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दिल्ली दंगा मामला: पर्याप्त सबूतों के अभाव में सात आरोपी बरी, जमीयत उलमा-ए-हिंद ने पांच आरोपियों को दी कानूनी सहायता

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 13 अक्टूबर 2026 👁️ 3 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: जनता का संदेश
दिल्ली दंगा मामला: पर्याप्त सबूतों के अभाव में सात आरोपी बरी, जमीयत उलमा-ए-हिंद ने पांच आरोपियों को दी कानूनी सहायता

मौलाना अरशद मदनी के निर्देश पर अधिवक्ता बाबर चौहान और उनकी टीम ने की पैरवी

नई दिल्ली, 12 अक्टूबर 2026। वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े एक मामले में कड़कड़डूमा स्थित अदालत के फैसले के बाद कानूनी कार्रवाई और आरोपियों को उपलब्ध कराई गई सहायता चर्चा में है। जमीयत उलमा-ए-हिंद ने इस मामले में पांच आरोपियों को कानूनी सहायता प्रदान की। संगठन के अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी के निर्देश पर अधिवक्ता बाबर चौहान और उनकी टीम ने बचाव पक्ष की ओर से पैरवी की।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों और बचाव पक्ष की दलीलों पर विचार किया। मामले में आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को दंगा भड़काने में उकसावे के आरोप में दोषी ठहराया गया, जबकि अन्य आरोपों के संबंध में उन्हें राहत मिली। सह-आरोपियों को लेकर अदालत के फैसले में भी महत्वपूर्ण राहत दी गई। सजा पर सुनवाई बाद की तारीख के लिए निर्धारित की गई।

पांच आरोपियों को उपलब्ध कराई गई कानूनी सहायता

जमीयत उलमा-ए-हिंद के अनुसार, संगठन ने राज्य अली, अरशद कय्यूम, मोहम्मद शादाब, मोहम्मद आबिद और मोहम्मद रेहान को कानूनी सहायता उपलब्ध कराई। मौलाना अरशद मदनी के निर्देश पर अधिवक्ता बाबर चौहान और उनकी टीम ने अदालत में उनका पक्ष रखा।

मामले में अभियोजन पक्ष ने सरकारी गवाहों के बयान प्रस्तुत किए थे। वहीं, बचाव पक्ष ने साक्ष्यों की पर्याप्तता और गवाहों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए दलील दी कि आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त प्रमाण आवश्यक हैं। अदालत के फैसले में आरोपियों के विरुद्ध प्रस्तुत सामग्री पर विचार किया गया।

2020 के दंगों से जुड़े मामले में सुनवाई

यह मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा से संबंधित आपराधिक मामलों की श्रृंखला से जुड़ा है। दंगों के दौरान कई इलाकों में आगजनी, तोड़फोड़ और संपत्तियों को नुकसान पहुंचने की घटनाएं सामने आई थीं। इन घटनाओं के बाद पुलिस ने अलग-अलग शिकायतों के आधार पर मामले दर्ज कर जांच की थी।

अदालत में किसी आरोपी के विरुद्ध आरोप साबित करने के लिए प्रस्तुत साक्ष्यों का न्यायिक परीक्षण महत्वपूर्ण होता है। पर्याप्त प्रमाण नहीं मिलने पर संबंधित आरोपों में दोषसिद्धि नहीं की जा सकती। इस मामले में भी अदालत के निर्णय और प्रत्येक आरोपी के संबंध में दर्ज निष्कर्षों को उसी के अनुरूप समझना आवश्यक है।

जमीयत उलमा-ए-हिंद ने पांच आरोपियों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराकर उनकी पैरवी में सहयोग किया। संगठन की ओर से अधिवक्ता बाबर चौहान और उनकी टीम ने मामले में बचाव पक्ष का प्रतिनिधित्व किया।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।