थी। सौरव दास ने कहा था कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करना हर नागरिक का हक है और पुलिस को इसमें रोक-टोक नहीं करनी चाहिए। वहीं, आशुतोष रांका ने कहा था कि अगर 24 घंटे में जवाब नहीं मिला, तो पार्टी आगे के आंदोलन की तारीख का ऐलान करेगी। हालांकि, इसके थोड़ी देर बाद दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की लिस्ट से हटा दिया था।
गृह मंत्रालय की बनाई कमेटी की सिफारिश पर दिल्ली का रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली का CBD ग्राउंड प्रदर्शन स्थल बनाए गए। खबर अपडेट हो रही है…
📡 स्रोत: Dainik Bhaskar
💡 पृष्ठभूमि (Background)
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता आशुतोष रांका और सौरव दास को दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर में नारेबाजी के बाद हिरासत में लिया है। यह घटना तब हुई जब पार्टी ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में चुना था, परंतु सरकार ने सोमवार को इसे सूची से हटा दिया था। यह खबर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह राजनीतिक विरोध के स्वरूप और सरकारी नियंत्रण के बीच के तनाव को दर्शाती है। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि जंतर-मंतर और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शन की स्वतंत्रता सीमित हो सकती है, जिससे नागरिकों के अ