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एम्स भोपाल एवं सिप्ला फाउंडेशन के बीच समझौता, मध्य भारत में मिलेगी बेहतर उपशामक देखभाल

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 7 सितंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
एम्स भोपाल एवं सिप्ला फाउंडेशन के बीच समझौता, मध्य भारत में मिलेगी बेहतर उपशामक देखभाल

एम्स भोपाल एवं सिप्ला फाउंडेशन के बीच समझौता, मध्य भारत में मिलेगी बेहतर उपशामक देखभाल

मुख्य बिंदु: • एम्स भोपाल और सिप्ला फाउंडेशन ने मध्य भारत में उपशामक देखभाल (Palliative Care) सेवाओं को मजबूत करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

• गंभीर और जीवन-सीमित बीमारियों (Serious and Life-Limiting Illnesses) से पीड़ित मरीजों को दर्द से राहत, मानसिक सहयोग और सम्मानजनक देखभाल उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा।

• चिकित्सकों और नर्सिंग कर्मियों को दर्द एवं बीमारी के लक्षणों के बेहतर प्रबंधन के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

• उन्नत अवस्था के कैंसर सहित गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए घर पर ही चिकित्सकीय देखभाल उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित की जाएगी।

गंभीर और जीवन-सीमित बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को बेहतर और सम्मानजनक देखभाल उपलब्ध कराने की दिशा में एम्स भोपाल ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। एम्स भोपाल और सिप्ला फाउंडेशन के बीच उपशामक देखभाल (Palliative Care) सेवाओं को मजबूत करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस पहल का उद्देश्य भोपाल के साथ-साथ पूरे मध्य भारत में उपशामक देखभाल की सुविधाओं को बेहतर बनाना है।

उपशामक देखभाल (Palliative Care) ऐसी चिकित्सा सेवा है, जिसका उद्देश्य गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज के दर्द और अन्य तकलीफों को कम करना तथा उसे मानसिक और भावनात्मक सहयोग देना है। इसका लक्ष्य मरीज को बीमारी के दौरान अधिक आराम और सम्मान के साथ जीवन जीने में मदद करना है।

एम्स भोपाल की उपशामक देखभाल इकाई के प्रभारी डॉ. अनुज जैन ने कहा कि गंभीर और जीवन-सीमित बीमारियों (Serious and Life-Limiting Illnesses) से जूझ रहे मरीजों के लिए उपशामक देखभाल आज की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि उन्नत अवस्था के कैंसर सहित गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को इलाज के साथ दर्द से राहत और भावनात्मक सहयोग की भी आवश्यकता होती है।

समझौते के तहत आम लोगों के बीच उपशामक देखभाल के बारे में जागरूकता बढ़ाई जाएगी और इससे जुड़ी गलत धारणाओं को दूर किया जाएगा। इसके साथ ही चिकित्सकों और नर्सिंग कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे मरीजों के दर्द और अन्य लक्षणों का बेहतर तरीके से प्रबंधन कर सकें।

इस पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा घर पर उपशामक देखभाल उपलब्ध कराना है। इसके लिए ऐसी व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिससे उन्नत अवस्था के कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को उनके घर पर आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल मिल सके। इससे मरीजों को बार-बार अस्पताल आने की परेशानी कम होगी और वे अपने परिवार के बीच अधिक आराम और गरिमा के साथ रह सकेंगे।

यह साझेदारी एम्स भोपाल और सिप्ला फाउंडेशन के संयुक्त प्रयास से आगे बढ़ाई जाएगी। सिप्ला फाउंडेशन सामाजिक उत्तरदायित्व और परोपकारी कार्यों के साथ-साथ उपशामक तथा जीवन के अंतिम चरण की देखभाल के क्षेत्र में लंबे समय से कार्य कर रहा है।

इस पहल को एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ) नरेन्द्र कोतवाल (रि) के प्रशासनिक सहयोग से इस पहल को आगे बढ़ाया जाएगा।

एम्स भोपाल और सिप्ला फाउंडेशन की यह साझेदारी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों और उनके परिवारों को उपचार के साथ दर्द से राहत, भावनात्मक सहयोग और सम्मानजनक देखभाल उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे मध्य भारत में उपशामक देखभाल सेवाओं को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।