एम्स भोपाल के विशेषज्ञों ने छात्राओं और शिक्षकों को किया जागरूक
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समय पर पहचान से पूरी तरह ठीक हो सकता है स्तन कैंसर, एम्स भोपाल के विशेषज्ञों ने छात्राओं और शिक्षकों को किया जागरूक
मुख्य बिंदु: • एम्स भोपाल के मेडिकल ऑन्कोलॉजी एवं हेमेटोलॉजी विभाग ने ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता माह (अक्टूबर 2026) के अंतर्गत शासकीय नवीन उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, अशोक विहार, आनंद नगर, भोपाल में कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम का नेतृत्व डॉ आकांक्षा चौधरी ने किया और एनाटॉमी विभाग की प्रोफेसर डॉ बर्था ने कैंसर सर्वाइवर के रूप में अपना अनुभव साझा किया।
• लगभग 250 महिलाओं, जिनमें कक्षा 11 और 12 की छात्राएं तथा विद्यालय के शिक्षकगण शामिल थे, को स्तन, मुख गुहा और गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर, उनके जोखिम कारकों, चेतावनी संकेतों और बचाव की जानकारी दी गई।
• ब्रेस्ट कैंसर विश्व में महिलाओं का सबसे आम कैंसर है। इसके लगभग हर चार में से एक मामले को जीवनशैली सुधारकर रोका जा सकता है। 40 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को मैमोग्राफी कराने की सलाह दी गई और बताया गया कि शुरुआती पहचान होने पर यह रोग पूरी तरह ठीक हो सकता है।
• सरकारी कार्यक्रम के तहत 14 वर्ष की बालिकाओं को सरकारी केंद्रों पर एचपीवी टीका निःशुल्क उपलब्ध है। एम्स भोपाल में इम्यूनोथेरेपी, टार्गेटेड थेरेपी और कीमोथेरेपी उपलब्ध हैं, कुछ टार्गेटेड थेरेपी आयुष्मान भारत योजना में निःशुल्क हैं, और मैमोग्राफी व बायोप्सी उचित दर पर होती हैं।
एम्स भोपाल के मेडिकल ऑन्कोलॉजी एवं हेमेटोलॉजी (कैंसर और रक्त रोग) विभाग ने ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता माह (अक्टूबर 2026) के अवसर पर शासकीय नवीन उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, अशोक विहार, आनंद नगर, भोपाल में कैंसर जागरूकता एवं रोकथाम कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम का नेतृत्व डॉ आकांक्षा चौधरी (मेडिकल ऑन्कोलॉजी एवं हेमेटोलॉजी विभाग) ने किया। इस अवसर पर एनाटॉमी (शरीर रचना विज्ञान) विभाग की प्रोफेसर डॉ बर्था (प्रोफेसर, एनाटॉमी विभाग) भी शामिल हुईं। कैंसर सर्वाइवर (कैंसर से उबर चुकीं) के रूप में डॉ बर्था के अनुभव ने कैंसर से प्रभावित लोगों के लिए साहस, उम्मीद और सहयोग का प्रेरक संदेश दिया।
कार्यक्रम में लगभग 250 महिलाओं ने भाग लिया, जिनमें कक्षा 11 और 12 की छात्राएं तथा विद्यालय के शिक्षकगण शामिल थे।
दोनों कंसल्टेंट (विशेषज्ञ चिकित्सकों) ने कैंसर के बारे में सामान्य जानकारी दी। उन्होंने स्तन कैंसर, मुख गुहा (मुंह के भीतर) के कैंसर और गर्भाशय ग्रीवा (बच्चेदानी के मुख) के कैंसर जैसे आम कैंसरों, उनके जोखिम कारकों, चेतावनी संकेतों और स्वस्थ जीवनशैली के बारे में बताया। तंबाकू से दूर रहने और चिंताजनक लक्षण दिखने पर चिकित्सकीय सलाह लेने के महत्व पर भी जोर दिया गया। अक्टूबर माह ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता माह होने के कारण स्तन कैंसर पर विशेष ध्यान दिया गया। इसमें स्तन में होने वाले बदलावों को पहचानना, स्वयं स्तन जांच और मैमोग्राफी (स्तन का विशेष एक्स-रे) की जानकारी शामिल रही।
