भोपाल

एम्स भोपाल में जबड़े के कैंसर के मरीजों के लिए डिजिटल प्लानिंग पर पहली कार्यशाला

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 29 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
एम्स भोपाल में जबड़े के कैंसर के मरीजों के लिए डिजिटल प्लानिंग पर पहली कार्यशाला

ख्य बिंदु:

एम्स भोपाल में वर्चुअल सर्जिकल प्लानिंग पर पहली सीएमई एवं हैंड्स-ऑन कार्यशाला हुई, जिसमें 100 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए।

आयोजन सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, दंत चिकित्सा, बर्न्स एवं प्लास्टिक सर्जरी तथा रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभागों ने मिलकर किया।

देश-विदेश के विशेषज्ञों ने जबड़े के पुनर्निर्माण और डेंटल इम्प्लांट की डिजिटल प्लानिंग पर व्याख्यान दिए।

प्रतिभागियों ने जबड़े की सर्जरी की योजना, सर्जिकल गाइड और डेंटल इम्प्लांट प्लानिंग का अभ्यास किया, साथ ही रोबोटिक सर्जरी सिमुलेशन भी सीखा।

उद्देश्य है कि मुख कैंसर के मरीजों के इलाज में डिजिटल प्लानिंग नियमित रूप से अपनाई जाए।

मुख के कैंसर के कारण जबड़े का हिस्सा गंवा चुके मरीजों के चेहरे की बनावट के साथ उनके चबाने और बोलने की क्षमता लौटाने की दिशा में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल ने एक अहम कदम उठाया है। एम्स में आयोजित वर्चुअल सर्जिकल प्लानिंग पर पहली सीएमई एवं हैंड्स-ऑन कार्यशाला में 100 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यशाला का विषय था "फिबुला फ्री फ्लैप एवं डेंटल इम्प्लांट पुनर्वास हेतु वर्चुअल सर्जिकल प्लानिंग तथा रोबोटिक सर्जरी सिमुलेशन"।

कार्यक्रम का आयोजन सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, दंत चिकित्सा, बर्न्स एवं प्लास्टिक सर्जरी तथा रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभागों ने संयुक्त रूप से किया। उद्घाटन एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) नरेन्द्र कोतवाल (रि) और मुख्य अतिथि एम्स दरभंगा के कार्यपालक निदेशक प्रो. (डॉ.) माधवानंद कर ने किया।

विशिष्ट अतिथि के रूप में अधिष्ठाता (शैक्षणिक) प्रो. (डॉ.) रजनीश जोशी, अधिष्ठाता (अनुसंधान) प्रो. (डॉ.) रेहान-उल-हक, अधिष्ठाता (परीक्षा) प्रो. (डॉ.) वैशाली वाल्के, चिकित्सा अधीक्षक प्रो. (डॉ.) विकास गुप्ता और उप निदेशक (प्रशासन) श्री संदेश कुमार जैन मौजूद रहे। आयोजन अध्यक्ष डॉ. विनय कुमार ने स्वागत भाषण दिया और आयोजन सचिव डॉ.

गुंजन चौकसे ने आभार व्यक्त किया।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ) नरेन्द्र कोतवाल (रि) ने कहा, "मुख कैंसर के मरीजों के लिए जीवन बचाने के साथ चेहरे की बनावट, चबाने और बोलने की क्षमता लौटाना भी जरूरी है। वर्चुअल सर्जिकल प्लानिंग जैसी तकनीकें इसमें सर्जनों को अधिक सटीकता देती हैं।"

मुख्य व्याख्यान में प्रो. माधवानंद कर ने बताया कि सिर और गर्दन के कैंसर की सर्जरी पहले के पारंपरिक तरीके से आगे बढ़कर आज डिजिटल रूप से योजना बनाकर किए जाने वाले पुनर्निर्माण तक पहुंच गई है। वैज्ञानिक सत्रों में देश-विदेश के प्रमुख संस्थानों से आए सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट (कैंसर सर्जन), रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट (विकिरण चिकित्सक), प्लास्टिक सर्जन और डेंटल ऑन्कोलॉजिस्ट एक मंच पर आए।

ऑस्ट्रेलिया के रॉयल डार्विन हॉस्पिटल के डॉ. रजनीकांत जानकीरामन ने ऑनलाइन जुड़कर बताया कि वर्चुअल प्लानिंग से उन नतीजों में सुधार हो रहा है, जो मरीजों के लिए सबसे अहम हैं। सीएमसी वेल्लोर के प्रो. (डॉ.) आई. राजेश ने रेडियोथेरेपी का पुनर्निर्मित जबड़े में हड्डी के भरने और डेंटल इम्प्लांट पर असर समझाया।

टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के प्रो. (डॉ.) सौम्या मैथ्यूज़ ने फिबुला फ्लैप पुनर्निर्माण (पैर की हड्डी के एक हिस्से से जबड़ा दोबारा बनाने की तकनीक) की डिजिटल प्लानिंग पर बात रखी। इसी संस्थान के प्रो. (डॉ.) संदीप गुरव ने बताया कि भविष्य में लगने वाले कृत्रिम दाँतों को ध्यान में रखकर नए जबड़े की योजना कैसे बनाई जाए।

संपूर्ण डिजिटल वर्कफ़्लो पर केस कैप्सूल के बाद प्राथमिक बनाम द्वितीयक पुनर्निर्माण और इम्प्लांट स्थापना पर पैनल चर्चा हुई। इसका संचालन न्यू चंडीगढ़ के एचबीसीएचआरसी के प्रो. (डॉ.) पंकज चौहान और एम्स भोपाल के डॉ. बी.एल. सोनी ने किया।

दोनों दिन हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण चला। डॉ. भास्कर अग्रवाल के मार्गदर्शन में प्रतिभागियों ने जबड़े के रिसेक्शन (प्रभावित हिस्सा हटाने) और पुनर्निर्माण की योजना, सर्जिकल गाइड डिज़ाइन तथा डेंटल इम्प्लांट प्लानिंग का अभ्यास किया। उन्होंने 3डी प्रिंटिंग का प्रदर्शन भी देखा। साथ ही सुश्रुत स्किल्स लैब में रोबोटिक सर्जरी सिमुलेशन और लैप्रोस्कोपिक एंडोट्रेनर पर अभ्यास कराया गया। आयोजकों ने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य मुख कैंसर के कारण जबड़े का हिस्सा खो चुके मरीजों के इलाज में डिजिटल प्लानिंग को नियमित रूप से अपनाना है, ताकि उनके चेहरे की बनावट के साथ-साथ चबाने और बोलने की क्षमता भी बहाल की जा सके।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।