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दीवाली पर घर लौटने वालों की बढ़ी मुश्किलें:ट्रेनों में 200 से 300 तक पहुंची वेटिंग, कंफर्म टिकट मिलना मुश्किल

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 3 नवंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
दीवाली पर घर लौटने वालों की बढ़ी मुश्किलें:ट्रेनों में 200 से 300 तक पहुंची वेटिंग, कंफर्म टिकट मिलना मुश्किल

उन्नाव में दीवाली पर घर लौटने की तैयारी कर रहे यात्रियों को ट्रेनों में कंफर्म टिकट नहीं मिल रहे हैं। दिल्ली, मुंबई, लुधियाना, दक्षिण भारत और बिहार से उन्नाव और आसपास के इलाकों में आने वाली ट्रेनों में सीटें तेजी से भर रही हैं। कई ट्रेनों में वेटिंग 200 से 300 तक पहुंच गई है। ऐसे में नौकरीपेशा लोगों, कारोबारियों और दूसरे शहरों में पढ़ने वाले युवाओं के लिए त्योहार पर घर पहुंचना मुश्किल हो रहा है।

नियमित ट्रेनों के साथ साप्ताहिक और स्पेशल ट्रेनों में भी सीटें कम बची हैं। पुष्पक एक्सप्रेस, कोटा-पटना, अमृतसर और पुणे की ओर जाने वाली साप्ताहिक ट्रेनों समेत कई सुपरफास्ट और एक्सप्रेस ट्रेनों में सीटें फुल हैं। समय पर टिकट बुक नहीं कराने वाले यात्री अब तत्काल टिकट के भरोसे हैं। लंबी दूरी और भीड़ के कारण जनरल कोच में सफर करना भी आसान विकल्प नहीं रह गया है।

नियमित ट्रेनों में जगह नहीं, स्पेशल से भी राहत की उम्मीद कम त्योहार के समय दूसरे शहरों में रहने वाले लोग बड़ी संख्या में घर लौटते हैं। उन्नाव और आसपास के हजारों लोग दिल्ली, मुंबई, पंजाब और दक्षिण भारत के शहरों में नौकरी और कारोबार करते हैं। बिहार और पूर्वांचल जाने वाले यात्रियों की संख्या भी बढ़ जाती है।

इससे प्रमुख रूटों की ट्रेनों में सीटों की मांग बढ़ गई है। नियमित ट्रेनों में सीटें नहीं मिलने पर यात्री साप्ताहिक और स्पेशल ट्रेनों में जगह तलाश रहे हैं। इन ट्रेनों में भी बर्थ कम होने से यात्रियों को राहत नहीं मिल रही है। कई यात्री यात्रा की तारीख बदलने या दूसरे स्टेशन से ट्रेन पकड़ने का विकल्प देख रहे हैं।

तत्काल टिकट के भरोसे यात्री कंफर्म टिकट नहीं मिलने पर अब यात्रियों की उम्मीद तत्काल कोटे पर टिकी है। तत्काल टिकट की बुकिंग सीमित समय के लिए होती है और मांग अधिक होने के कारण कुछ ही समय में सीटें भर सकती हैं। ऐसे में यात्रियों को निर्धारित समय पर टिकट बुक कराने की तैयारी करनी पड़ रही है।

हालांकि, तत्काल में टिकट मिलना भी सुनिश्चित नहीं है। जिन यात्रियों को त्योहार के दिन ही घर पहुंचना है, उनके सामने परेशानी अधिक है। कुछ लोग बसों से यात्रा करने का विकल्प भी तलाश रहे हैं, लेकिन लंबी दूरी और यात्रा खर्च को देखते हुए ट्रेन को प्राथमिकता दी जाती है। परिवार के साथ त्योहार मनाने की चिंता दूसरे शहरों में नौकरी करने वाले लोगों के लिए त्योहार पर घर लौटना केवल यात्रा नहीं, बल्कि परिवार के साथ समय बिताने का मौका होता है।

कई लोग छुट्टियों के हिसाब से टिकट बुक कराते हैं, लेकिन वेटिंग टिकट के कारण उनकी योजना बिगड़ने की आशंका है। वहीं, परिवार के साथ यात्रा करने वालों के लिए एक साथ सीटें मिलना और भी मुश्किल हो सकता है। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि टिकट की स्थिति देखकर ही यात्रा की योजना बनाएं। वेटिंग टिकट की पुष्टि की संभावना ट्रेन, यात्रा की तारीख और कोटे के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

इसलिए केवल वेटिंग नंबर देखकर कंफर्म बर्थ मिलने की गारंटी नहीं मानी जा सकती। त्योहार के दौरान बढ़ती मांग को देखते हुए यात्रियों की नजर रेलवे की ओर से घोषित अतिरिक्त ट्रेनों और अतिरिक्त कोच की व्यवस्था पर भी रहेगी। अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध कराए जाने से यात्रियों को कुछ राहत मिल सकती है।

फिलहाल, कंफर्म टिकट की कमी ने घर लौटने की तैयारी कर रहे लोगों की चिंता बढ़ा दी है। इन रूटों पर टिकट की मारामारी त्योहार पर दिल्ली, मुंबई, लुधियाना, दक्षिण भारत और बिहार से आने-जाने वाले यात्रियों को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इन रूटों पर नौकरी और कारोबार के सिलसिले में बड़ी संख्या में लोग यात्रा करते हैं।

पुष्पक एक्सप्रेस, कोटा-पटना, अमृतसर और पुणे की ओर चलने वाली साप्ताहिक ट्रेनों में भी सीटों की उपलब्धता कम बताई जा रही है। यात्रियों को अपनी पसंद की तारीख पर टिकट नहीं मिलने के कारण यात्रा की योजना में बदलाव करना पड़ सकता है।

📡 स्रोत: NewsData.io

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