दिवाली पर बदला ट्रेंड, पुराने गहनों के बदले नए गहनों की बढ़ी मांग
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06 नवंबर, नई दिल्ली : धनतेरस और दिवाली पर सोना खरीदना हमारे देश में हमेशा से शुभ माना जाता रहा है। लेकिन इस साल बाज़ार में एक बड़ा बदलाव दिख रहा है। सोने के दाम बीते दो सालों में लगभग दोगुने हो चुके हैं। यही वजह है कि लोग अब सीधे कैश देकर नया सोना खरीदने के बजाय, घर में रखा पुराना सोना देकर नए गहने ले रहे हैX यानी कि 'Old Gold Exchange' कर रहे हैं।
World Gold Council (WGC) की रिसर्च हेड कविता चाको के मुताबिक, इस त्योहारी सीजन में पुराने सोने के बदले नए आभूषण लेने के मामलों में 10 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा लोग वजन में कम और हल्के गहने चुन रहे हैं। यानी लोग पैसे तो पूरे खर्च कर रहे हैं, लेकिन सोने का कुल वजन कम खरीद रहे हैं।
धनतेरस पर बाजार में रौनक तो वही है लेकिन ट्रेंड थोड़ा बदलता नजर आ रहा है। ऐसे में लोग पुराने गहने देकर नया डिजाइन ले रहे हैं, जिससे नए गहने की कीमत काफी हद तक कम हो जाती है। ज्वेलर्स भी इस ट्रेंड को बढ़ावा देने के लिए एक्सचेंज पर खास छूट और ऑफर्स दे रहे हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिसर्च हेड (भारत), कविता चाको का कहना है कि "इस ट्रेंड की सबसे बड़ी वजह अफोर्डेबिलिटी यानी जेब पर पड़ने वाला असर है।
पिछले दो सालों में सोने के भाव दोगुने से ज्यादा बढ़ गए हैं। इसलिए लोग नए गहनों का खर्च कम करने के लिए पुराना सोना एक्सचेंज कर रहे हैं। ज्वैलर्स भी ग्राहकों को कई तरह की छूट देकर इसे बढ़ावा दे रहे हैं।"
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़े बताते हैं कि साल 2026 के पहले 9 महीनों में सोने के गहनों की मांग वजन के हिसाब से 18 फीसदी घटी है, लेकिन ऊंची कीमतों के कारण लोगों ने इस पर 29 फीसदी ज्यादा रकम खर्च की है।
बाजार में आ रहे इस बदलाव के पीछे जागरूकता और आर्थिक नीतियां भी एक वजह हो सकती हैं। मई के महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जनता से सोने की खरीदारी में संतुलन बरतने की अपील की थी, ताकि देश का आयात खर्च सीमित रहे और विदेशी मुद्रा की बचत हो सके।
WGC के सर्वे के मुताबिक, बाजार पर इस अपील का भी मनोवैज्ञानिक असर दिखा है। वहीं, जो लोग गहनों में भारी निवेश नहीं कर पा रहे हैं, वे डिजिटल गोल्ड और गोल्ड ईटीएफ जैसे विकल्पों को अपना रहे हैं।
कीमतों में लगभग 60 फीसदी की वृद्धि ने ज्वेलरी निर्माण के तौर-तरीकों को भी बदल दिया है। अब उपभोक्ता 22 कैरेट के पारंपरिक भारी गहनों के बजाय 18 कैरेट, स्टडेड और रोजमर्रा पहनने लायक 'लाइटवेट ज्वेलरी' को तवज्जो दे रहे हैं।
तो साफ है कि इस बार धनतेरस और दिवाली पर सोने की खरीदारी रुकी नहीं है, बस समझदारी भरी हो गई है। लोग परंपरा भी निभा रहे हैं, नए फैशन के गहने भी पहन रहे हैं, लेकिन पुराने सोने को बदलकर और हल्के गहने चुनकर अपने बजट को भी संभाल रहे हैं।