दुनिया भर में 24% टूटा सोना, भारत में सिर्फ 20% ही गिरे दाम; 4% का अंतर क्यों?
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ग्लोबल मार्केट में सोना भयंकर सस्ता हुआ है.
शुक्रवार को स्पॉट गोल्ड की कीमत 4,068.71 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुई, जो बीते 29 जनवरी, 2026 को दर्ज किए गए 5,379 डॉलर के रिकॉर्ड स्तर से लगभग 24% कम है.
आमतौर पर जब भी कोई कमोडिटी अपने रिकॉर्ड स्तर से 20% या उससे अधिक गिरती है, तो ऐसा माना जाता है कि वह 'बेयर मार्केट' या भारी मंदी के दौर में प्रवेश कर चुकी है.
वहीं, अगर भारत की बात करें तो ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में धनतेरस के दिन 99.9% शुद्ध सोना 1,46,300 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ, जबकि 29 जनवरी को इसकी कीमत 1,83,000 रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी.
यानी कि कीमतों में लगभग 20% की गिरावट आई है. अब सवाल यह आता है कि भारतीय खरीदारों को 4% का फायदा क्यों और कैसे मिला?
4% अंतर की क्या है वजह?
वैश्विक और भारतीय बाजारों में सोने की कीमतों में गिरावट के बीच का यह अंतर भारत सरकार की टैक्स नीतियों और करेंसी मार्केट की वजह से है.
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश सोना विदेशों से आयात करता है इसलिए देश में सोने की कीमतें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड रेटके अलावा दो और प्रमुख कारणों से तय होते हैं:-
इम्पोर्ट ड्यूटी- जनवरी में जब सोने की कीमतें अपने रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच गई थी, तब भारत ने इस पर 6% की दर से आयात शुल्क लगा रखा था. 13 मई को इसमें बदलाव करते हुए सरकार ने सोने और चांदी पर प्रभावी शुल्क को बढ़ाकर 15% कर दिया.
इसमें 10% बेसिक कस्टम ड्यूटी और 5% एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर सेस शामिल हैं.
इस कदम का मकसद आयात को कम करना और रुपये व विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहे दबाव को कम करना था, जो अंतर्राष्ट्रीय स्तर तेल की ऊंची कीमतों के कारण पहले से ही दबाव में थे.
यह फैसला प्रधानमंत्री <a title="नरेंद्र मोदी" href="https://www.abplive.com/topic/narendra-modi" data-type="interl
📡 स्रोत: ABP Live Vyapar