डेब्यू मैच में नहीं चला वीरेंद्र सहवाग के बेटे का बल्ला, पापा के सामने फ्लॉप
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पापा की तरह क्रिकेट के मैदान पर कदम रखने का आर्यवीर सहवाग का इंतजार आखिरकार खत्म हुआ, लेकिन डेब्यू का ये पल उनकी उम्मीद के मुताबिक यादगार नहीं बन सका.
ऑस्ट्रेलिया अंडर-19 के खिलाफ राजकोट में खेले गए मुकाबले में आर्यवीर पहली बार भारत की अंडर-19 जर्सी में बल्लेबाजी करने उतरे.
बेटे को खेलते देखने के लिए वीरेंद्र सहवाग भी स्टेडियम में मौजूद थे, लेकिन आर्यवीर 26 गेंदों में 28 रन बनाकर आउट हो गए. उनकी पारी में 5 चौके जरूर आए, मगर वो बड़ी पारी खेलने से चूक गए.
राजकोट में बारिश ने मैच का रंग बदल दिया और 50 ओवर के मुकाबले को कम कर के 20-20 ओवर का करना पड़ा.
कम ओवरों के इस मैच में भारतीय सलामी बल्लेबाजों के सामने तेजी से रन बनाने की चुनौती थी. आर्यवीर ने शुरुआत में कुछ अच्छे शॉट लगाए और पांच चौके भी जड़े. लेकिन, 26 गेंदों में 28 रन के स्कोर पर उनकी पारी खत्म हो गई.
ऐसे में डेब्यू मैच में उनसे बड़ी पारी की उम्मीद पूरी नहीं हो सकी.
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बेटे का डेब्यू देखने पहुंचे सहवाग
आर्यवीर के डेब्यू को खास बनाने के लिए उनके पिता और भारत के पूर्व विस्फोटक सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग भी निरंजन शाह स्टेडियम पहुंचे थे.
स्टैंड्स में बैठकर बेटे को भारत की अंडर-19 जर्सी में खेलते हुए देखते सहवाग की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर सामने आईं.
आर्यवीर इससे पहले घरेलू क्रिकेट में भी अपनी बल्लेबाजी से ध्यान खींच चुके हैं.
अन्वय द्रविड़ ने संभाली पारी
जहां आर्यवीर बड़ी पारी नहीं खेल सके, वहीं राहुल द्रविड़ के छोटे बेटे अन्वय द्रविड़ ने बल्ले से अपनी छाप छोड़ी. विकेटकीपर बल्लेबाज अन्वय 6 नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे.
उस समय भारत अंडर-19 की टीम 88 रन पर चार विकेट गंवा चुकी थी. इसके बाद अन्वय ने तेजी से रन बनाते ह
📡 स्रोत: ABP Live Khel
💡 पृष्ठभूमि (Background)
यह खबर भारत के युवा क्रिकेटर आर्यवीर सहवाग के डेब्यू मैच में उनके प्रदर्शन पर आधारित है, जहाँ उन्होंने 26 गेंदों में 28 रन बनाकर आउट हो गए। यह विषय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आर्यवीर, वीरेंद्र सहवाग के बेटे, भारतीय क्रिकेट के भविष्य के सितारे माने जाते हैं और उनके पापा की उम्मीदें भी ऊँची थीं। इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि युवा खिलाड़ियों को दबाव के बावजूद अपनी क्षमताएँ साबित करनी पड़ती हैं। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि युवा खेल प्रेमियों को यह संदेश मिले कि सफलता के लिए निरंतर अभ्यास