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एमजीएसयू बीकानेर में विशेष व्याख्यान: 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति और भारतीय ज्ञान परंपरा' पर मंथन

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 4 अक्टूबर 2026 👁️ 2 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: जनता का संदेश
एमजीएसयू बीकानेर में विशेष व्याख्यान: 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति और भारतीय ज्ञान परंपरा' पर मंथन

महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय (MGSU) बीकानेर के IQAC द्वारा 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति एवं भारतीय ज्ञान परंपरा' पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. एस.के. अग्रवाल और एमजीएसयू कुलगुरु प्रो. अखिल रंजन गर्ग की मौजूदगी में भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने पर बल दिया गया।

बीकानेर, 23 सितंबर। महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय (एमजीएसयू), बीकानेर के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) की ओर से ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति एवं भारतीय ज्ञान परंपरा’ विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के कुलगुरु प्रो. एस.के. अग्रवाल रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता एमजीएसयू के कुलगुरु प्रो. अखिल रंजन गर्ग ने की।

मूल्यबोध और संस्कार आधारित शिक्षा पर जोर

मुख्य वक्ता प्रो. एस.के. अग्रवाल ने अपने संबोधन में भारतीय ज्ञान परंपरा को मूल्यबोध, संस्कार, नैतिकता और समग्र व्यक्तित्व विकास का आधार बताया। उन्होंने विद्यार्थियों और शिक्षकों से आह्वान किया कि वे प्राचीन ज्ञान परंपरा को आधुनिक और वर्तमान संदर्भों से जोड़कर आगे बढ़ें। वहीं, कुलगुरु प्रो. अखिल रंजन गर्ग ने कहा कि नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध भारतीय ज्ञान परंपरा से परिचित कराना अत्यंत आवश्यक है।

पाठ्यक्रम में शामिल हुई भारतीय ज्ञान परंपरा

IQAC निदेशक डॉ. धर्मेश हरवानी ने बताया कि विश्वविद्यालय ने नई शिक्षा नीति के तहत अपने विभिन्न पाठ्यक्रमों में भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विषयों को शामिल किया है। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के प्रशासनिक अधिकारी, विभागाध्यक्ष, शिक्षक, छात्र-छात्राएं और विभिन्न शिक्षण संस्थानों के प्रतिष्ठित शिक्षाविद बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

राष्ट्रीय शिक्षा नीति और भारतीय ज्ञान परंपरा पर यह विशेष व्याख्यान शिक्षा के क्षेत्र में एक नया संवाद स्थापित करता है। इस विषय में नीति के उद्देश्यों को भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के साथ जोड़कर समग्र शिक्षा प्रणाली को समृद्ध करने का प्रयास किया गया है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह शिक्षा नीति के व्यावहारिक कार्यान्वयन में सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य को शामिल करने की आवश्यकता को रेखांकित करती है, जिससे शिक्षण सामग्री अधिक सुसंगत और समाज के लिए उपयोगी बनती है। आम जनता पर इसका असर यह है कि छात्रों और

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।