व्यापार

एसडीएम पति को देना होंगे 20 हजार रुपए हर माह:इंदौर फैमिली कोर्ट का आदेश, अप्रैल 2023 से मिलेगा भरण-पोषण; आवेदन की तारीख से आदेश लागू

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 15 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
एसडीएम पति को देना होंगे 20 हजार रुपए हर माह:इंदौर फैमिली कोर्ट का आदेश, अप्रैल 2023 से मिलेगा भरण-पोषण; आवेदन की तारीख से आदेश लागू

एसडीएम के पद पर कार्यरत पति को अपनी पत्नी को हर महीने 20 हजार रुपए भरण-पोषण के रूप में देने होंगे। इंदौर की फैमिली कोर्ट ने पति-पत्नी के बीच चल रहे भरण-पोषण के मामले में यह आदेश दिया है। प्रथम अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश डॉ.

कुलदीप जैन ने पति राहुल चौहान को निर्देश दिए हैं कि वह पत्नी निर्मला को 20 हजार रुपए प्रतिमाह दे। यह राशि 21 अप्रैल 2023 को आवेदन प्रस्तुत करने की तारीख से देय होगी। यह आदेश कोर्ट ने 9 सितंबर को जारी किया है। राहुल चौहान वर्तमान में गरोठ में एसडीएम के पद पर पदस्थ है। कोर्ट के आदेश के अनुसार पति को हर महीने की 10 तारीख तक भरण-पोषण की राशि चुकानी होगी।

इस तरह आदेश के अनुसार, आवेदन की तारीख से भुगतान की गणना की जाएगी। यदि इस अवधि में पति ने पत्नी को किसी अन्य आदेश के तहत भरण-पोषण की राशि का भुगतान किया है, तो उसे देय रकम में समायोजित किया जाएगा। पति के प्रशासनिक पद के बीच भरण-पोषण का मामला इस केस में पति का एसडीएम होना महत्वपूर्ण पहलू है।

भरण-पोषण तय करते समय पति की आर्थिक स्थिति, पत्नी की जरूरतों और उपलब्ध दस्तावेजों जैसे पहलुओं पर विचार किया जाता है। हालांकि, केवल पद के आधार पर राशि तय नहीं होती, बल्कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के अनुरूप उचित रकम निर्धारित की जाती है। कोर्ट ने उपलब्ध तथ्यों और दस्तावेजों पर विचार करते हुए पत्नी के लिए 20 हजार रुपए प्रतिमाह भरण-पोषण निर्धारित किया।

आदेश में भुगतान की शुरुआत आवेदन की तारीख से मानी गई है, इसलिए देय राशि की गणना भी उसी तारीख से की जाएगी। हर महीने 10 तारीख तक करना होगा भुगतान कोर्ट ने भुगतान की समय-सीमा भी स्पष्ट की है। पति को प्रत्येक महीने की 10 तारीख तक निर्धारित राशि पत्नी को देनी होगी। आदेश के मुताबिक भरण-पोषण की गणना 21 अप्रैल 2023 से की जाएगी।

इसमें पहले से किए गए भुगतान का समायोजन होने के कारण पति को उसी अवधि के लिए दोबारा भुगतान नहीं करना होगा, यदि वह राशि पहले ही दे चुका है। यह व्यवस्था देय भरण-पोषण की गणना में दोहरे भुगतान से बचने के लिए महत्वपूर्ण है। मामले में “दैनिक भास्कर” ने एसडीएम राहुल चौहान से उनका पक्ष जाना तो उनका कहना था कि उन्हें फैमिली कोर्ट के इस आदेश की कोई जानकारी नहीं है।

भरण-पोषण तय करने के लिए एक ही फॉर्मूला नहीं भरण-पोषण के मामलों में कोर्ट पति की आय, दोनों पक्षों की आर्थिक स्थिति, पत्नी की आवश्यकताओं और मामले से जुड़े अन्य प्रासंगिक तथ्यों पर विचार करता है। इस तरह की राशि तय करने के लिए कोई एक समान गणितीय फॉर्मूला लागू नहीं होता। कोर्ट को संबंधित मामले की परिस्थितियों के आधार पर उचित राशि निर्धारित करनी होती है।

पहले अंतरिम आदेश, फिर वसूली वारंट; अब भरण-पोषण पर फैसला निर्मला और राहुल चौहान का मामला इससे पहले भी चर्चा में आया था। जुलाई 2026 में इंदौर फैमिली कोर्ट के अंतरिम आदेश के बावजूद भरण-पोषण राशि का नियमित भुगतान नहीं होने पर मंदसौर में पदस्थ ज्वाइंट कलेक्टर राहुल चौहान के खिलाफ वसूली वारंट जारी करने के निर्देश दिए गए।

उस समय बकाया राशि 5.56 लाख रुपए बताई गई थी। कोर्ट ने 4 मई 2026 के अंतरिम आदेश में पत्नी को 20 हजार रुपए प्रतिमाह देने के निर्देश दिए थे। अब मामले में 9 अक्टूबर 2026 को इंदौर फैमिली कोर्ट ने भरण-पोषण के आवेदन पर फैसला सुनाया है। नए आदेश के मुताबिक, राहुल चौहान को पत्नी निर्मला को 20 हजार रुपए प्रतिमाह भरण-पोषण देना होगा।

यह राशि 21 अप्रैल 2023 को आवेदन प्रस्तुत करने की तारीख से देय होगी। भुगतान हर महीने की 10 तारीख तक करना होगा और इस अवधि में पहले से किए गए भरण-पोषण के भुगतान का समायोजन किया जाएगा। इस तरह मामले में अंतरिम राहत के आदेश और उसके पालन को लेकर हुई वसूली की कार्रवाई के बाद अब भरण-पोषण के आवेदन पर फैसला सामने आया है।

📡 स्रोत: NewsData.io

📰 पूरी खबर पढ़ें (NewsData.io पर जाएं)
J
JKS News Desk

जनता का संदेश की संपादकीय टीम आपके लिए भोपाल, मध्यप्रदेश और देश की सटीक और विश्वसनीय समाचार प्रस्तुत करती है।