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एनएचएम कर्मचारियों ने तीसरे दिन भी दिया धरना:गोद में बच्चे लेकर पहुंचीं महिला कर्मी, बोलीं- न सम्मान, न समान वेतन

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 11 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
एनएचएम कर्मचारियों ने तीसरे दिन भी दिया धरना:गोद में बच्चे लेकर पहुंचीं महिला कर्मी, बोलीं- न सम्मान, न समान वेतन

नियमितीकरण, समान काम-समान वेतन और कैशलेस इलाज की सुविधा की मांग को लेकर एनएचएम के संविदा कर्मचारियों का धरना तीसरे दिन भी जारी रहा। सीएमओ कार्यालय के बाहर चल रहे धरने में महिलाएं अपने छोटे बच्चों को गोद में लेकर पहुंचीं। कर्मचारियों का कहना है कि वे वर्षों से स्वास्थ्य सेवाओं में काम कर रहे हैं, लेकिन नियमित कर्मचारियों के समान वेतन और सुविधाएं नहीं मिलतीं।

किसी ने बताया कि कम वेतन में बच्चों की पढ़ाई और घर चलाना मुश्किल हो रहा है, तो किसी ने कहा कि कई-कई महीने वेतन का इंतजार करना पड़ता है। कर्मचारियों ने मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन जारी रखने की बात कही। रविवार को कर्मचारी घर रहेंगे और सोमवार को लखनऊ के इको गार्डन में धरना देंगे। 12 साल से नर्सिंग ऑफिसर, वेतन नियमित कर्मचारियों का एक तिहाई संविदा पर नर्सिंग ऑफिसर के पद पर काम कर रहीं रूपा ने बताया कि वह 12 साल से काम कर रही हैं।

उनके साथ नियमित कर्मचारी भी उसी पद पर काम करते हैं और काम भी एक जैसा है, लेकिन उनकी सैलरी संविदा कर्मचारियों से करीब तीन गुना है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में भी कर्मचारियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना काम किया। इसके बावजूद उन्हें नियमित कर्मचारियों के समान अधिकार नहीं मिले। रूपा के मुताबिक, कई कर्मचारी 15 साल से काम कर रहे हैं और कुछ वरिष्ठ कर्मचारी रिटायरमेंट की उम्र के करीब पहुंच गए हैं, फिर भी नियमितीकरण नहीं हुआ।

उनकी मांग है कि समान काम के लिए समान वेतन और समान अधिकार दिए जाएं। 8 साल से काम कर रहीं, दो-तीन महीने तक वेतन नहीं मिलता एक अन्य महिला कर्मचारी ने बताया कि वह करीब आठ साल से संविदा पर काम कर रही हैं। उनकी पोस्टिंग यूसीएचसी में है, जबकि उनका घर मिर्जापुर में है। उन्होंने बताया कि कम वेतन में घर चलाना मुश्किल होता है।

बच्चों की फीस, बस का किराया और दूसरे खर्च पूरे करने पड़ते हैं। कई बार दो-तीन महीने तक वेतन नहीं मिलता और जब वेतन आता है, तो पहले से लिया गया कर्ज चुकाने में पैसा चला जाता है। उन्होंने कहा कि परिवार में कमाने वाली वह अकेली हैं। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई और घर की जिम्मेदारियां संभालना मुश्किल हो जाता है।

उनकी मांग है कि कर्मचारियों को नियमित किया जाए, समान काम के लिए समान वेतन दिया जाए और कैशलेस इलाज की सुविधा मिले। बच्चों को लेकर धरने में पहुंचीं महिलाएं धरने में शामिल एक महिला कर्मचारी ने बताया कि कम वेतन के कारण बच्चों का भरण-पोषण और पढ़ाई का खर्च उठाना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने कहा कि उनका घर आजमगढ़ में है और वह करीब 20,500 रुपए महीने में परिवार चलाती हैं।

परिवार से दूर रहना और बच्चों की जिम्मेदारी अकेले संभालना चुनौती है। पति भी साथ नहीं रहते, ऐसे में दो बच्चों की परवरिश करना मुश्किल हो जाता है। महिला कर्मचारी ने कहा कि जब तक अपने अधिकारों के लिए आवाज नहीं उठाएंगे, तब तक समस्याओं का समाधान नहीं होगा। इसी वजह से कर्मचारी एकजुट होकर धरने पर बैठे हैं।

तीन मांगें, 15 साल से संविदा पर काम करने का दावा संविदा कर्मचारी संघ के वाराणसी जिलाध्यक्ष संदीप सिंह ने बताया कि कर्मचारियों की तीन प्रमुख मांगें हैं- नियमितीकरण, समान काम-समान वेतन और कैशलेस इलाज की सुविधा। उन्होंने कहा कि कई कर्मचारी करीब 15 साल से संविदा पर काम कर रहे हैं, लेकिन अब तक नियमित नहीं हुए।

संदीप सिंह के मुताबिक, कर्मचारियों को कम वेतन में घर चलाने, बच्चों को पढ़ाने और इलाज कराने में परेशानी होती है। वेतन मिलने पर उसका बड़ा हिस्सा कर्ज चुकाने में चला जाता है। उन्होंने सरकार से कर्मचारियों की मांगों पर विचार करने और उन्हें राहत देने की अपील की। 12 अक्टूबर को लखनऊ के इको गार्डन में धरना संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष ने बताया कि कर्मचारियों का आंदोलन 5 अक्टूबर से शुरू हुआ था।

5, 6 और 7 अक्टूबर को कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताया। इसके बाद 8, 9 और 10 अक्टूबर को सीएमओ कार्यालय के बाहर धरना दिया गया। उन्होंने बताया कि रविवार को कर्मचारी घर रहेंगे और सोमवार, 12 अक्टूबर को लखनऊ के इको गार्डन में धरना देंगे। कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री और एनएचएम के अधिकारियों से उनकी तीनों मांगों पर निर्णय लेने की अपील की है।

📡 स्रोत: NewsData.io

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