विशेषज्ञों ने बताया कि स्तन कैंसर विश्व में महिलाओं को होने वाला सबसे आम कैंसर है। हर वर्ष महिलाओं में होने वाले कुल कैंसर के मामलों में लगभग एक चौथाई मामले स्तन कैंसर के होते हैं। दुनिया भर की अधिकतर महिलाओं में इसके सबसे आम जोखिम कारक बढ़ती उम्र, मोटापा, कम शारीरिक गतिविधि, शराब का सेवन और रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) के बाद कुछ प्रकार की हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (हार्मोन की कमी की भरपाई का उपचार) का उपयोग हैं। जीवनशैली में बदलाव और स्वस्थ आदतें अपनाकर लगभग हर चार में से एक स्तन कैंसर को रोका जा सकता है। इसके लिए सबसे जरूरी बातें हैं नियमित व्यायाम करना, वजन को नियंत्रित रखना और शराब से दूर रहना।
सभी आयु की महिलाओं के लिए अपने स्तन में होने वाले बदलावों के प्रति सजग रहना जरूरी है। 40 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को यूएसपीएसटीएफ (यूनाइटेड स्टेट्स प्रिवेंटिव सर्विसेज टास्क फोर्स) के दिशानिर्देशों के अनुसार मैमोग्राफी कराने की सलाह दी जाती है। शुरुआती अवस्था में पता चलने पर यह रोग पूरी तरह ठीक हो सकता है।
सत्र में एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण और जांच के माध्यम से गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर की रोकथाम की जानकारी भी दी गई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 28 फरवरी 2026 को शुरू किए गए सरकारी कार्यक्रम के तहत 14 वर्ष की बालिकाओं को सरकारी केंद्रों पर एचपीवी टीका निःशुल्क लगाया जाता है।
डॉ आकांक्षा चौधरी (मेडिकल ऑन्कोलॉजी एवं हेमेटोलॉजी विभाग) ने बताया कि एम्स भोपाल का मेडिकल ऑन्कोलॉजी एवं हेमेटोलॉजी विभाग स्तन कैंसर से प्रभावित मरीजों को अत्याधुनिक प्रिसिजन उपचार (हर मरीज की बीमारी के अनुसार सटीक इलाज) का पर्याप्त सहयोग देता है। इनमें इम्यूनोथेरेपी (शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कैंसर से लड़ने के लिए सक्रिय करने वाला उपचार), टार्गेटेड थेरेपी (कैंसर कोशिकाओं को सीधे निशाना बनाने वाला उपचार) और कीमोथेरेपी (दवाओं से कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने की पद्धति) शामिल हैं।
इनमें से कुछ टार्गेटेड थेरेपी एम्स भोपाल में आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत निःशुल्क उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि कई बार गांठ की आशंका वाली महिलाएं भी उनके पास आती हैं, जिनकी आगे जांच की जाती है। एम्स भोपाल में मैमोग्राफी और बायोप्सी (संदिग्ध गांठ का नमूना लेकर जांच) की सुविधा भी उचित दर पर उपलब्ध है।
स्तन कैंसर के उपचार के लिए आवश्यक बहुविषयक (अनेक विभागों के समन्वय से होने वाली) देखभाल में अन्य सहयोगी विभाग और इकाइयां भी योगदान देती हैं। इनमें जनरल सर्जरी और सर्जिकल ऑन्कोलॉजी (जो शल्य चिकित्सा करते हैं), रेडिएशन ऑन्कोलॉजी (स्तन कैंसर की सर्जरी के बाद विकिरण उपचार देने वाला विभाग), डायटेटिक्स (आहार विज्ञान), साइकियाट्री (मनोचिकित्सा), फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन (शारीरिक पुनर्वास) तथा पेन एंड पैलिएटिव केयर (दर्द एवं राहत देखभाल) शामिल हैं।
इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों और शिक्षकों को विश्वसनीय जानकारी देना, भ्रांतियों को दूर करना, कैंसर से जुड़ी झिझक को कम करना और उन्हें यह जागरूकता अपने परिवारों तथा समुदायों में साझा करने के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम में स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ावा देने में चिकित्सकों और शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका के महत्व को भी रेखांकित किया गया, ताकि एक अधिक जागरूक, संवेदनशील और स्वास्थ्य के प्रति सजग समाज का निर्माण हो सके।