दुष्यंत गौतम बने राज्यपाल, कर्नाटक, ओडिशा, तमिलनाडु और केरल को मिला नया गवर्नर
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश के कई राज्यों में नए राज्यपालों की नियुक्तियां की हैं.
इस फेरबदल के तहत सिक्किम के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर को केरल का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है, जबकि केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को अब तमिलनाडु की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
इसके अलावा, ब्रज मोहन राम को ओडिशा, डॉ. सुधा यादव को कर्नाटक और डॉ. ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का राज्यपाल बनाया गया है. वहीं दुष्यंत गौतम को सिक्किम के नए राज्यपाल के रूप में नियुक्त किया गया है.
केरल से भेजे गए राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर मार्च से ही तमिलनाडु के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे, जब तत्कालीन राज्यपाल आर.एन. रवि को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया था.
अब राष्ट्रपति के नए आदेश के बाद वह तमिलनाडु के नियमित राज्यपाल बन गए हैं.
गोवा विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष रह चुके आर्लेकर इससे पहले हिमाचल प्रदेश और बिहार के राज्यपाल के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं. वहीं केरल में उनकी जगह ओम प्रकाश माथुर लेंगे.
राजस्थान से पूर्व राज्यसभा सांसद ओम प्रकाश माथुर ने जुलाई 2024 में सिक्किम के राज्यपाल के रूप में पदभार ग्रहण किया था.
चार राज्यों को मिले नए राज्यपाल
पलामू से पूर्व लोकसभा सांसद ब्रज मोहन राम को ओडिशा का नया राज्यपाल बनाया गया है, जो हरि बाबू कंभमपति की जगह लेंगे. कंभमपति ने जनवरी 2025 में ओडिशा के राज्यपाल के रूप में शपथ ली थी.
वहीं, महेंद्रगढ़ से पूर्व बीजेपी सांसद और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की पूर्व सदस्य डॉ.
सुधा यादव को थावरचंद गहलोत के स्थान पर कर्नाटक का राज्यपाल नियुक्त किया गया है.
मध्य प्रदेश के बालाघाट से पूर्व लोकसभा सांसद डॉ.
ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड में लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) गुरमीत सिंह की जगह जिम्मेदारी दी गई है.
इसके अलावा बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व राज्यसभा सांसद दुष्यंत गौतम को सिक्किम में ओम प्रकाश माथुर की जगह
📡 स्रोत: ABP Live
💡 पृष्ठभूमि (Background)
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कर्नाटक, ओडिशा, तमिलनाडु और केरल के लिए नए राज्यपाल नियुक्त किए, जिससे राज्यपालों के बीच फेरबदल हुआ। यह विषय भारत के राज्यपाल पदों में परिवर्तन पर केंद्रित है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्यपालों की भूमिका संविधान के तहत राज्यों के प्रशासन में संतुलन बनाए रखने में अहम है, और नए नियुक्तियों से प्रशासनिक प्राथमिकताएँ बदल सकती हैं। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि नयी नीतियों और योजनाओं के कार्यान्वयन में बदलाव आए, जिससे सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक क्षेत्र में