भोपाल

एम्स भोपाल में बाल कैंसर जागरूकता सत्र, समय पर इलाज से बचती हैं 80-90 प्रतिशत जान

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 13 सितंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
एम्स भोपाल में बाल कैंसर जागरूकता सत्र, समय पर इलाज से बचती हैं 80-90 प्रतिशत जान

एम्स भोपाल में बाल कैंसर जागरूकता सत्र, समय पर इलाज से बचती हैं 80-90 प्रतिशत जान

मुख्य बिंदु: • बाल कैंसर जागरूकता माह के तहत एम्स भोपाल के बाल रोग विभाग ने पैथोलॉजी एवं लैब मेडिसिन, बाल शल्य चिकित्सा, रेडिएशन ऑन्कोलॉजी एवं रेडियोलॉजी विभागों के सहयोग से बाल चिकित्सा ओपीडी में जागरूकता सत्र आयोजित किया।

• चिकित्सकों ने बताया कि समय पर निदान और उचित उपचार से 80 से 90 प्रतिशत बच्चों में कैंसर पूरी तरह ठीक हो सकता है।

• विभागाध्यक्ष डॉ. शिखा मलिक ने बाल कैंसर देखभाल को टीम प्रयास बताया, जिसमें बाल रोग विशेषज्ञ, बाल कैंसर विशेषज्ञ, शल्य चिकित्सक, रेडियोलॉजिस्ट, पैथोलॉजिस्ट और नर्सिंग स्टाफ शामिल हैं।

• कैनकिड्स संस्था के सहयोग से एम्स भोपाल परिसर के निकट परिवारों के लिए आवासीय सुविधा और पोषण सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

सितंबर माह को बाल कैंसर जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य बचपन में होने वाले कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाना तथा समय पर निदान और उपचार के महत्व को रेखांकित करना है।

इसी क्रम में एम्स भोपाल के बाल रोग विभाग ने पैथोलॉजी एवं लैब मेडिसिन विभाग, बाल शल्य चिकित्सा विभाग, रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग एवं रेडियोलॉजी विभाग के सहयोग से बाल चिकित्सा ओपीडी में एक संवादात्मक बाल कैंसर जागरूकता सत्र आयोजित किया। इस सत्र में बचपन के कैंसर के शुरुआती लक्षणों की पहचान, समय पर रेफरल के महत्व, उपचार के क्षेत्र में हुई प्रगति तथा बेहतर परिणामों के लिए बहु-विषयक (मल्टी-डिसिप्लिनरी) देखभाल की भूमिका पर चर्चा की गई।

बाल रक्त एवं कैंसर रोग (हिमेटोलॉजी-ऑन्कोलॉजी) में डीएम कर रहे रेजिडेंट चिकित्सक डॉ. पक्किरेश रेड्डी, डॉ. अनुराग मोहंती और डॉ. मेघा धवन ने मरीजों, अभिभावकों और परिजनों से सीधा संवाद किया। उन्होंने बच्चों में होने वाले सामान्य कैंसर, शीघ्र पहचान और इलाज को बिना किसी अनावश्यक रुकावट के पूरा करने के महत्व पर विस्तार से चर्चा की।

उन्होंने स्वास्थ्य कर्मियों, अभिभावकों और समुदाय में बाल कैंसर जागरूकता की आवश्यकता पर भी बल दिया, ताकि कोई भी बच्चा समय पर और संभावित रूप से इलाज योग्य उपचार से वंचित न रहे। चिकित्सकों ने बताया कि समय पर निदान और उचित उपचार से लगभग 80 से 90 प्रतिशत बच्चों में कैंसर को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।

बाल रोग विभाग की विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. शिखा मलिक ने कहा कि बाल कैंसर की देखभाल एक टीम प्रयास है, जिसमें बाल रोग विशेषज्ञों, बाल रक्त एवं कैंसर रोग विशेषज्ञों, शल्य चिकित्सकों, रेडियोलॉजिस्ट, पैथोलॉजिस्ट, नर्सिंग अधिकारियों तथा अन्य सहायक सेवाओं के बीच निकट समन्वय आवश्यक है।

कैनकिड्स जैसी गैर-सरकारी संस्था (एनजीओ) के सहयोग से एम्स भोपाल बच्चों और परिवारों के लिए आवश्यक सहायक देखभाल भी उपलब्ध करा रहा है। इसमें संस्थान के निकट परिवारों के लिए एक आवासीय सुविधा ("घर से दूर घर") तथा पोषण सहायता शामिल है।

कैंसर के उपचार से गुजर रहे बच्चों और उनके अभिभावकों ने भी अपने अनुभव साझा किए और चिकित्सकों पर भरोसा, नियमित अनुवर्ती जांच (फॉलो-अप) तथा निर्धारित उपचार को पूरा करने के महत्व को रेखांकित किया। एक अभिभावक ने अपना कटु अनुभव साझा करते हुए बताया कि हड्डी के कैंसर के इलाज के चार चक्र पूरे करने के बाद उन्होंने उपचार बीच में छोड़कर धार्मिक उपचार का सहारा लिया, जिसके कारण बीमारी और बढ़ गई। उन्होंने अन्य अभिभावकों से अपील की कि वे किसी भी परिस्थिति में इलाज बीच में न छोड़ें, क्योंकि उपचार में देरी और रुकावट से इलाज सफल होने की संभावना काफी कम हो जाती है।

बाल रक्त एवं कैंसर रोग विशेषज्ञ (पीडियाट्रिक्स हिमेटोलॉजिस्ट-ऑन्कोलॉजिस्ट) डॉ. योगेंद्र सिंह यादव ने चिकित्सकों, मरीजों, अभिभावकों और परिजनों के साथ संवाद कर उनकी सभी जिज्ञासाओं का समाधान किया तथा कैंसर के उपचार और एम्स भोपाल में उपलब्ध सुविधाओं की विस्तृत जानकारी दी।

बाल रक्त एवं कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. नरेन्द्र कुमार चौधरी ने इस पहल में सहयोग देने वाले सभी विभागों और टीमों की सराहना की, जिन्होंने मिलकर बच्चों को उनकी कैंसर यात्रा में सहयोग दिया। उन्होंने कहा कि हर बच्चा इलाज की सर्वोत्तम संभावना का हकदार है और जागरूकता, समय पर निदान, समय पर उपचार तथा टीम भावना से यह संभव बनाया जा सकता है।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

बाल कैंसर जागरूकता माह के दौरान एम्स भोपाल के बाल रोग विभाग ने पैथोलॉजी, लैब मेडिसिन, बाल शल्य चिकित्सा, रेडिएशन ऑन्कोलॉजी और रेडियोलॉजी विभागों के साथ मिलकर बाल चिकित्सा ओपीडी में जागरूकता सत्र आयोजित किया। इस सत्र का उद्देश्य है कि माता‑पिता और देखभालकर्ता समय पर लक्षण पहचानें और शीघ्र निदान कराएँ, क्योंकि समय पर इलाज से 80‑90 प्रतिशत बच्चों की जान बचाई जा सकती है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि बाल कैंसर की पहचान अक्सर देर से होती है, जिससे उपचार की सफलता घटती है। जागरूकता बढ़ने से समाज में प्र

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।