देश

डॉक्टरों पर हमलों से सुप्रीम कोर्ट नाराज:कहा- कानून से ऊपर कोई नहीं, चुने हुए नेताओं की जिम्मेदारी ज्यादा

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 2 अक्टूबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: जनता का संदेश
डॉक्टरों पर हमलों से सुप्रीम कोर्ट नाराज:कहा- कानून से ऊपर कोई नहीं, चुने हुए नेताओं की जिम्मेदारी ज्यादा

सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टरों और अन्य सरकारी कर्मचारियों पर निर्वाचित नेताओं के बढ़ते हमलों पर चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा कि जनप्रतिनिधियों की कानून का सम्मान करने की जिम्मेदारी ज्यादा होती है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने यह टिप्पणी शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे और तीन अन्य की जमानत रद्द करते हुए की।

इन पर ठाणे जिले के एक नगरपालिका अस्पताल में डॉक्टरों से मारपीट और गाली-गलौज का आरोप है। 28 सितंबर के विस्तृत आदेश में कोर्ट ने सभी आरोपियों को 5 अक्टूबर तक सरेंडर करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि निर्वाचित पद की ताकत कानून से ऊपर नहीं हो सकती। निर्वाचित पद और कानून का पालन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधि पर कानून का सम्मान करने और संस्थाओं में लोगों का भरोसा मजबूत करने की ज्यादा जिम्मेदारी होती है।

कोर्ट ने कहा कि निर्वाचित पद पर बैठे लोगों द्वारा नागरिकों या सरकारी कर्मचारियों से निपटने में बल, धमकी या गैरकानूनी तरीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। ऐसे मामले देश के अलग-अलग हिस्सों से सामने आए हैं। बेंच ने कहा कि मौजूदा घटना को अकेली घटना मानकर नहीं देखा जा सकता। ऐसे मामलों से समाज की शांति और स्थिरता पर बुरा असर पड़ता है।

इससे सार्वजनिक व्यवस्था भी बिगड़ती है। कोर्ट ने बताया कि म्हात्रे मामले के बाद महाराष्ट्र के पालघर में भी शिवसेना नेताओं से जुड़ी ऐसी ही घटना सामने आई थी। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि हर मामले की जांच उसके अपने तथ्यों और कानून के अनुसार होनी चाहिए। लेकिन निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा कानून से मिली सीमा से ज्यादा अधिकार हासिल करने या करने की कोशिश के आरोपों की बार-बार सामने आना गंभीर चिंता का विषय है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निर्वाचित पद के साथ कानून के शासन और उन संस्थाओं का सम्मान करने की जिम्मेदारी आती है, जहां शिकायतों का समाधान होता है। चुनाव से मिली ताकत को कानून की ताकत का विकल्प नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने कहा, “पद चाहे कितना भी बड़ा हो, कोई भी व्यक्ति कानून के अनुशासन से ऊपर नहीं हो सकता।” डॉक्टरों को डराने-धमकाने पर सख्ती सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ड्यूटी कर रहे डॉक्टरों को डराने या उन पर हमला करने की कोई कोशिश बर्दाश्त नहीं की जा सकती।

खासकर तब, जब आरोपी निर्वाचित पद पर हो। कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक पद की वैधता आदेश द

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

📰 पूरी खबर पढ़ें (Dainik Bhaskar पर जाएं)

💡 पृष्ठभूमि (Background)

सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टरों और सरकारी कर्मचारियों पर बढ़ते हमलों पर चिंता जताई है, यह कहते हुए कि कानून से ऊपर कोई नहीं और निर्वाचित नेताओं की जिम्मेदारी अधिक है। यह विषय स्वास्थ्य कर्मियों के प्रति हिंसा और राजनीतिक हस्तक्षेप को उजागर करता है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह न्यायपालिका की भूमिका और नागरिक अधिकारों की रक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाती है। आम जनता पर इसका असर यह है कि नागरिकों को यह समझ आता है कि कानून का पालन अनिवार्य है और राजनीतिक नेताओं को भी जिम्मेदारी निभानी चाहिए, जिससे समाज म

J
JKS News Desk

जनता का संदेश की संपादकीय टीम आपके लिए भोपाल, मध्यप्रदेश और देश की सटीक और विश्वसनीय समाचार प्रस्तुत करती है।