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दमोह में ‘सड़क से गौशाला की ओर’ अभियान, निराश्रित गौवंश को मिलेगा आशियाना

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 10 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
दमोह में ‘सड़क से गौशाला की ओर’ अभियान, निराश्रित गौवंश को मिलेगा आशियाना

दमोह। सड़कों पर निराश्रित जीवन जी रहे गौवंश को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने के लिए दमोह में प्रशासन और आमजन की सहभागिता से एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। ‘सड़क से गौशाला की ओर’ नाम से शुरू किए गए इस अभियान के तहत सड़कों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर घूमने वाले निराश्रित गौवंश को गौशालाओं तक पहुंचाया जा रहा है। अभियान में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI भी सहयोग कर रहा है।

दरअसल, दमोह जिले के शहरी क्षेत्रों, बाजारों और प्रमुख मार्गों पर निराश्रित मवेशियों की मौजूदगी लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। सड़कों पर बैठे रहने वाले गौवंश के कारण यातायात प्रभावित होने के साथ सड़क हादसों का खतरा भी बना रहता है। इन समस्याओं को देखते हुए जिला प्रशासन ने गौवंश को सड़कों से हटाकर सुरक्षित आश्रय तक पहुंचाने की पहल की है।

अभियान को गति देने के लिए NHAI की ओर से जिले में काऊ कैचर वाहन उपलब्ध कराए गए हैं। इन वाहनों को गौपालकों और गौसेवकों की मौजूदगी में रवाना किया गया। अब इन वाहनों की मदद से शहर के साथ स्टेट हाईवे और अन्य प्रमुख मार्गों पर घूमने वाले निराश्रित गौवंश को पकड़कर गौशालाओं तक पहुंचाने का काम किया जा रहा है।

इस पहल में आमजन की सहभागिता भी अहम भूमिका निभा रही है। अभियान से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि इससे निराश्रित गौवंश को सुरक्षित आश्रय मिलेगा और सड़कों पर मवेशियों की मौजूदगी कम होने से यातायात व्यवस्था बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही सड़क हादसों की आशंका को कम करने में भी यह पहल कारगर साबित हो सकती है।

प्रशासन और जनसहयोग से शुरू हुआ ‘सड़क से गौशाला की ओर’ अभियान अब गौवंश संरक्षण के साथ सड़क सुरक्षा की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।