दिल्ली-NCR में दीपावली पर सिर्फ ग्रीन पटाखे फोड़ सकेंगे:अस्पताल-वृद्धाश्रम जैसे साइलेंस जोन में रोक, सुप्रीम कोर्ट ने लगातार दूसरे साल परमिशन दी
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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में 7 और 8 नवंबर 2026 को ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति दी है। पटाखे केवल सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे तक जलाए जा सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने अस्पतालों, नर्सिंग होम, प्राथमिक एवं जिला स्वास्थ्य केंद्रों, वृद्धाश्रमों और अधिसूचित साइलेंस जोन के 300 मीटर के दायरे में पटाखे जलाने पर रोक लगाई है।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि इन क्षेत्रों के साथ-साथ शैक्षणिक संस्थानों को भी 'नो-क्रैकर जोन' घोषित किया जाए। इनकी उचित मार्किंग की जाए और लोगों को इसकी जानकारी दी जाए। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 15 अक्टूबर को दिल्ली-NCR में पटाखे चलाने को लेकर आदेश दिया था। इसमें दो दिन 19 और 20 अक्टूबर को ग्रीन पटाखे फोड़ने की इजाजत दी थी।
ग्रीन पटाखे जलने से कम धुआं निकलता है ग्रीन पटाखे ऐसे पटाखे होते हैं, जिन्हें सामान्य पटाखों के मुकाबले कम प्रदूषण फैलाने के लिए बनाया जाता है। इनमें हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल कम किया जाता है, जिससे इनके जलने पर कम धुआं और कम हानिकारक गैसें निकलती हैं। पिछली 2 सुनवाई, कोर्ट ने कहा था- 24 घंटे पटाखे नहीं चला सकते 30 सितंबर: 24 घंटे पटाखे चलाने की परमिशन नहीं दे सकते 30 सितंबर को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हम पटाखों पर पूरी तरह रोक नहीं लगाएंगे।
साथ ही चौबीसों घंटे पटाखे जलाने की अनुमति भी नहीं मिलेगी। बेंच ने कहा था कि बीच का रास्ता निकालना जरूरी है। इसके लिए पटाखे जलाने के तय समय निर्धारित किए जा सकते हैं। 29 अक्टूबर: कोहली से बिना पटाखे दिवाली की अपील कराएं कोर्ट ने कहा कि विराट कोहली जैसी मशहूर शख्सियतों की मदद से लोगों को जागरूक किया जा सकता है।
कोर्ट ने सुझाव दिया कि मशहूर हस्तियों से ऐसे वीडियो या मैसेज रिकॉर्ड कराए जा सकते हैं, जिनमें वे लोगों से प्रदूषण बढ़ाए बिना दिवाली मनाने की अपील करें। कोर्ट में बताया- देश में वायु प्रदूषण से 20 लाख मौतें मामले में कोर्ट की सहायता कर रहीं एमिकस क्यूरी और वरिष्ठ वकील उत्तरा बब्बर ने वायु प्रदूषण से होने वाले स्वास्थ्य संबंधी नुकसान और दिल्ली-NCR में पटाखे जलाने के खतरों के बारे में बताया था।
उन्होंने स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर 2025 रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा था कि भारत में मौतों के प्रमुख कारणों में वायु प्रदूषण सबसे आगे है। इसके कारण देश में 20.1 लाख से ज्यादा मौतें हुईं। इ
📡 स्रोत: Dainik Bhaskar