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एन चंद्रशेखरन दोबारा नहीं बन पाएंगे Tata Sons के चेयरमैन? टाटा ट्रस्ट की मंजूरी बनेगी वजह

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 30 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: जनता का संदेश
एन चंद्रशेखरन दोबारा नहीं बन पाएंगे Tata Sons के चेयरमैन? टाटा ट्रस्ट की मंजूरी बनेगी वजह

टाटा ग्रुप के बीच पिछले कई दिनों से काफी बवाल मचा हुआ है.

खासतौर से जबसे एन चंद्रशेखरन को दोबारा से चेयरमैन बनाने का फैसला किया गया है, तब से मामला बढ़ता ही जा रहा है. नोएल टाटा नहीं चाहते हैं कि चंद्रशेखरन को दोबारा से चेयरमैन बनाया जाए.

लेकिन टाटा ग्रुप के कई और सदस्य उन्हें दोबारा से कार्यभार सौंपना चाहते हैं.

इसी बीच अब खबरें ऐसी भी सामने आ रही हैं कि टाटा ट्रस्ट का यदि मंजूरी नहीं होगी, तो एन चंद्रशेखरन दोबारा से टाटा संस के चेयरमैन नहीं बन पाएंगे.

ऐसा सीनियर एडवोकेट एचपी रनिना ने खुद बताया है.

क्या बोले एचपी रनिन? हाल ही में सीनियर एडवोकेट एचपी रनिना ने इस मामले को लेकर न्यूज एजेंसी ANI के साथ बातचीत की है.

इस दौरान उन्होंने कहा है कि, चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के लिए टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टियों की सहमति जरूरी है.

उन्होंने 29 सितंबर को दिए एक बयान में कहा कि, 'सर रतन टाटा ट्रस्ट और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी इस मामले में फैसला करेंगे.

इसके बाद वो टाटा संस के बोर्ड में अपने प्रतिनिधि निदेशकों को बताएंगे कि दोबारा नियुक्ति के प्रस्ताव पर किस तरह वोट करना है.

नोएल टाटा नहीं करेंगे फैसला

रनिना ने इस दौरान ये भी बताया कि, ये फैसला सिर्फ नोएल टाटा का नहीं है.

टाटा ट्रस्ट की ओर से बोर्ड में नामित निदेशकों में नोएल टाटा और वेणुगोपाल श्रीनिवासन शामिल हैं. इन्हें ट्रस्ट के निर्देश के अनुसार वोट करना होगा.

दोनों ट्रस्ट के प्रतिनिधियों की सहमति जरूरी

टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन में इस तरह की नियुक्ति के लिए टाटा ट्रस्ट ने नामित निदेशकों की तरफ से अफर्मेटिव वोट को जरूरी बताया गया है.

रनिना के मुताबिक, अगर इन नामित निदेशकों में से किसी एक की भी सहमति नहीं होती है, तो चेयरमैन की दोबारा नियुक्ति आगे नहीं बढ़ सकती.

साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट करीब तीन साल पहले इस व्यवस्था को वैध बता चुका है.

कोर्ट के मुताबिक, टाटा ट्रस्ट के नामित निदेशकों की सकारात्मक सहमति को अ

📡 स्रोत: ABP Live Vyapar

📰 पूरी खबर पढ़ें (ABP Live Vyapar पर जाएं)

💡 पृष्ठभूमि (Background)

टाटा समूह के भीतर एन चंद्रशेखरन को फिर से चेयरमैन बनाने के निर्णय पर विवाद हो रहा है, जहाँ नोएल टाटा और कुछ प्रमुख सदस्य इस कदम के विरोध में हैं। यह विषय टाटा ट्रस्ट की मंजूरी पर निर्भर है, जो निर्णय को अंतिम रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। खबर का महत्व इसलिए है क्योंकि टाटा समूह भारत की सबसे बड़ी कॉर्पोरेट इकाइयों में से एक है, और इसके नेतृत्व में बदलाव से निवेशकों, कर्मचारियों और बाजार पर गहरा असर पड़ सकता है। यदि चंद्रशेखरन को पुनः नियुक्त नहीं किया गया, तो समूह की रणनीति और निवेश य

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