EC के फैसले ने इंडिया गठबंधन को किया एकजुट? 5 पॉइंट में समझें पूरी बात
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चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस का चुनाव चिन्ह और नाम फ्रीज कर दिया है, उसके इस एक फैसले ने इंडिया गठबंधन को एकजुट कर दिया है.
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार (18 सितंबर) को कहा कि यह लड़ाई सिर्फ ममता बनर्जी की नहीं है, बल्कि यह हर उस पार्टी और वोटर की है जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहते हैं.
इलेक्शन कमीशन के फैसले के तुरंत बाद कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने भी प्रतिक्रिया दी. वहीं समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने भी तंज कसा है. शिवसेना ने भी ममता का साथ दिया है.
दरअसल लोकसभा चुनाव के बाद से ही इंडिया गठबंधन अलग-थलग दिख रहा था, लेकिन इलेक्शन कमीशन के इस फैसले ने गठबंधन को फिर से करीब ला दिया है.
राहुल के साथ-साथ अन्य विपक्षी नेता भी ममता बनर्जी के साथ आते दिख रहे हैं.
राहुल गांधी ने दावा करते हुए कहा कि वोट चोरी, सरकार चोरी, अब पार्टी चोरी, ये हमारे लोकतांत्रिक पतन के प्रतीक बन गए हैं. उन्होंने एक्स पर लिखा, 'यह लड़ाई सिर्फ ममता बनर्जी की नहीं है.
यह हर राजनीतिक दल, हर मतदाता की लड़ाई है जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहता है. पहले शिवसेना, फिर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और अब तृणमूल कांग्रेस.
हर बार एक ही पैटर्न, भाजपा और निर्वाचन आयोग मिलकर एक पार्टी को तोड़ते हैं. फिर उसका चुनाव चिह्न छीन लिया जाता है.'
पहले शिवसेना, फिर NCP और अब तृणमूल कांग्रेस।
हर बार एक ही पैटर्न - BJP और चुनाव आयोग मिलकर एक पार्टी को तोड़ते हैं। फिर उसका चुनाव चिन्ह छीन लिया जाता है।
जब पूरी की पूरी पार्टी चोरी हो सकती है, तो करोड़ों भारतीयों के वोट चोरी होना भी हैरानी की बात नहीं।
वोट चोरी। सरकार चोरी।
Rahul Gandhi (@RahulGandhi) September 18, 2026
वेणुगोपाल ने इलेक्शन कमीशन पर साधा निशाना
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📡 स्रोत: ABP Live
💡 पृष्ठभूमि (Background)
चुनाव आयोग का निर्णय तृणमूल कांग्रेस का चुनाव चिन्ह और नाम फ्रीज करने का है, जिससे इंडिया गठबंधन एकजुट हुआ। यह विषय राजनीतिक स्थिरता और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ा है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह चुनावी नियमों के पालन और स्वतंत्र चुनावों के प्रति जनता के विश्वास को प्रभावित करती है। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि वे अधिक भरोसे के साथ वोट डालें, चुनावी दावों पर संतुलित दृष्टिकोण अपनाएँ और राजनीतिक दलों के बीच सहयोग से बेहतर नीतियाँ बनें।