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दुमका के धधकिया सतन आश्रम में मां दुर्गा की पुत्री रूप में होती है पूजा, न मेला और न विसर्जन की परंपरा

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 19 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
दुमका के धधकिया सतन आश्रम में मां दुर्गा की पुत्री रूप में होती है पूजा, न मेला और न विसर्जन की परंपरा

बेटी के सम्मान का संदेश देती है दुमका के धधकिया सतन आश्रम की अनोखी दुर्गा पूजा, 57 साल पुरानी परंपरा, नहीं निकलता विसर्जन जुलूस, कन्या प्रधान पूजा में बेटियां संभालती हैं अनुष्ठान की जिम्मेदारी।

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बेटी के सम्मान का संदेश देती है अनोखी दुर्गा पूजा

57 साल पुरानी परंपरा, विसर्जन जुलूस नहीं निकलता

कन्या प्रधान पूजा में बेटियां संभालती हैं अनुष्ठान की जिम्मेदारी

एंकर दुर्गा पूजा में मां की प्रतिमा स्थापित की जाती है और विजयादशमी के बाद विसर्जन होता है। लेकिन दुमका के धधकिया सतन आश्रम में दुर्गा पूजा की परंपरा कुछ अलग है। यहां मां दुर्गा को बेटी के रूप में मानकर पूजा की जाती है। न मेला लगता है और न ही विसर्जन के लिए जुलूस निकलता है। 57 साल से चली आ रही यह परंपरा बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और समानता का संदेश देती है।

होल्ड अप साउंड रिपोर्ट

वीओ 1 दुमका शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर धधकिया सतन आश्रम में दुर्गा पूजा की अनोखी परंपरा निभाई जा रही है। यहां मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित होती है, लेकिन विसर्जन के लिए उसे आश्रम परिसर से बाहर नहीं ले जाया जाता। मंदिर के सामने बने जलकुंड में ही प्रतिमा समर्पित की जाती है। आश्रम की मान्यता है कि बेटी सम्मान और स्वाभिमान का प्रतीक है, इसलिए उसके आगमन और विदाई को शोर-शराबे से दूर रखा जाता है। इस परंपरा के इतिहास के बारे में बता रहे हैं आश्रम के मठाधीश स्वामी आत्मानंद।

बाइट- स्वामी आत्मानंद, मठाधीश

वीओ 2 धधकिया सतन आश्रम की स्थापना वर्ष 1969 में हुई थी और 1970 में पहली बार मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की गई। तभी से यहां यह परंपरा चली आ रही है। पहले जगदीश बाबा और माता सत्यवती देवी ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया और अब स्वामी आत्मानंद इसका निर्वहन कर रहे हैं। इस पूजा की खासियत है कि यहां बेटियां केवल पूजा में शामिल ही नहीं होतीं, बल्कि पूरे अनुष्ठान की जिम्मेदारी भी निभाती हैं। आश्रम का मानना है कि बेटियां देवी का स्वरूप हैं और उन्हें जाति की सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता। इस परंपरा को लेकर क्या कहती हैं बेटियां सुनिए।

बाइट- भारती, खुशबू रॉय और पूनम रॉय

अंतिम वीओ धधकिया सतन आश्रम की दुर्गा पूजा में शामिल होने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस वर्ष कोलकाता, पश्चिम बंगाल के शांतिपुर और फिनलैंड से भी श्रद्धालु यहां आए हैं।

दुमका से आर.के.नीरद की रिपोर्ट।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।