डीडवाना के पशु मेले की रौनक फीकी
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नागौरी बैलों की खरीद-फरोख्त पर रोक, 60 फीसदी तक घटी गौवंश की आवक, दूसरे राज्यों से आए खरीदार खाली हाथ लौटे
डीडवाना, 4 अक्टूबर। डीडवाना-कुचामन जिले के पशु मेले लंबे समय से देशभर में अपनी अलग पहचान रखते हैं। परबतसर का वीर तेजा पशु मेला, लाडनूं का पाबोलाव पशु मेला और डीडवाना का इन्डोलाव पशु मेला पशुपालकों और पशु व्यापारियों के प्रमुख केंद्र माने जाते हैं। इन दिनों डीडवाना में इन्डोलाव पशु मेला चल रहा है, लेकिन इस बार लम्पी डिजीज के चलते मेले की रौनक फीकी पड़ गई है।
इन्डोलाव पशु मेला खास तौर पर नागौरी नस्ल के बैलों के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। यहां राजस्थान के अलावा हरियाणा, पंजाब, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश सहित कई राज्यों से पशुपालक और पशु व्यापारी पहुंचते हैं। नागौरी नस्ल के बैल खेती-बाड़ी में उपयोगी होने के साथ ही देश के विभिन्न हिस्सों में नस्ल सुधार के लिए भी मांग में रहते हैं।
लम्पी डिजीज के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए पशुपालन विभाग ने मेले में गौवंश की खरीद-फरोख्त पर रोक लगा दी है। इसके चलते गाय और बैलों की बिक्री नहीं हो पा रही है। गौवंश लेकर मेले में पहुंचने वाले पशुपालकों को भी वापस लौटना पड़ रहा है। इससे मेले में गौवंश की मौजूदगी लगभग समाप्त हो गई है।
पशुपालकों के अनुसार, प्रतिबंध के कारण इस बार मेले में गौवंश की आवक और पशुओं की संख्या में करीब 60 प्रतिशत तक कमी आई है। दूसरी ओर, दूसरे राज्यों से नागौरी बैल और अन्य गौवंश खरीदने पहुंचे व्यापारी भी खाली हाथ लौटने को मजबूर हैं। खरीदारों को उनकी जरूरत के अनुसार पशु नहीं मिल पा रहे हैं। गौवंश की बिक्री पर रोक का सीधा असर पशुपालकों पर भी पड़ा है। मेले में पशु बेचने की उम्मीद लेकर पहुंचे पशुपालकों को बिक्री नहीं होने से आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं, व्यापारियों का कारोबार भी प्रभावित हुआ है।
नागौरी बैलों की खरीद-फरोख्त के लिए देशभर में पहचान रखने वाला इन्डोलाव पशु मेला इस बार बीमारी की रोकथाम और व्यापारिक गतिविधियों के बीच संतुलन की चुनौती से गुजर रहा है। लम्पी डिजीज के कारण लगे प्रतिबंध ने पहले से चुनौतियों का सामना कर रहे मेले के संकट को और बढ़ा दिया है।
बाइट -01- खुमाराम सारण (पशु मेला प्रभारी)
बाइट -02- ओम प्रकाश लील
बाइट -03- मनोज (उत्तर प्रदेश)
बाइट -04- फजलुद्दीन (उत्तर प्रदेश)
बाइट -05- जोगेंद्र (उत्तर प्रदेश)