दीपावली पर ‘वोकल फॉर लोकल’ की मिसाल बना दुर्ग का सिरसा गांव, 200 कुम्हार परिवार दीये बनाने में जुटे
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दुर्ग। दीपावली का पर्व नजदीक आते ही छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के सिरसा गांव में मिट्टी के दीये बनाने का काम तेज हो गया है। गांव के करीब 200 कुम्हार परिवार पारंपरिक दीये तैयार करने में जुटे हुए हैं। प्रधानमंत्री के ‘वोकल फॉर लोकल’ के आह्वान से प्रेरित होकर स्थानीय कारीगर अपनी पारंपरिक कला और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।
मिट्टी से दीये तैयार करने वाले इन कुम्हारों के लिए यह काम केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा का हिस्सा है। दीपावली पर मिट्टी के दीयों की मांग को देखते हुए कारीगर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। पर्यावरण के अनुकूल होने के कारण पारंपरिक मिट्टी के दीये लोगों के बीच खास पसंद बने हुए हैं।
इस वर्ष दीयों की मांग स्थानीय बाजारों के साथ-साथ दूसरे क्षेत्रों में भी देखी जा रही है। दूर-दराज के इलाकों से थोक व्यापारी सीधे गांव पहुंचकर दीयों की खरीदारी कर रहे हैं। इससे कुम्हारों को अपने उत्पादों का बेहतर मूल्य मिल रहा है और उनकी कला को व्यापक बाजार भी मिल रहा है।
स्थानीय कुम्हारों से मिट्टी के दीये खरीदना भारतीय संस्कृति और परंपरा को सहेजने के साथ-साथ ग्रामीण कारीगरों की मेहनत और हुनर को प्रोत्साहित करने का भी माध्यम है। सिरसा गांव के कुम्हार परिवार पारंपरिक कला के जरिए आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ते हुए ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को साकार कर रहे हैं।
बाइट – कुम्हार