भोपाल

एम्स भोपाल में दवाओं की सुरक्षा पर मंथन: मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के विशेषज्ञ जुटे

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 3 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
एम्स भोपाल में दवाओं की सुरक्षा पर मंथन: मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के विशेषज्ञ जुटे

मुख्य बिंदु: • एम्स भोपाल के फार्माकोलॉजी विभाग ने मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के लिए नौवां उन्नत प्रशिक्षण एवं समन्वयक बैठक आयोजित की। कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ) नरेन्द्र कोतवाल (रि) ने इसका उद्घाटन किया।

• लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ) नरेन्द्र कोतवाल (रि) ने कहा कि डॉक्टर की जिम्मेदारी दवा लिखने तक सीमित नहीं है, उसका सुरक्षित और विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करना भी उसका दायित्व है। दुष्प्रभाव होने पर मरीज के साथ आम जनता को भी बचाने के उपाय होने चाहिए, और समय पर रिपोर्टिंग व अनुवर्ती कार्रवाई जरूरी है।

• नकली और गुणवत्ता जांच में विफल दवाएं, उपभोक्ता रिपोर्टिंग, वैयक्तिकृत चिकित्सा, टीकाकरण के बाद की प्रतिकूल घटनाएं और टीबी की दवाओं से होने वाले दुष्प्रभावों पर सत्र हुए।

• उपभोक्ता पीवीपीआई के टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-180-3024 और क्षेत्रीय भाषाओं के फॉर्म से दवा के दुष्प्रभाव की सूचना दे सकते हैं।

• छठे राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह (17 से 23 सितंबर 2026) के तहत 21 सितंबर 2026 को हुई पोस्टर प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पदक और प्रमाणपत्र दिए गए।

एम्स भोपाल के फार्माकोलॉजी (औषधि विज्ञान) विभाग ने मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के लिए नौवां एडवांस्ड लेवल ट्रेनिंग इन फार्माकोविजिलेंस-कम-कोऑर्डिनेटर्स मीटिंग (फार्माकोविजिलेंस पर उन्नत प्रशिक्षण एवं समन्वयकों की बैठक) आयोजित की। फार्माकोविजिलेंस का अर्थ है दवाओं के दुष्प्रभावों की निगरानी, जांच और रिपोर्टिंग की व्यवस्था। यह विभाग भारतीय फार्माकोविजिलेंस कार्यक्रम (पीवीपीआई) के अंतर्गत दोनों राज्यों के लिए रीजनल ट्रेनिंग सेंटर-कम-एडवर्स ड्रग रिएक्शन मॉनिटरिंग सेंटर (क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र एवं दवा के प्रतिकूल प्रभावों की निगरानी केंद्र, आरटीसी-एएमसी) के रूप में कार्य करता है।

कार्यक्रम का उद्घाटन एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ) नरेन्द्र कोतवाल (रि) ने किया। उन्होंने मरीजों की सुरक्षा मजबूत करने में उन्नत प्रशिक्षण कार्यक्रमों के महत्व को रेखांकित किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि डॉक्टर की जिम्मेदारी केवल दवा लिखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि दवा का उपयोग सुरक्षित और विवेकपूर्ण ढंग से हो।

उन्होंने कहा कि किसी प्रतिकूल घटना के होने पर न केवल उस मरीज को बचाने के लिए उचित कदम उठाए जाने चाहिए, बल्कि प्रभावी फार्माकोविजिलेंस और रिपोर्टिंग के माध्यम से ऐसी घटनाओं को आम जनता में दोबारा होने से रोकने के उपाय भी किए जाने चाहिए। उन्होंने समय पर रिपोर्टिंग और अनुवर्ती कार्रवाई के महत्व पर भी जोर दिया।

डॉ शशि भूषण (प्रमुख वैज्ञानिक अधिकारी, आईपीसी, गाजियाबाद) ने देश में फार्माकोविजिलेंस की मौजूदा स्थिति और हाल के घटनाक्रम की जानकारी दी। आईपीसी यानी भारतीय फार्माकोपिया आयोग दवाओं के मानक तय करने वाली संस्था है।

डॉ बालाकृष्णन एस (प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, फार्माकोलॉजी विभाग, एम्स भोपाल) ने नकली दवाओं और गुणवत्ता जांच में विफल दवाओं पर जानकारीपूर्ण सत्र लिया। सत्र में सीडीएससीओ (केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन) के प्रतिनिधि के साथ संबंधित नियामकीय पहलुओं पर भी चर्चा हुई। इससे प्रतिभागियों को दवा की गुणवत्ता और मरीज की सुरक्षा को नियामक नजरिए से समझने का अवसर मिला।

डॉ नितिन आर. गायकवाड़ (प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, फार्माकोलॉजी विभाग, एम्स रायपुर) ने "कंज्यूमर रिपोर्टिंग: क्यों और कैसे?" विषय पर सत्र लिया। उन्होंने फार्माकोविजिलेंस में उपभोक्ताओं की भागीदारी का महत्व बताया और रिपोर्टिंग के विभिन्न तरीके समझाए। इनमें पीवीपीआई की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-180-3024 और विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध उपभोक्ता रिपोर्टिंग फॉर्म शामिल हैं। यानी कोई भी व्यक्ति दवा से हुई परेशानी की सूचना सीधे दे सकता है।

प्रशिक्षण में उभरते और बहुविषयक क्षेत्रों पर भी चर्चा हुई। डॉ शुभम अटल (अतिरिक्त प्रोफेसर, फार्माकोलॉजी विभाग, एम्स भोपाल) ने "एडवांसिंग पेशेंट सेफ्टी: इंटीग्रेटिंग फार्माकोविजिलेंस विद पर्सनलाइज्ड मेडिसिन" (मरीज सुरक्षा को आगे बढ़ाना: फार्माकोविजिलेंस को वैयक्तिकृत चिकित्सा से जोड़ना) विषय पर सत्र लिया।

उन्होंने वैयक्तिकृत चिकित्सा, यानी हर मरीज की जरूरत के अनुसार इलाज, का महत्व और दवा सुरक्षा व मरीज देखभाल पर इसके प्रभाव बताए। डॉ जयंती यादव (प्रोफेसर, फॉरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग, एम्स भोपाल) ने एईएफआई (टीकाकरण के बाद होने वाली प्रतिकूल घटनाएं) का परिचय दिया। उन्होंने इनकी समय पर और पूरी रिपोर्टिंग की जरूरत तथा कॉज़ेलिटी असेसमेंट (किसी घटना का कारण दवा या टीके से जुड़ा है या नहीं, यह परखने की प्रक्रिया) के सिद्धांत समझाए।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।